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Ballia News: अतिक्रमण, जलभराव और संकरी सड़कों ने नौ महीने में ले ली 180 लोगों की जान
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एनएच-31 स्थित दरामपुर गांव के समीप स्थित सड़क पर पसरा पेड़ की डाली दे रही हादसे को दावत।संवाद
बलिया। नौ महीने में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान से करीब 15 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है, इससे करीब 30 फीसदी से अधिक लोगों से राजस्व जुटाने के बावजूद जिले की सड़कों पर सुरक्षा के इंतजाम सवालों के घेरे में हैं। पिछले नौ महीने में करीब 288 सड़क दुर्घटनाओं में 180 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कहीं सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं पटरियों पर अतिक्रमण, जलभराव और अव्यवस्थित पार्किंग ने रास्ता संकरा कर दिया है।
दुर्घटना संभावित स्थलों पर चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त रोशनी की कमी भी जोखिम बढ़ा रही है। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले पांच प्रमुख मार्गों पर करीब छह किलोमीटर तक पटरियों पर अतिक्रमण की समस्या है। कई स्थानों पर सड़क से नीचे पटरियां होने के कारण वाहन चालकों के लिए संतुलन बनाए रखना चुनौती बन जाता है।
केस 1 : खोरीपाकड़ निजी वाहन स्टैंड के पास बुधवार को ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। स्टैंड के आसपास पटरी अतिक्रमण की जद में है। सवारी बैठाने के लिए ई-रिक्शा सड़क पर खड़ा करते हैं। जिससे दो लेन का रास्ता संकरा हो जाता है। ऐसे में बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
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केस 2 : कदम चौराहा और जगन्नाथ तिराहे के पास भी सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल हैं। बरसात के दौरान हाईवे पर करीब तीन से चार माह तक पानी जमा है। जलनिकासी और अतिक्रमण हटाने की व्यवस्था समय से नहीं होने के कारण अक्सर सड़क हादसे होते हैं।
केस 3 : माल्देपुर से कदम चौराहे तक करीब चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर चौड़ीकरण और डिवाइडर निर्माण के बाद भी रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने की शिकायत है। स्थानीय स्तर पर अवैध कट और अंधेरे के कारण रात में वाहन डिवाइडर पर चढ़ने की घटनाएं सामने आती है।
केस 4 : नरही थाना क्षेत्र के भरौली मार्ग के लखनऊ मोड पर सांकेतिक चिन्ह है, लेकिन सड़क तक उगी झाड़ियों के कारण दिखाई नहीं देता है। हर माह दो से तीन सड़क हादसे होते हैं।
-- -- -- -- -- -- सड़क सुरक्षा न होनेे से बढ़ रहे हादसे
-- 7 अगस्त बैरिया थाना क्षेत्र के श्रीपालपुर गांव के सामने बीएसटी बंधे पर बाइक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। हादसे में रितेश पासवान और रूपेश पासवान की मौत हुई। बंधे पर सुरक्षा पोल न लगाए जाने से अक्सर नीचे गिरने से बाइक सवार की मौत होती है।
-- 3 सितंबर बैरिया थाना क्षेत्र के एनएच-31 पर चिरैया मोड़ और देवराज ब्रह्म मोड़ के बीच पिकअप की चपेट में आने से चकिया गांव निवासी जलील अहमद की मौत हो गई। मोड़ खतरनाक होने व सांकेतिक पोल की कमी व सड़क पर जेब्रा न होने से हादसे होते हैं।
-- 14 सितंबर बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के छाता रेलवे क्रॉसिंग के पास सड़क के मोड़ पर सांकेतिक पोल न होने से बाइक से जा रहे सिपाही पारितोष मिश्र असंतुलित होकर पास के पानी भरी गड्ढे में गिरने से मौत हो गई।
-- 17 सितंबर सहतवार थाना क्षेत्र के बलेऊर उत्तर टोला निवासी राजेंद्र राजभर की सड़क पार करते समय बाइक की चपेट में आने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई।
-- -- -- -- -- -- -- सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए यातायात नियमों का पालन कराने के जागरूकता अभियान के अलावा चेकिंग व चालान काटा जाता है। दुर्घटना संभावित स्थलों पर चेतावनी बोर्ड, संकेतक और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा जाता है।- अनवर अली, यातायात निरीक्षक बलिया।
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दुर्घटना संभावित स्थलों पर चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त रोशनी की कमी भी जोखिम बढ़ा रही है। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले पांच प्रमुख मार्गों पर करीब छह किलोमीटर तक पटरियों पर अतिक्रमण की समस्या है। कई स्थानों पर सड़क से नीचे पटरियां होने के कारण वाहन चालकों के लिए संतुलन बनाए रखना चुनौती बन जाता है।
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केस 1 : खोरीपाकड़ निजी वाहन स्टैंड के पास बुधवार को ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। स्टैंड के आसपास पटरी अतिक्रमण की जद में है। सवारी बैठाने के लिए ई-रिक्शा सड़क पर खड़ा करते हैं। जिससे दो लेन का रास्ता संकरा हो जाता है। ऐसे में बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
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केस 2 : कदम चौराहा और जगन्नाथ तिराहे के पास भी सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल हैं। बरसात के दौरान हाईवे पर करीब तीन से चार माह तक पानी जमा है। जलनिकासी और अतिक्रमण हटाने की व्यवस्था समय से नहीं होने के कारण अक्सर सड़क हादसे होते हैं।
केस 3 : माल्देपुर से कदम चौराहे तक करीब चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर चौड़ीकरण और डिवाइडर निर्माण के बाद भी रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने की शिकायत है। स्थानीय स्तर पर अवैध कट और अंधेरे के कारण रात में वाहन डिवाइडर पर चढ़ने की घटनाएं सामने आती है।
केस 4 : नरही थाना क्षेत्र के भरौली मार्ग के लखनऊ मोड पर सांकेतिक चिन्ह है, लेकिन सड़क तक उगी झाड़ियों के कारण दिखाई नहीं देता है। हर माह दो से तीन सड़क हादसे होते हैं।

एनएच-31 स्थित दरामपुर गांव के समीप स्थित सड़क पर पसरा पेड़ की डाली दे रही हादसे को दावत।संवाद