बलिया। विश्व में लोकतंत्र की स्थापना ही जनांदोलन से हुई। फ्रांस में क्रांति के बाद विश्व में लोकतंत्र की स्थापना हुई। उस समय स्थापित लोकतंत्र में जनना, पैतृक, धार्मिक, क्षेत्रीय भावनाओं को महत्व न देकर मनुष्यता को महत्व दिया गया। आज के लोकतंत्र में इन सभी चीजों को महत्वहीन कर दिया गया है। यह बातें अखिल भारतीय किसान महासभा के अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण ने रविवार को बापू भवन टाउन हॉल में पीयूसीएल की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी व श्रद्धांजलि सभा में कहीं। उन्होंने कहा कि भारत में जन आंदोलनों के जनक जयप्रकाश नारायण थे। उन्होंने पूरे देश में कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया और उन्हें मंजिल तक पहुंचाया। अनिल यादव ने कहा कि जेपी के समय घोषित आपातकाल था और आज देश में अघोषित आपातकाल में नागरिकों के संवैधानिक अधिकार पर संकट है। इसलिए सभी को संविधान पढ़ना और जानना पड़ेगा। पीयूसीएल के जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह ने संविधान और देश में चलने वाले कई जन आंदोलन पर चर्चा की। संकल्प संस्था के कलाकारों ने ‘जामुन के पेड़ नाटक’ के माध्यम से सरकारी तंत्र पर करारी चोट की। अध्यक्षता केएन उपाध्याय ने किया। इस दौरान मनोरंजन सिंह, गोपालजी सिंह, जेपी सिंह, उदय नारायण सिंह, हरि मोहन सिंह, असगर अली, पंकज राय, अनिल सिंह, अजय सिंह, बृजेश राय, श्रीप्रकाश सिंह रहे।