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कूड़ेदान का पता नहीं, नालियां बनी कचरा संग्रहण केंद्र
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नगर के चित्तू पांडेय चौराहा से स्टेशन तक जाने वाला नाला में भरा पड़ा कचरा।
- फोटो : BALLIA
बलिया। शहर क्षेत्र में अधिकांश मार्गों पर कूड़ेदान की व्यवस्था न होने से लोग नालियों में ही कचरा फेंक दे रहे हैं। इसके चलते अधिकांश नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं। नालियों की सफाई पर हर वर्ष लाखों की धनराशि खर्च की जाती है। कचरे के कारण अधिकतर नालियां जाम रहती हैं।
नगर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगरपालिका की ओर से कई तरह के उपाय किए जाते हैं। इसमें बड़े नाले और नालियों की साफ-सफाई भी है। इसके अलावा, जगह-जगह कूड़ेदान रखने का भी प्रावधान है लेकिन आलम यह है कि नगर में केवल कहीं-कहीं ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान न होने के कारण दुकानों का कचरा भी नाले और नालियों में डाल दिया जाता है। इसके चलते नाले हों या नालियां, हमेशा जाम रहती है। इसके चलते, पानी बहाव भी बाधित होता है। हर वर्ष बरसात से पूर्व बड़े नाले और नालियों की सफाई अभियान चलाकर कराया जाता है। इस पर नगरपालिका का भारी भरकम बजट भी खर्च होता है। इसके बावजूद, नालियों को जाम रहित रखने को लेकर ठोस उपाय नहीं किए जाते हैं। वर्तमान में नगर के हर बड़े नाले और नालियों में कूड़ा व अन्य कचरा फेंका जा रहा है। हालांकि इस वर्ष संयोग रहा कि बरसात के दिनों में भारी वर्षा नहीं हुई अन्यथा नाले और नालियों के जाम का असर साफ देखने को मिलता।
नाले की सफाई पर खर्च हुए थे एक करोड़
नगर हर वर्ष बारिश में डूबता है। मोहल्ले नहीं, कई सरकारी कार्यालय डूब जाते हैं। जिला कारागार के कैदियों को अन्यत्र जेलों में शिफ्ट करना पड़ता है। छह महीने तक समस्या रहती है। कारण कि नाला जाम रहता है। सीवरेज नेटवर्क नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है। इस वर्ष, नगरपालिका ने नगर के 51 बड़े नालों और कटहल नाले की सफाई पर लगभग एक करोड़ खर्च किए गए थे।
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चार वर्ष में ही सड़कों से गायब हो गए कूड़ेदान
चार वर्ष पहले गांव से लेकर शहर तक को ओडीएफ करने की कवायद शुरू हुई। वर्ष 2018 में गांवों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी लाखों की लागत से जगह-जगह कूड़ेदान रखे गए लेकिन धीरे-धीरे सभी कूड़ेदान सड़कों से गायब हो चुके हैं। जहां-तहां ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान नहीं होने के कारण लोग कचरे को नालियों में ही डालना शुरू कर देते हैं।
वर्जन
नालियों में कूड़ा कचरा डालने को लेकर लोगों को भी जागरुक रहना चाहिए। कुछ तो कचरा बारिश होने पर बहकर नाले में पहुंच जाते हैं। समय-समय पर सफाईकर्मियों से नालियों की सफाई कराई जाती है ताकि जाम की स्थिति न हो। - सत्यप्रकाश सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका, बलिया
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नगर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगरपालिका की ओर से कई तरह के उपाय किए जाते हैं। इसमें बड़े नाले और नालियों की साफ-सफाई भी है। इसके अलावा, जगह-जगह कूड़ेदान रखने का भी प्रावधान है लेकिन आलम यह है कि नगर में केवल कहीं-कहीं ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान न होने के कारण दुकानों का कचरा भी नाले और नालियों में डाल दिया जाता है। इसके चलते नाले हों या नालियां, हमेशा जाम रहती है। इसके चलते, पानी बहाव भी बाधित होता है। हर वर्ष बरसात से पूर्व बड़े नाले और नालियों की सफाई अभियान चलाकर कराया जाता है। इस पर नगरपालिका का भारी भरकम बजट भी खर्च होता है। इसके बावजूद, नालियों को जाम रहित रखने को लेकर ठोस उपाय नहीं किए जाते हैं। वर्तमान में नगर के हर बड़े नाले और नालियों में कूड़ा व अन्य कचरा फेंका जा रहा है। हालांकि इस वर्ष संयोग रहा कि बरसात के दिनों में भारी वर्षा नहीं हुई अन्यथा नाले और नालियों के जाम का असर साफ देखने को मिलता।
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नाले की सफाई पर खर्च हुए थे एक करोड़
नगर हर वर्ष बारिश में डूबता है। मोहल्ले नहीं, कई सरकारी कार्यालय डूब जाते हैं। जिला कारागार के कैदियों को अन्यत्र जेलों में शिफ्ट करना पड़ता है। छह महीने तक समस्या रहती है। कारण कि नाला जाम रहता है। सीवरेज नेटवर्क नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है। इस वर्ष, नगरपालिका ने नगर के 51 बड़े नालों और कटहल नाले की सफाई पर लगभग एक करोड़ खर्च किए गए थे।
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चार वर्ष में ही सड़कों से गायब हो गए कूड़ेदान
चार वर्ष पहले गांव से लेकर शहर तक को ओडीएफ करने की कवायद शुरू हुई। वर्ष 2018 में गांवों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में भी लाखों की लागत से जगह-जगह कूड़ेदान रखे गए लेकिन धीरे-धीरे सभी कूड़ेदान सड़कों से गायब हो चुके हैं। जहां-तहां ही कूड़ेदान देखने को मिलते हैं। कूड़ेदान नहीं होने के कारण लोग कचरे को नालियों में ही डालना शुरू कर देते हैं।
वर्जन
नालियों में कूड़ा कचरा डालने को लेकर लोगों को भी जागरुक रहना चाहिए। कुछ तो कचरा बारिश होने पर बहकर नाले में पहुंच जाते हैं। समय-समय पर सफाईकर्मियों से नालियों की सफाई कराई जाती है ताकि जाम की स्थिति न हो। - सत्यप्रकाश सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका, बलिया