{"_id":"67c733c2a432eafbb20c69fa","slug":"facility-of-ventilator-and-icu-ward-will-be-available-in-the-district-hospital-ballia-news-c-190-1-ana1001-134852-2025-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: जिला अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड की मिलेगी सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: जिला अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड की मिलेगी सुविधा
विज्ञापन
बलिया। जिला अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू की सुविधा मिलेंगी। स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों व एलटी को वेंटिलेटर चलाने के साथ ही आईसीयू संचालन की ट्रेनिंग दी जा रही है। आजमगढ़ स्थित मेडिकल काॅलेज में चिकित्सक सहित दस स्वास्थ्यकर्मी ट्रेनिंग लेने गए हैं। आने वाले दिनों में गंभीर मरीजों को वाराणसी व मऊ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जनपद के किसी भी सरकारी व निजी अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड की सुविधा नहीं है। इस कारण सड़क दुर्घटना के घायलों सहित अन्य गंभीर मरीजों को वाराणसी व मऊ जाना पड़ता है। जिला अस्पताल से रोज पांच से आठ मरीज वाराणसी रेफर होते हैं। अक्सर कई मरीजों की रास्ते में मौत हो जाती है। कोविड काल के बाद से जिले में 38 वेंटिलेटर अस्पतालों में बंद पड़े हैं। अब जिला अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को वेंटिलेटर चलाने के साथ ही आईसीयू की ट्रेनिंग दिला रहा है। जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर मुख्तार यादव, डॉक्टर पंकज कुमार, स्टाफ नर्स अंजली कुमारी, सुनीता, सुधा रानी, सरोज, एसएलटी व एलटी राहुल पाठक, शैलेंद्र राय, संतोष शर्मा व पप्पू यादव आजमगढ़ के मेडिकल काॅलेज में ट्रेनिंग लेने गए हैं।
-- -- -- -- -- -
अस्पतालों में शोपीस बने वेंटिलेटर
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। ट्राॅमा सेंटर में पांच वेंटिलेटर मशीन 10 वर्षों से धूल फांक रही है। कोविड काल में मशीनों का स्टॉल किया गया था। मगर संचालन की जानकारी न होने के कारण कमरों का ताला तक नहीं खुला। आईसीयू के संचालन की जानकारी का भी अभाव है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर प्रशिक्षण का कार्यक्रम चल रहा हैं।
विज्ञापन
-- -
कोविड काल में 30 बेड का पीकू वार्ड बना शोपीस
कोविड की दूसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 30 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया थे। इसमें 10 बेड वेंटिलेटर युक्त है। वेटिंलेटर के संचालन की जानकारी न होने के उपकरण खराब हो रहे हैं। गंभीर बच्चों को वाराणसी, मऊ जाना पड़ता है।
-- -- -- -- -- -- --
आईसीयू होती तो बच सकती थी चिकित्सक की जान
आईसीयू वार्ड व वेंटिलेटर की सुविधा न होने से जिले में सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक सहित अन्य गंभीर मरीजों की आए दिन मौत होती है। अर्बन काजीपुरा पर तैनात रहे डाॅ. राघवेन्द्र सिंह को समय से वेंटिलेटर व आईसीयू की सुविधा मिल गई होती तो उनकी असमय मौत नहीं हुई होती। हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें 60 किमी दूर मऊ ले जाना पड़ा। इससे हालत और बिगड़ गई।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
जिला अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड संचालन की आस जगी है। शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल में तैनात दो चिकित्सकों सहित दस स्वास्थ्यकर्मियों को वेंटिलेटर चलाने व आईसीयू वार्ड संचालन के प्रशिक्षण के लिए आजमगढ़ मेडिकल काॅलेज भेजा गया है। - डॉक्टर एसके यादव, सीएमएस जिला अस्पताल।
विज्ञापन
जनपद के किसी भी सरकारी व निजी अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड की सुविधा नहीं है। इस कारण सड़क दुर्घटना के घायलों सहित अन्य गंभीर मरीजों को वाराणसी व मऊ जाना पड़ता है। जिला अस्पताल से रोज पांच से आठ मरीज वाराणसी रेफर होते हैं। अक्सर कई मरीजों की रास्ते में मौत हो जाती है। कोविड काल के बाद से जिले में 38 वेंटिलेटर अस्पतालों में बंद पड़े हैं। अब जिला अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को वेंटिलेटर चलाने के साथ ही आईसीयू की ट्रेनिंग दिला रहा है। जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर मुख्तार यादव, डॉक्टर पंकज कुमार, स्टाफ नर्स अंजली कुमारी, सुनीता, सुधा रानी, सरोज, एसएलटी व एलटी राहुल पाठक, शैलेंद्र राय, संतोष शर्मा व पप्पू यादव आजमगढ़ के मेडिकल काॅलेज में ट्रेनिंग लेने गए हैं।
विज्ञापन
अस्पतालों में शोपीस बने वेंटिलेटर
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। ट्राॅमा सेंटर में पांच वेंटिलेटर मशीन 10 वर्षों से धूल फांक रही है। कोविड काल में मशीनों का स्टॉल किया गया था। मगर संचालन की जानकारी न होने के कारण कमरों का ताला तक नहीं खुला। आईसीयू के संचालन की जानकारी का भी अभाव है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर प्रशिक्षण का कार्यक्रम चल रहा हैं।
विज्ञापन
कोविड काल में 30 बेड का पीकू वार्ड बना शोपीस
कोविड की दूसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 30 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया थे। इसमें 10 बेड वेंटिलेटर युक्त है। वेटिंलेटर के संचालन की जानकारी न होने के उपकरण खराब हो रहे हैं। गंभीर बच्चों को वाराणसी, मऊ जाना पड़ता है।
आईसीयू होती तो बच सकती थी चिकित्सक की जान
आईसीयू वार्ड व वेंटिलेटर की सुविधा न होने से जिले में सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक सहित अन्य गंभीर मरीजों की आए दिन मौत होती है। अर्बन काजीपुरा पर तैनात रहे डाॅ. राघवेन्द्र सिंह को समय से वेंटिलेटर व आईसीयू की सुविधा मिल गई होती तो उनकी असमय मौत नहीं हुई होती। हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें 60 किमी दूर मऊ ले जाना पड़ा। इससे हालत और बिगड़ गई।
जिला अस्पताल में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड संचालन की आस जगी है। शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल में तैनात दो चिकित्सकों सहित दस स्वास्थ्यकर्मियों को वेंटिलेटर चलाने व आईसीयू वार्ड संचालन के प्रशिक्षण के लिए आजमगढ़ मेडिकल काॅलेज भेजा गया है। - डॉक्टर एसके यादव, सीएमएस जिला अस्पताल।