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दो साल पहले भी हुई थी चार लोगों की मौत
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Sat, 21 Nov 2015 11:23 PM IST
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सुखपुरा थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव में अवैध तरीके से दारू बनाने का कारोबार दशकों से फल-फूल रहा है। और तो और इलाके में अवैध दारू की मिनी फैक्ट्री तक चलती है। ऐतिहासिक सुरहा ताल सहित इलाके में दर्जनों जगह अवैध दारू बनाकर बेची जाती है।
कुछ शराब कारोबारी तो इस धंधे को नाव में ही चलाते हैं। कई बार इस कारोबार को बंद कराने के लिए इलाके की महिलाओं ने धरना-प्रदर्शन तक किया था।
लेकिन जिला प्रशासन तथा आबकारी विभाग की उदासीनता के कारण अवैध दारू की बिक्री को लेकर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। जिससे अवैध दारू बनाने वाले कारोबारियों का मनोबल बढ़ता रहा। ग्रामीणों की माने तो अवैध दारू का कारोबार पुलिस की मिलीभगत से ही होता है।
सुखपुरा थाने के बसंतपुर गांव में अवैध दारू बनाने का कार्य कई स्थानों पर चलता है। यह इलाका पिछले कई दशकों से चरचा में रहा है। इस गांव में दो साल पहले जहरीली शराब पीने से जनार्दन सिंह, चंदू सिंह, रामनाथ और चंदू बिंद की मौत हो गई थी।
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ग्रामीणों ने तब जिला मुख्यालय पहुंचकर शराब के अवैध कारोबार को बंद कराने के लिए धरना-प्रदर्शन तक किया था। लेकिन आश्वासन के बाद अवैध शराब का कारोबार और तेजी से बढ़ने लगा।
बसंतपुर में अवैध दारू के कारोबार के विरोध में ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन किया है। बावजूद जिला प्रशासन अवैध शराब के कारोबार को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा। लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से ह कारोबार चल रहा है।
यदि यह कारोबार बंद नहीं हुआ तो आगे और कई लोगों की जान जा सकती है। ग्रामीणों ने जितनी बार आवाज उठाई पुलिस ने ठोस कार्रवाई की जगह औपचारिकतापूर्ण कार्रवाई की। जिससे कारोबारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। सबकुछ जानते हुए पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है।
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कुछ शराब कारोबारी तो इस धंधे को नाव में ही चलाते हैं। कई बार इस कारोबार को बंद कराने के लिए इलाके की महिलाओं ने धरना-प्रदर्शन तक किया था।
लेकिन जिला प्रशासन तथा आबकारी विभाग की उदासीनता के कारण अवैध दारू की बिक्री को लेकर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। जिससे अवैध दारू बनाने वाले कारोबारियों का मनोबल बढ़ता रहा। ग्रामीणों की माने तो अवैध दारू का कारोबार पुलिस की मिलीभगत से ही होता है।
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सुखपुरा थाने के बसंतपुर गांव में अवैध दारू बनाने का कार्य कई स्थानों पर चलता है। यह इलाका पिछले कई दशकों से चरचा में रहा है। इस गांव में दो साल पहले जहरीली शराब पीने से जनार्दन सिंह, चंदू सिंह, रामनाथ और चंदू बिंद की मौत हो गई थी।
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ग्रामीणों ने तब जिला मुख्यालय पहुंचकर शराब के अवैध कारोबार को बंद कराने के लिए धरना-प्रदर्शन तक किया था। लेकिन आश्वासन के बाद अवैध शराब का कारोबार और तेजी से बढ़ने लगा।
बसंतपुर में अवैध दारू के कारोबार के विरोध में ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन किया है। बावजूद जिला प्रशासन अवैध शराब के कारोबार को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा। लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से ह कारोबार चल रहा है।
यदि यह कारोबार बंद नहीं हुआ तो आगे और कई लोगों की जान जा सकती है। ग्रामीणों ने जितनी बार आवाज उठाई पुलिस ने ठोस कार्रवाई की जगह औपचारिकतापूर्ण कार्रवाई की। जिससे कारोबारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। सबकुछ जानते हुए पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है।