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व्यापारियों की विवशता गंदा पानी पीने की
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Thu, 03 Nov 2016 10:16 PM IST
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वर्षों से लगने वाले ऐतिहासिक ददरी मेले में जनपद सहित गैर जनपद और गैर प्रांतों से लोग पहुंचते हैं। इस मेले से नगरपालिका को हर साल लाखों रुपये के राजस्व की आय होती है। लेकिन मेले में पहुंचने वाले व्यापारियों को शुद्ध पेयजल भी नसीब नहीं होता। शुद्ध पेयजल के लिए लोगों को अपने जेब हल्के करने पड़ते हैं।
अभी चल रहे ददरी मेले के नंदी ग्राम में जनपद सहित गैर जनपद और प्रांतों के व्यापारी अपने पशुओं को लेकर पहुंचना शुरू कर दिए हैं, लेकिन उनको सुविधा के नाम पर शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। नगरपालिका द्वारा जैसे-जैसे धसाएं गए नल से व्यापारी और मेले में आने वाले लोग अशुद्ध पेयजल पीने को बाध्य हैं। यही स्थिति पूर्णिमा से शुरू होने वाले ददरी मेले में भी रहती है।
मेले में प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं। लेकिन शुद्ध पेयजल के लिए कहीं आरओ प्लांट की व्यवस्था या आरओ के शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं होती। ऐेस में मेले में आने वालों को लोगों अशुद्ध पेयजल पीने से विभिन्न तरह के रोगों की संभावना बनी रहती है। ददरी के नंदीग्राम मेले में आए बिहार के भोजपुर निवासी पशु व्यापारी संतोष क ा कहना है मेले में सबसे जरूरी शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
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जिससे मेले में आने वालों को नलों से निकलने वाले अशुद्ध पेयजल पीने को बाध्य होना पड़ रहा है। बिहार के भोजपुर निवासी सलाऊद्दीन का कहना है कि मेला प्रशासन द्वारा पेयजल के लिए नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन पानी गंदा रहता है। लेकिन शुद्ध पेयजल के अभाव में पीने को बाध्य होते हैं।
बांसडीह निवासी मेले में पहुंचे पशु कारोबारी मुन्ना गुप्ता का कहना है कि हम पशुओं का कारोबार करते हैं तो मेले में जाना ही है। मेले में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है कि नहीं इसके विषय में आवाज उठाना कठिन है। जैसे-तैसे काम चला लिया जाता है। खुर्शीद आलम का कहना है कि मेले में हम लोग आते जरूर है, लेकिन यहां शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नगरपालिका द्वारा लगे नल के गंदे और बालू भरे पानी को पीकर गुजारा कर रहे है। जबकि हम व्यापारी मेला प्रशासन को राजस्व भी देते हैं।
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अभी चल रहे ददरी मेले के नंदी ग्राम में जनपद सहित गैर जनपद और प्रांतों के व्यापारी अपने पशुओं को लेकर पहुंचना शुरू कर दिए हैं, लेकिन उनको सुविधा के नाम पर शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। नगरपालिका द्वारा जैसे-जैसे धसाएं गए नल से व्यापारी और मेले में आने वाले लोग अशुद्ध पेयजल पीने को बाध्य हैं। यही स्थिति पूर्णिमा से शुरू होने वाले ददरी मेले में भी रहती है।
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मेले में प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं। लेकिन शुद्ध पेयजल के लिए कहीं आरओ प्लांट की व्यवस्था या आरओ के शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं होती। ऐेस में मेले में आने वालों को लोगों अशुद्ध पेयजल पीने से विभिन्न तरह के रोगों की संभावना बनी रहती है। ददरी के नंदीग्राम मेले में आए बिहार के भोजपुर निवासी पशु व्यापारी संतोष क ा कहना है मेले में सबसे जरूरी शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
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जिससे मेले में आने वालों को नलों से निकलने वाले अशुद्ध पेयजल पीने को बाध्य होना पड़ रहा है। बिहार के भोजपुर निवासी सलाऊद्दीन का कहना है कि मेला प्रशासन द्वारा पेयजल के लिए नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन पानी गंदा रहता है। लेकिन शुद्ध पेयजल के अभाव में पीने को बाध्य होते हैं।
बांसडीह निवासी मेले में पहुंचे पशु कारोबारी मुन्ना गुप्ता का कहना है कि हम पशुओं का कारोबार करते हैं तो मेले में जाना ही है। मेले में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है कि नहीं इसके विषय में आवाज उठाना कठिन है। जैसे-तैसे काम चला लिया जाता है। खुर्शीद आलम का कहना है कि मेले में हम लोग आते जरूर है, लेकिन यहां शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नगरपालिका द्वारा लगे नल के गंदे और बालू भरे पानी को पीकर गुजारा कर रहे है। जबकि हम व्यापारी मेला प्रशासन को राजस्व भी देते हैं।