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भ्रष्टाचार में लिप्त लिपिक किया गया सस्पेंड
ballia
Updated Sat, 12 Aug 2017 12:08 AM IST
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आरोपी
- फोटो : Vishnu Sharma
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जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम द्वारा पकड़े गए भ्रष्टाचार में लिप्त जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक पवन कुमार श्रीवास्तव को संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ मंडल एपी वर्मा ने सस्पेंड कर दिया है। लिपिक पर घूस की मांग करने व कई अनियमितताओं में लिप्त रहने पर यह कार्रवाई हुई है ।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को विद्यालय में समय से कार्यभार ग्रहण न कराना, उनसे पैसे की मांग करना व उनको अनावश्यक दौड़ाने की शिकायत मिली थी । जिलाधिकारी ने इसकी जांच कराई तो शिकायत सही मिली।
इस पर उन्होंने वरिष्ठ लिपिक को निलंबित करने के लिए निर्देशित दिया था। यह भी ज्ञात हो कि गुलाब देवी बालिका इंटर कॉलेज के प्रबंधक ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजकर पांच सहायक अध्यापिकाओं की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन वरिष्ठ सहायक पवन श्रीवास्तव ने मात्र एक सहायक अध्यापिका के पदोन्नति की पत्रावली ही संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ को भेजा।
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शेष चार सहायक अध्यापिकाओं की पत्रावली उपलब्ध न कराए जाने, शिक्षकों को चयन वेतनमान, वेतन निर्धारण, विनियमितीकरण के प्रकरण लंबित रखने में इनकी लापरवाही मिली है । इसके अलावा कन्या विद्याधन योजना में चेक वितरण की गई अनियमितता व जांच से संबंधित अभिलेख विवेचना अधिकारी को प्राप्त न कराए जाने के मामले में दोषी पाया गया।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को विद्यालय में समय से कार्यभार ग्रहण न कराना, उनसे पैसे की मांग करना व उनको अनावश्यक दौड़ाने की शिकायत मिली थी । जिलाधिकारी ने इसकी जांच कराई तो शिकायत सही मिली।
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इस पर उन्होंने वरिष्ठ लिपिक को निलंबित करने के लिए निर्देशित दिया था। यह भी ज्ञात हो कि गुलाब देवी बालिका इंटर कॉलेज के प्रबंधक ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजकर पांच सहायक अध्यापिकाओं की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन वरिष्ठ सहायक पवन श्रीवास्तव ने मात्र एक सहायक अध्यापिका के पदोन्नति की पत्रावली ही संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ को भेजा।
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शेष चार सहायक अध्यापिकाओं की पत्रावली उपलब्ध न कराए जाने, शिक्षकों को चयन वेतनमान, वेतन निर्धारण, विनियमितीकरण के प्रकरण लंबित रखने में इनकी लापरवाही मिली है । इसके अलावा कन्या विद्याधन योजना में चेक वितरण की गई अनियमितता व जांच से संबंधित अभिलेख विवेचना अधिकारी को प्राप्त न कराए जाने के मामले में दोषी पाया गया।