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डाक्टर लिखते नहीं, दवाओं की भी कमी
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जिला अस्पताल में बंद पड़ा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र।
- फोटो : BALLIA
बलिया। जिला अस्पताल के चिकित्सक जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली सस्ती दवाएं नहीं लिखते हैं। यही कारण है कि सिकंदरपुर और सहतवार में जन औषधि केेंद्र बंद हो चुके हैं। मौजूदा समय में जिला अस्पताल और महिला अस्पताल समेत जनपद में चार स्थानों पर जन औषधि केंद्र चल रहे हैं लेकिन वहां न तो पर्याप्त दवाएं हैं और न ही डाक्टर इनकी सस्ती जेनेरिक दवाओं को लिखते हैं। ऐसी स्थिति में गरीब मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
वर्तमान में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, तिखमपुर और सीएचसी रसड़ा में जन औषधि केंद्र संचालित हैं। अगर चिकित्सकों की उदासीनता बनी रही और जेनेरिक दवाएं लिखने पर जोर नहीं दिया तो इन जन औषधि केंद्रों की स्थिति भी सिकंदरपुर और सहतवार जैसी होगी। जन औषधि केंद्रों पर एमाक्सिक्लेव, सीफोडाक्सिम, सलबैक्टम, टीजोवैक्टम, सीफोराक्सिन आदि दवाएं हैं। बुखार, ब्लड प्रेशर, शुगर की दवाएं जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध हैं। वहीं महिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर 70 प्रकार की दवाएं है। ये दवाएं बाजार की ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती हैं।
कैल्शियम की दवा जन औषधि केंद्र पर मात्र 16 रुपये मिल रही है जबकि बाहर ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं 100 से 120 रुपये में बेच रही हैं। इसी प्रकार आयरन की जेनेरिक दवा 18 रुपये मिल रही है, जबकि ब्रांडेड कंपनी की दवा की कीमत 105 रुपये है। अगर डॉक्टर जेनेरिक दवा लिखते तो मरीज की जेब पर 40 से 50 प्रतिशत बोझ कम हो जाता है और दुकान संचालकों की भी रोजी-रोटी चलती रहती। लेकिन डाक्टर दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के प्रलोभन के चक्कर में बाहर की दवा लिख रहे हैं। इसके चलते मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। वहीं संचालक की रोजी रोटी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। जबकि डॉक्टर के भरोसे ही जन औषधि केंद्रों को वर्ष 2015 में खोला गया था। जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक सुनील सिंह ने बताया कि डाक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली करीब 200 प्रकार की दवाएं वर्तमान में उपलब्ध है। लेकिन अस्पताल के चिकित्सक जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाइयों को नहीं लिख रहे हैं। वे बाहर की दवाइयां लिखते है। बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जन औषधि केंद्र इसलिए खोला गया गया कि जो दवाइयां जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं होगी, वह कम दामों पर जन औषधि केंद्र पर मिल जाएगी। लेकिन यहां ठीक उल्टा हो रहा है। कहा कि अगर कोई भूला भटका मरीज काउंटर से दवा लेकर चिकित्सक को दिखाने जाते हैं तो चिकित्सक दवाओं को वापस करा देते है।
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कोट
सभी चिकित्सकों को जन औषधि केंद्र की दवा लिखने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसके बाद भी अगर वे जेेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।-डा. बीके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
ब्रांडेड दवाओं से बीस गुना सस्ती हैं जेनेरिक दवाएं
बलिया। जिला अस्पताल के फीजिशियन डाक्टर मनोज कुमार ने कहा कि अगर किसी को यह लगता है कि ब्रांडेड दवाएं ज्यादा फायदा करती हैं और जेनेरिक कम असरकारक होती हैं, तो यह गलतफहमी है। जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में सिर्फ नाम का फर्क है गुणवत्ता का नहीं। जन औषधि केंद्र पर ब्रांडेड के मुकाबले जेनेरिक दवाएं 20 गुना सस्ती मिल रही हैं।
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प्रतिक्रिया-
- जन औषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाएं ब्रांडेड दवाओं से बीस गुना सस्ती हैं। इसके बाद भी डाक्टर जन औषधि केंद्र की दवा नहीं लिखते हैं। डाक्टरों को जेनेरिक दवा लिखनी चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके।-प्रदीप कुमार गोंड
- पहले तत्कालीन डीएम के निर्देश पर डाक्टरों ने जेनेरिक दवा लिखनी शुरू की थी लेकिन बाद में बाहर की दवाएं लिखने लगे। अगर जेनेरिक दवा डाक्टर लिखते तो मरीजों व तीमारदारों को काफी सहूलियत होती।-सुभाष यादव
- जेनेरिक दवाएं भी फायदा कर रही हैं लेकिन पता नहीं क्यों डाक्टर जन औषधि केंद्र की दवा लिख रहे हैं। यह समझ से परे है। इसके लिए जिला प्रशासन को संज्ञान में लेना चाहिए।-राजकुमार सिंह
- डाक्टरों को अस्पताल की मुफ्त और जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखनी चाहिए ताकि मरीजों व तीमारदारों को आर्थिक बोझ न पड़े लेकिन डाक्टर ऐसा नहीं कर रहे हैं।-सत्येंद्र शर्मा
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वर्तमान में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, तिखमपुर और सीएचसी रसड़ा में जन औषधि केंद्र संचालित हैं। अगर चिकित्सकों की उदासीनता बनी रही और जेनेरिक दवाएं लिखने पर जोर नहीं दिया तो इन जन औषधि केंद्रों की स्थिति भी सिकंदरपुर और सहतवार जैसी होगी। जन औषधि केंद्रों पर एमाक्सिक्लेव, सीफोडाक्सिम, सलबैक्टम, टीजोवैक्टम, सीफोराक्सिन आदि दवाएं हैं। बुखार, ब्लड प्रेशर, शुगर की दवाएं जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध हैं। वहीं महिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर 70 प्रकार की दवाएं है। ये दवाएं बाजार की ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती हैं।
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कैल्शियम की दवा जन औषधि केंद्र पर मात्र 16 रुपये मिल रही है जबकि बाहर ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं 100 से 120 रुपये में बेच रही हैं। इसी प्रकार आयरन की जेनेरिक दवा 18 रुपये मिल रही है, जबकि ब्रांडेड कंपनी की दवा की कीमत 105 रुपये है। अगर डॉक्टर जेनेरिक दवा लिखते तो मरीज की जेब पर 40 से 50 प्रतिशत बोझ कम हो जाता है और दुकान संचालकों की भी रोजी-रोटी चलती रहती। लेकिन डाक्टर दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के प्रलोभन के चक्कर में बाहर की दवा लिख रहे हैं। इसके चलते मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। वहीं संचालक की रोजी रोटी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। जबकि डॉक्टर के भरोसे ही जन औषधि केंद्रों को वर्ष 2015 में खोला गया था। जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक सुनील सिंह ने बताया कि डाक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली करीब 200 प्रकार की दवाएं वर्तमान में उपलब्ध है। लेकिन अस्पताल के चिकित्सक जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाइयों को नहीं लिख रहे हैं। वे बाहर की दवाइयां लिखते है। बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जन औषधि केंद्र इसलिए खोला गया गया कि जो दवाइयां जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं होगी, वह कम दामों पर जन औषधि केंद्र पर मिल जाएगी। लेकिन यहां ठीक उल्टा हो रहा है। कहा कि अगर कोई भूला भटका मरीज काउंटर से दवा लेकर चिकित्सक को दिखाने जाते हैं तो चिकित्सक दवाओं को वापस करा देते है।
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सभी चिकित्सकों को जन औषधि केंद्र की दवा लिखने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसके बाद भी अगर वे जेेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।-डा. बीके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
ब्रांडेड दवाओं से बीस गुना सस्ती हैं जेनेरिक दवाएं
बलिया। जिला अस्पताल के फीजिशियन डाक्टर मनोज कुमार ने कहा कि अगर किसी को यह लगता है कि ब्रांडेड दवाएं ज्यादा फायदा करती हैं और जेनेरिक कम असरकारक होती हैं, तो यह गलतफहमी है। जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में सिर्फ नाम का फर्क है गुणवत्ता का नहीं। जन औषधि केंद्र पर ब्रांडेड के मुकाबले जेनेरिक दवाएं 20 गुना सस्ती मिल रही हैं।
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प्रतिक्रिया-
- जन औषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाएं ब्रांडेड दवाओं से बीस गुना सस्ती हैं। इसके बाद भी डाक्टर जन औषधि केंद्र की दवा नहीं लिखते हैं। डाक्टरों को जेनेरिक दवा लिखनी चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके।-प्रदीप कुमार गोंड
- पहले तत्कालीन डीएम के निर्देश पर डाक्टरों ने जेनेरिक दवा लिखनी शुरू की थी लेकिन बाद में बाहर की दवाएं लिखने लगे। अगर जेनेरिक दवा डाक्टर लिखते तो मरीजों व तीमारदारों को काफी सहूलियत होती।-सुभाष यादव
- जेनेरिक दवाएं भी फायदा कर रही हैं लेकिन पता नहीं क्यों डाक्टर जन औषधि केंद्र की दवा लिख रहे हैं। यह समझ से परे है। इसके लिए जिला प्रशासन को संज्ञान में लेना चाहिए।-राजकुमार सिंह
- डाक्टरों को अस्पताल की मुफ्त और जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखनी चाहिए ताकि मरीजों व तीमारदारों को आर्थिक बोझ न पड़े लेकिन डाक्टर ऐसा नहीं कर रहे हैं।-सत्येंद्र शर्मा
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