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दिल्ली कमाने स्कूटी से निकला, रास्ते में मौत ने निगला
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बैरिया थाना क्षेत्र के सोनबरसा निवासी हेमांक उपाध्याय (24) की आगरा एक्सप्रेस-वे पर शनिवार की देर शाम कन्नौज के पास डिवाइडर से स्कूटी टकराने से मौके पर ही मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
बूढ़े दादा व विधवा मां की मुफलिसी दूर करने के लिए दिल्ली में नौकरी कर रहे सोनबरसा निवासी हेमांक उपाध्याय शुक्रवार को अपने मित्र अछनमोल के साथ दिल्ली जाने के लिए स्कूटी से निकला था। घर से यह कह कर निकला था कि इस बार आऊंगा तो ढेर सारा पैसा लाऊंगा और घर की सभी समस्याओं का समाधान कर दूंगा। लेकिन ऊपर वाले को यह मंजूर नहीं था और आगरा एक्सप्रेस-वे पर कन्नौज के पास डिवाइडर से स्कूटी टकराने के कारण हेमांक की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि अनमोल गंभीर रूप से घायल हो गया। दिल्ली में नौकरी कर रहे हेमांक के बड़े भाई दिवांक उपाध्याय ने पोस्टमार्टम के बाद हेमांक के शव को रविवार के तड़के गांव ले आए, जहां पचरुखिया गंगा तट पर अंत्येष्टि की गई।
मृतक हेमांक के पिता तारक नाथ उपाध्याय की मौत पहले ही हो चुकी है। घर मे बूढ़े दादा-दादी व विधवा मां है। पड़ोसियों ने बताया कि पहले हेमांक के दादा झूलन उपाध्याय बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर घर का खर्चा चलाते थे। जबसे हेमांक व दिवांक दिल्ली में नौकरी करने लगे थे, तब से दादा झूलन उपाध्याय ने ट्यूशन पढ़ाना छोड़ दिया था। मृतक की मां और दादी का रोते रोते बुराहाल है।
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बूढ़े दादा व विधवा मां की मुफलिसी दूर करने के लिए दिल्ली में नौकरी कर रहे सोनबरसा निवासी हेमांक उपाध्याय शुक्रवार को अपने मित्र अछनमोल के साथ दिल्ली जाने के लिए स्कूटी से निकला था। घर से यह कह कर निकला था कि इस बार आऊंगा तो ढेर सारा पैसा लाऊंगा और घर की सभी समस्याओं का समाधान कर दूंगा। लेकिन ऊपर वाले को यह मंजूर नहीं था और आगरा एक्सप्रेस-वे पर कन्नौज के पास डिवाइडर से स्कूटी टकराने के कारण हेमांक की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि अनमोल गंभीर रूप से घायल हो गया। दिल्ली में नौकरी कर रहे हेमांक के बड़े भाई दिवांक उपाध्याय ने पोस्टमार्टम के बाद हेमांक के शव को रविवार के तड़के गांव ले आए, जहां पचरुखिया गंगा तट पर अंत्येष्टि की गई।
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मृतक हेमांक के पिता तारक नाथ उपाध्याय की मौत पहले ही हो चुकी है। घर मे बूढ़े दादा-दादी व विधवा मां है। पड़ोसियों ने बताया कि पहले हेमांक के दादा झूलन उपाध्याय बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर घर का खर्चा चलाते थे। जबसे हेमांक व दिवांक दिल्ली में नौकरी करने लगे थे, तब से दादा झूलन उपाध्याय ने ट्यूशन पढ़ाना छोड़ दिया था। मृतक की मां और दादी का रोते रोते बुराहाल है।
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