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प्रयास पर प्रयास... ‘मिशन’ फिर भी फेल
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बलिया। जिले में शौचालयों के निर्माण में भी खूब खेल हुआ है। यही कारण है कि तमाम प्रयासों के बावजूद स्वच्छ भारत मिशन अभियान परवान नहीं चढ़ सका है। कई गांवों में तो शौचालयों की धनराशि का गबन तक किया गया और अधिकारी मुकदमा दर्ज कराकर कोरम पूरा कर लिए।
जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है। बताया जाता है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुल साढ़े तीन लाख शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए शासन से पंचायती राज विभाग को धनराशि भी मिल चुकी है और इसके तहत गांवों में शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। खासकर पंचायतों को भेजे गए धन में खूब मनमानी की जाती है। पिछले कई वर्षों से शौचालयों के निर्माण में खूब धांधली भी की जा रही है। लेकिन जांच के नाम पर कई मामले में पंचायती राज विभाग के अफसर व कर्मचारी लीपापोती कर देते हैं। हालांकि कुछ मामलों में लगातार शिकायत के बाद कार्रवाई भी हुई।
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लापरवाहियां हुईं जमकर
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शासन ने वर्ष 2021-22 में जिले के लिए कुल 22664 शौचालय निर्माण का लक्ष्य उपलब्ध कराया। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मानें तो 2728 शौचालयों के निर्माण के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को धनराशि भेज दी गई है। हालांकि इसके बाद शासन ने माना कि लाभार्थियों को समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण शौचालयों का निर्माण प्रभावित होता है, इसके बाद शासन ने नियमों में बदलाव करते हुए लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजने का निर्देश दिया।
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पूर्व के वर्ष 2012-13 में 12308, 2013-14 में 7581, 2014-15 में 8390, 2015-16 में 8897, 2016-17 में स्वच्छ भारत मिशन व नमामि गंगे योजना के तहत जिले में 33523 शौचालयों के निर्माण के लिए शासन की ओर से धनराशि उपलब्ध कराई गई। वर्ष 2016-17 के शौचालयों के निर्माण के लिए 40 करोड़ 22 लाख 76 हजार की धनराशि पंचायती राज विभाग को मिली। लेकिन विभाग ने धनराशि को लाभार्थियों के खाते में न भेज कर ग्राम पंचायतों के खाते में भेजा। इसके चलते अधिकांश गांवों में शौचालय की धनराशि का बंदरबांट किया गया। हैरानी की बात है कि धनराशि भेजने के बाद विभागीय अधिकारियों ने कभी इसकी सुधि नहीं ली और वर्षों बाद जब सुधि ली तो गबन सामने पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लिया।
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कुछ में कार्रवाई तो कई मामले ठंडे बस्ते में
- शौचालयों के करीब 29 लाख गबन के मामले में बैरिया क्षेत्र के दयाछपरा गांव के सचिव समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
- रसड़ा के जाम, चिलकहर के हजौली गांव के मामले में जांच रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के ठंडे बस्ते में पड़ी है।
- नगरा के ग्राम पंचायत खैरानिस्फी में वर्ष 2013-14 में निर्मल ग्राम के तहत बने शौचालयों की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
- वर्ष 2009-10 में शासन की ओर से 8600 शौचालयों के निर्माण के लिए धनराशि पंचायती राज विभाग को दी गई। इसी साल चुनाव होने के कारण अधिकांश गांवों में शौचालयों की धनराशि का गोलमाल कर दिया गया। इसकी जांच के लिए कई तत्कालीन सीडीओ ने समय-समय पर पंचायती राज विभाग से आख्या मांगी, लेकिन विभाग मामले को दबाए रहा।
- नवानगर ब्लॉक के कठौड़ा गांव में वर्ष 2015-16 के शौचालय निर्माण में धांधली का मामला डीडीओ की जांच में आया। ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई हुई।
- बैरिया ब्लॉक के नौरंगा ग्राम पंचायत के भगवानपुर गांव में वर्ष 2015-16 के शौचालय निर्माण में पांच लाख के गबन की पुष्टि होने पर तत्कालीन डीएम ने तत्कालीन सचिव पर मुकदमा कराने का निर्देश दिया।- रसड़ा ब्लॉक के सरायभारती गांव में शौचालय निर्माण समेत अन्य विकास कार्यों में कुल 1.08 करोड़ के गबन का मामला आया। इस मामले में सचिव की तहरीर पर प्रधान समेत कुल सात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया।
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पूर्व के जिन मामलों में मुकदमा दर्ज कराया गया है उसकी विवेचना पुलिस की ओर से की जा रही है। अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर कई मामलों में कार्रवाई की गई है। शौचालयों के निर्माण पर नजर रखी जा रही है और शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है।
- एके श्रीवास्तव, डीपीआरओ, बलिया।
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जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है। बताया जाता है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुल साढ़े तीन लाख शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए शासन से पंचायती राज विभाग को धनराशि भी मिल चुकी है और इसके तहत गांवों में शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। खासकर पंचायतों को भेजे गए धन में खूब मनमानी की जाती है। पिछले कई वर्षों से शौचालयों के निर्माण में खूब धांधली भी की जा रही है। लेकिन जांच के नाम पर कई मामले में पंचायती राज विभाग के अफसर व कर्मचारी लीपापोती कर देते हैं। हालांकि कुछ मामलों में लगातार शिकायत के बाद कार्रवाई भी हुई।
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लापरवाहियां हुईं जमकर
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शासन ने वर्ष 2021-22 में जिले के लिए कुल 22664 शौचालय निर्माण का लक्ष्य उपलब्ध कराया। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मानें तो 2728 शौचालयों के निर्माण के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को धनराशि भेज दी गई है। हालांकि इसके बाद शासन ने माना कि लाभार्थियों को समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण शौचालयों का निर्माण प्रभावित होता है, इसके बाद शासन ने नियमों में बदलाव करते हुए लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजने का निर्देश दिया।
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पूर्व के वर्ष 2012-13 में 12308, 2013-14 में 7581, 2014-15 में 8390, 2015-16 में 8897, 2016-17 में स्वच्छ भारत मिशन व नमामि गंगे योजना के तहत जिले में 33523 शौचालयों के निर्माण के लिए शासन की ओर से धनराशि उपलब्ध कराई गई। वर्ष 2016-17 के शौचालयों के निर्माण के लिए 40 करोड़ 22 लाख 76 हजार की धनराशि पंचायती राज विभाग को मिली। लेकिन विभाग ने धनराशि को लाभार्थियों के खाते में न भेज कर ग्राम पंचायतों के खाते में भेजा। इसके चलते अधिकांश गांवों में शौचालय की धनराशि का बंदरबांट किया गया। हैरानी की बात है कि धनराशि भेजने के बाद विभागीय अधिकारियों ने कभी इसकी सुधि नहीं ली और वर्षों बाद जब सुधि ली तो गबन सामने पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लिया।
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कुछ में कार्रवाई तो कई मामले ठंडे बस्ते में
- शौचालयों के करीब 29 लाख गबन के मामले में बैरिया क्षेत्र के दयाछपरा गांव के सचिव समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
- रसड़ा के जाम, चिलकहर के हजौली गांव के मामले में जांच रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के ठंडे बस्ते में पड़ी है।
- नगरा के ग्राम पंचायत खैरानिस्फी में वर्ष 2013-14 में निर्मल ग्राम के तहत बने शौचालयों की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
- वर्ष 2009-10 में शासन की ओर से 8600 शौचालयों के निर्माण के लिए धनराशि पंचायती राज विभाग को दी गई। इसी साल चुनाव होने के कारण अधिकांश गांवों में शौचालयों की धनराशि का गोलमाल कर दिया गया। इसकी जांच के लिए कई तत्कालीन सीडीओ ने समय-समय पर पंचायती राज विभाग से आख्या मांगी, लेकिन विभाग मामले को दबाए रहा।
- नवानगर ब्लॉक के कठौड़ा गांव में वर्ष 2015-16 के शौचालय निर्माण में धांधली का मामला डीडीओ की जांच में आया। ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई हुई।
- बैरिया ब्लॉक के नौरंगा ग्राम पंचायत के भगवानपुर गांव में वर्ष 2015-16 के शौचालय निर्माण में पांच लाख के गबन की पुष्टि होने पर तत्कालीन डीएम ने तत्कालीन सचिव पर मुकदमा कराने का निर्देश दिया।- रसड़ा ब्लॉक के सरायभारती गांव में शौचालय निर्माण समेत अन्य विकास कार्यों में कुल 1.08 करोड़ के गबन का मामला आया। इस मामले में सचिव की तहरीर पर प्रधान समेत कुल सात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया।
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पूर्व के जिन मामलों में मुकदमा दर्ज कराया गया है उसकी विवेचना पुलिस की ओर से की जा रही है। अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर कई मामलों में कार्रवाई की गई है। शौचालयों के निर्माण पर नजर रखी जा रही है और शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है।
- एके श्रीवास्तव, डीपीआरओ, बलिया।