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सामाजिक विषमता दूर करने पर जोर
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Sun, 29 Mar 2015 10:42 PM IST
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सामाजिक संस्था आईना के तत्वावधान में नगर के बापू भवन टाउन हाल के सभागार में रविवार को होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इसमें सभी समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की विशेषता का बखान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. जनार्दन राय ने कहा कि राही मासूम ने लिखा है कि मुर्दा बस्तियों के मुल्क में कोई जिंदा भी है। अगर कोई जिंदा है तो हिंदू व मुसलमान है। मै उनसे तकरीर करना चाहता हूं। चर्चा को विस्तार देते हुए कहा कि इंसानियत कहीं खो गई है। उसे ढूंढना होगा।
इंसानियत को बचाए और बनाए रखना होली का मुख्य उद्देश्य है। होली एवं ईद मिलन के उद्देश्यों की व्याख्या करते हुए अधिवक्ता रणजीत सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन समाजितक समरसता के प्रतीक हैं। पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान ने कहा कि समाज में व्याप्त विषमता को दूर करके ही समरसता लाई जा सकती है।
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उमाशंकर पाठक ने कहा कि संगठित होना सबसे जरुरी है। सिराज अहमद ने कौमी एकता के गीत गाकर आपसी भाईचारा को मजबूत करने का सुझाव दिया। अधिवक्ता मधूसूदन श्रीवास्तव ने कहा कि पहले तो हम होली घूम-घूमकर खेलते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। इसी को वापस लाने की जरुरत है।
इस मौके पर जाकिर हुसेन, विश्वनाथ चौधरी, डा. सुऐबुल इस्लाम, कन्हैया पांडेय, बब्लू सिंह, रामकृष्ण यादव, विनोद सिंह, डा. विश्राम यादव, कन्हैया अग्रवाल, लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण यादव आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. जनार्दन राय ने कहा कि राही मासूम ने लिखा है कि मुर्दा बस्तियों के मुल्क में कोई जिंदा भी है। अगर कोई जिंदा है तो हिंदू व मुसलमान है। मै उनसे तकरीर करना चाहता हूं। चर्चा को विस्तार देते हुए कहा कि इंसानियत कहीं खो गई है। उसे ढूंढना होगा।
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इंसानियत को बचाए और बनाए रखना होली का मुख्य उद्देश्य है। होली एवं ईद मिलन के उद्देश्यों की व्याख्या करते हुए अधिवक्ता रणजीत सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन समाजितक समरसता के प्रतीक हैं। पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान ने कहा कि समाज में व्याप्त विषमता को दूर करके ही समरसता लाई जा सकती है।
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उमाशंकर पाठक ने कहा कि संगठित होना सबसे जरुरी है। सिराज अहमद ने कौमी एकता के गीत गाकर आपसी भाईचारा को मजबूत करने का सुझाव दिया। अधिवक्ता मधूसूदन श्रीवास्तव ने कहा कि पहले तो हम होली घूम-घूमकर खेलते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। इसी को वापस लाने की जरुरत है।
इस मौके पर जाकिर हुसेन, विश्वनाथ चौधरी, डा. सुऐबुल इस्लाम, कन्हैया पांडेय, बब्लू सिंह, रामकृष्ण यादव, विनोद सिंह, डा. विश्राम यादव, कन्हैया अग्रवाल, लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण यादव आदि मौजूद रहे।