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Ballia News: इमरजेंसी गेट बंद, मजबूरी में सकरे रास्ते से गुजर रहे मरीज
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष का मुख्य गेट बंद कर निजी गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। गेट बंद होने से मरीजों संग तीमारदारों को परेशानी हो रही है। उन्हें गेट से सटे सकरे रास्ते से इलाज करवाने के लिए अंदर जाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी वार्ड में बेवजह भीड़ रोकने व चिकित्सकों की सुरक्षा की बात कह रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 से दो हजार मरीज विभिन्न बीमारियों की इलाज कराने पहुंचते हैं। सिर्फ इमरजेंसी में 120 से 140 गंभीर मरीजों का इलाज होता है। ओपीडी बंद होने या न होने पर मरीज इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक से चेक करवा कर दवा या इंजेक्शन लगवाते थे, इसके कारण पूरे दिन इमरजेंसी में मरीजों व तीमारदारों की भीड़ लगी रहती थी। सड़क दुर्घटना या गंभीर मरीज आने पर समय से इलाज नहीं मिल पाता है। गेट बंद होने से इमरजेंसी में मरीज जाने से कतरा रहे हैं। मेडिकल वार्ड व आयुष विंग में जाने वाले मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सुजीत कुमार यादव ने कहा कि इमरजेंसी कक्ष में बेवजह 24 घंटे भीड़ लगी रहती थी। अराजकतत्वों द्वारा रात में डयूटी पर तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों से विवाद करने व इमरजेंसी से दवा, मेडिकल सामान चोरी होने की शिकायत मिल रही थी। जिसको देखते हुए इमरजेंसी कक्ष का मुख्य गेट बंद कर वहां दो निजी गार्ड तैनात किए गए हैं। यह गार्ड एंबुलेंस, स्ट्रेचर से गंभीर मरीज आने पर गेट खोल मरीज को अंदर ले जाने में मदद भी करेंगे। अस्पताल आने वाले मरीजों की हर संभव बेहतर सेवा मिले यही प्रयास है। इमरजेंसी का यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य वार्डों में भी व्यवस्था लागू की जाएगी। अस्पताल में मरीजों के साथ एक से अधिक तीमारदार होने से साफ-सफाई के साथ अन्य व्यवस्था खराब हो जा रही है। जिससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 से दो हजार मरीज विभिन्न बीमारियों की इलाज कराने पहुंचते हैं। सिर्फ इमरजेंसी में 120 से 140 गंभीर मरीजों का इलाज होता है। ओपीडी बंद होने या न होने पर मरीज इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक से चेक करवा कर दवा या इंजेक्शन लगवाते थे, इसके कारण पूरे दिन इमरजेंसी में मरीजों व तीमारदारों की भीड़ लगी रहती थी। सड़क दुर्घटना या गंभीर मरीज आने पर समय से इलाज नहीं मिल पाता है। गेट बंद होने से इमरजेंसी में मरीज जाने से कतरा रहे हैं। मेडिकल वार्ड व आयुष विंग में जाने वाले मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सुजीत कुमार यादव ने कहा कि इमरजेंसी कक्ष में बेवजह 24 घंटे भीड़ लगी रहती थी। अराजकतत्वों द्वारा रात में डयूटी पर तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों से विवाद करने व इमरजेंसी से दवा, मेडिकल सामान चोरी होने की शिकायत मिल रही थी। जिसको देखते हुए इमरजेंसी कक्ष का मुख्य गेट बंद कर वहां दो निजी गार्ड तैनात किए गए हैं। यह गार्ड एंबुलेंस, स्ट्रेचर से गंभीर मरीज आने पर गेट खोल मरीज को अंदर ले जाने में मदद भी करेंगे। अस्पताल आने वाले मरीजों की हर संभव बेहतर सेवा मिले यही प्रयास है। इमरजेंसी का यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य वार्डों में भी व्यवस्था लागू की जाएगी। अस्पताल में मरीजों के साथ एक से अधिक तीमारदार होने से साफ-सफाई के साथ अन्य व्यवस्था खराब हो जा रही है। जिससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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