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Ballia News: मानसून की बेरुखी में मोटे अनाज पर जोर, बढ़ा किसानों का झुकाव

Sun, 03 Sep 2023 10:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 Sep 2023 10:38 PM IST
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Due to indifference of monsoon, emphasis on coarse grains, farmers' inclination increased
बलिया। अबकी बार मानसून की बेरुखी है। शुरुआत में बारिश कम हुई जबकि बाद के दिनों में बारिश होने से किसानों को राहत मिली। इस बीच कृषि विशेषज्ञों के सुझाव पर किसानों ने मोटे अनाज की खेती की। सरकार भी मिलेट्स की खेती को बढ़ावा दे रही है।
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जिले में ज्वार, बाजरा, टागुन, सावां आदि की खेती पारंपरिक रूप से होती रही है। हालांकि धीरे-धीरे यह खेती जिले में नाममात्र की रह गई थी। लेकिन इस वर्ष एक बार फिर किसानों का झुकाव मोटे अनाज की खेती की ओर से हुआ है। इस वर्ष अबतक कुल 560.9 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य बारिश 45 मिमी कम है। उधर, धान की खेती में किसानों ने कटौती नहीं की है।
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सरकार का मोटे अनाजों के उत्पादन व प्रयोग करने पर काफी जोर है। इसको लेकर कई फसलों की बीज भी किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। कृषि विभाग की ओर से भी मोटे अनाजों की बोआई को लेकर किसानों को प्रेरित करने का काम किया गया जिसका असर भी दिखा। जून के महीने में बारिश कम होने पर कृषि विशेषज्ञों की ओर से भी किसानों को मोटे अनाज की खेती करने का सुझाव दिया गया। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष खरीफ के मोटे अनाजों को लेकर किसानों का झुकाव भी हुआ।
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किसानों का मानना है कि मोटे अनाजों के उत्पादन पर खर्च कम होता है और यह अनाज भी अन्य अनाजों की तरह ही अच्छे भाव देते हैं। इस वर्ष कृषि विभाग की ओर से भी खरीफ के मोटे अनाजों के आच्छादन लक्ष्य में बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि किसानों ने इससे भी अधिक रकबे में खेती की है। इसी बीच रुक-रुक कर हो रही बारिश से इन फसलों को काफी लाभ पहुंचा है और अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद है। भरौली गांव के किसान उदयनारायन राय, कोटवां नारायनपुर गांव के किसान चौधरी रामजी राय आदि ने बताया कि करीब दो दशक पहले तक खरीफ में 80 फीसदी खेतों में मोटे अनाज की खेती होती थी। लेकिन अब अधिकांश में धान व अन्य फसलों की खेती हो रही है। लेकिन इस वर्ष अधिकांश किसानों ने कोई न कोई मोटे अनाज की खेती की है। धान व गेहूं की खेती में लागत अधिक मुनाफा कम को देखते हुए किसानों का झुकाव एक बार मोटे अनाज की खेती की ओर होने लगा है।

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फसल पिछला लक्ष्य इस वर्ष का लक्ष्य हेक्टेयर में

मक्का 31536 32037

ज्वार 1911 1987

बाजरा 1803 1847

अरहर 7689 7852

मूंग 02 03

मूंगफली 316 331



मोटे अनाज के उत्पादन में अन्य फसलों की अपेक्षा काफी कम लागत होती है। यह अनाज स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। सरकार की ओर से भी इसकी खेती पर जोर है। इस वर्ष किसानों का झुकाव इस फसलों की ओर बढ़ा है और आच्छादन का लक्ष्य भी पूरा है। खरीफ में कम बारिश होने पर भी यह खेती खास प्रभावित नहीं होती है। - पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी, बलिया
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