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बारिश और तेज हवा के कारण 60 फीसदी धान की फसल बर्बाद होने की आशंका

Thu, 21 Oct 2021 10:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 10:24 PM IST
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Due to rain and strong wind, 60 percent of the paddy crop is feared to be ruined
लगातार बारिश और तेज हवा के कारण किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। मंगलवार को हुई बारिश से किसी एक गांव में नहीं, लगभग पूरे जनपद में खेतों में जलभराव की स्थिति है। तेज हवा के कारण दानों का भार बढ़ने से धान की फसल पर खेतों में गिर गई हैं। फसल गिरने से उसके बर्बाद होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। अनुमान है कि जिले में करीब 60 फीसदी धान की फसल बर्बाद हो सकती है।
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जिले में धान की खेती सबसे अधिक सदर, सिकंदरपुर, बेल्थरारोड, रसड़ा, बांसडीह तहसील के गांवों में होती है। मंगलवार को हुई बारिश और जेत हवा ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सुखपुरा के किसान संजय सिंह ने बताया कि लगभग पांच बीघे खेत में दान की खेती की थी। फसल तो गिर कर बर्बाद हो ही रही है। कटाई के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। किसान शंभू उपाध्याय ने बताया कि चार बीघे खेत में धान की फसल लगाई थी। कटाई के आसार नहीं दिख रहे हैं। फसल खेतों में बिछ गई है। करम्मर के किसान राजेश सिंह ने बताया कि लगभग 15 बीघे में धान की खेती की थी। तीन-चार बीघे फसल खेतों में बिछ गई है। हृदयानंद सिंह ने बताया कि गाढ़ी कमाई लगाकर 12 बीघे धान की फसल लगाई थी, लगभग चार बीघे फसल खेतों में बिछ गई है। मदन सिंह ने तीन बीघे धान की खेती की थी। पूरी फसल खेत में बिछ गई है। कटाई की भी उम्मीद नहीं है। सरकार को बर्बाद हुई फसल का सर्वे करा मुआवजा देना चाहिए। इस साल जिले में कुल 120360 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। कुल 308127 मी. टन उत्पादन का लक्ष्य है। बर्बादी को देखते हुए नहीं लगता कि लक्ष्य भी पूरा हो पाएगा। एक पखवारा पहले तीन दिनों तक हुई बारिश में मिर्च और टमाटर की फसल बर्बाद हो गई। अब किसान इन खेतों में फिर से फसल लगा रहे थे कि चक्रवात ने फिर नुकसान कर दिया।
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इस वर्ष खरीफ की खेती कहीं से भी लाभदायक नहीं रही। न तो सब्जी की खेती बची और न धान की फसल। तेज हवा और बारिश ने खूब तबाही मचाई है। अब तो धान की कटाई होने की उम्मीद ही नहीं बची है। खेतों में पानी भी भरा हुआ है। सरकार को किसानों को राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। - प्रवीण राय
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पूर्व के महीनों में लगातार बारिश से खेतों में पहले से ही पानी भरा था। अब चक्रवाती बारिश ने तो धान और सब्जी की खेती को बर्बाद कर दिया है। धान की फसलें तैयार हो चली थीं लेकिन अब उम्मीद नहीं कि कुछ बचेगा। सरकार अगर किसानों को मुआवजा नहीं देती है तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। - बूचन राय

इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी लेकिन तेज हवा ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। फसलों की क्षति का सर्वे बीमा एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा और रिपोर्ट भेजी जाएगी। - विकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बलिया।
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