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Ballia News: पुत्र वियोग में दशरथ के निकले प्राण, राम को मनाने पहुंचे भरत

Mon, 19 Oct 2026 01:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 01:03 AM IST
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Dasharatha breathed his last out of grief for his son; Bharata arrived to persuade Rama to return.
प्राचीन रामलीला समिति नगरा द्वारा प्राचीन दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे रामलीला के दौरान लक्ष्म
बलिया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित रामलीलाओं में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। कहीं राम-भरत मिलाप ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं, तो कहीं सीता हरण और लक्ष्मण शक्ति की लीला ने भावविभोर कर दिया। वहीं, राम विवाह की भव्य बरात और वनगमन के प्रसंगों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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भीमपुरा के बरौली की ऐतिहासिक रामलीला के आठवें दिन राम मनावन और सीता हरण का मंचन हुआ। भरत-राम मिलाप, पिता दशरथ के निधन पर श्रीराम का शोक और भरत द्वारा चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद शूर्पणखा की नाक-कान काटने, स्वर्ण मृग और सीता हरण की लीला प्रस्तुत की गई।
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विशुनपुरा में रामलीला के चौथे दिन राम की भव्य बरात, कैकेयी-मंथरा संवाद और वनगमन का मंचन किया गया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। पिता के वचन का पालन करते हुए श्रीराम सीता और लक्ष्मण के साथ वन चले गए। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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बेल्थरारोड में श्रीरामलीला समिति की ओर से शिव धनुष भंग के बाद श्रीराम की भव्य बरात निकाली गई। बैंड-बाजे के साथ नगर भ्रमण के बाद रामलीला मंच पर श्रीराम-सीता का विवाह संपन्न हुआ। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर परिछन किया। जय श्रीराम के उद्घोष से नगर का वातावरण भक्तिमय हो गया।

नगरा में सार्वजनिक रामलीला समिति की ओर से सातवें दिन राजतिलक की घोषणा, कैकेयी के कोपभवन और राम वनगमन का मंचन हुआ। कैकेयी द्वारा 14 वर्ष का वनवास मांगने पर श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा निभाई। सीता और लक्ष्मण के साथ वन जाते श्रीराम का दृश्य देख सैकड़ों दर्शक भावुक हो उठे।


रसड़ा में छोटी काशी की रामलीला के नौवें दिन रावण-विभीषण संवाद, रामेश्वरम स्थापना, अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति और सुलोचना सती का मंचन हुआ। मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान जी के संजीवनी लाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इंदरपुर में प्राचीन दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मार्मिक मंचन हुआ। लक्ष्मण के मूर्छित होने पर श्रीराम के विलाप ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। हनुमान जी के संजीवनी लाने और लक्ष्मण की मूर्छा दूर होने पर पंडाल जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारों से गूंज उठा।
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