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मुकदमों के निस्तारण में देरी, बढ़ा रही मिलावटखोरी
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खान-पान की वस्तुओं में मिलावट की रोकथाम को किए जा रहे सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे मामलों में जुर्माना या सजा की कार्रवाई में देरी मिलावट के धंधेबाजों को बेखौफ बना रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मिलावट, मिथ्याछाप आदि मामलों के करीब 200 से ज्यादा मामले विभागीय न्याय निर्णायक अधिकारी/ एडीएम प्रशासन न्यायालय समेत विभिन्न न्यायालयों में तीन साल से से लंबित हैं। यही वजह है कि मिलावट के धंधेबाज हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
आमतौर पर सैंपल की प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट 15 दिन में मिल जानी चाहिए, लेकिन रिपोर्ट यहां आने में तीन से चार माह लग जाते हैं। रिपोर्ट में सैंपल फेल होने की दशा में अदालत में दर्ज कराए गए मुकदमों की सुनवाई और फैसलों में छह माह से तीन वर्ष लग रहे हैं। वर्तमान में 30 से ज्यादा मुकदमे सीजेएम और अन्य न्यायालयों में विचाराधीन हैं। यही नहीं, एडीएम कोर्ट में पिछले तीन वर्षों में करीब 185 मुकदमे लंबित हैं। जिस कारण मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि धंधेबाजों को अवसर मिल रहा है और इसीलिए मिलावट के मामले थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
मिलावट की रोकथाम को प्रवर्तन अभियान लगातार चलाया जा रहा है। जो नमूने मिलावटी और अनसेफ पाए गए, उनसे संबंधितों के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे दायर करा दिए गए हैं। कोरोना काल में अदालतें बंद रहने से लंबित वादों की संख्या बढ़ गई, लेकिन अब उनका निस्तारण जल्द शुरू होगा।
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- डीके श्रीवास्तव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बलिया।
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आमतौर पर सैंपल की प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट 15 दिन में मिल जानी चाहिए, लेकिन रिपोर्ट यहां आने में तीन से चार माह लग जाते हैं। रिपोर्ट में सैंपल फेल होने की दशा में अदालत में दर्ज कराए गए मुकदमों की सुनवाई और फैसलों में छह माह से तीन वर्ष लग रहे हैं। वर्तमान में 30 से ज्यादा मुकदमे सीजेएम और अन्य न्यायालयों में विचाराधीन हैं। यही नहीं, एडीएम कोर्ट में पिछले तीन वर्षों में करीब 185 मुकदमे लंबित हैं। जिस कारण मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि धंधेबाजों को अवसर मिल रहा है और इसीलिए मिलावट के मामले थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
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मिलावट की रोकथाम को प्रवर्तन अभियान लगातार चलाया जा रहा है। जो नमूने मिलावटी और अनसेफ पाए गए, उनसे संबंधितों के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे दायर करा दिए गए हैं। कोरोना काल में अदालतें बंद रहने से लंबित वादों की संख्या बढ़ गई, लेकिन अब उनका निस्तारण जल्द शुरू होगा।
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- डीके श्रीवास्तव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बलिया।