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प्रशासन नहीं मान रहा ठंड से हुई मौतें
Updated Thu, 11 Jan 2018 11:29 PM IST
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बलिया। जिले में कड़ाके की ठंड के चलते होने वाली मौत का सिलसिला जारी है। लेकिन प्रशासन की नजर में अभी तक एक भी मौत नहीं हुई है। कारण पोस्टमार्टम में मौत की पुष्टि ठंड से नहीं होना बताया जा रहा। कुछ तकनीकी पेंचों के चलते गरीब व असहायों को सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कड़ाके की ठंड से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अब तक करीब 12 से अधिक लोगों जानें जा चुकी हैं। इसकी जद में आकर जान गंवाने वालों में गरीब तबके के लोग अधिक हैं। ठंड के बचाव के लिए शासन की ओर से जगह-जगह अलाव जलाने व गरीबों तथा असहायों को कंबल वितरण करने का निर्देश दिया। लेकिन यह सब कागजों तक की सिमट कर रह गया है। जिला प्रशासन के आंकड़ों को देखें तो प्रत्येक तहसीलों में 11 सौ से अधिक कंबल गरीबों व असहायों को वितरित किया गया है लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। वहीं ग्रामीण इलाकों में कहीं भी सरकारी अलाव तक नहीं जल रहे हैं। कड़ाके की ठंड का कहर गरीबों व असहायों पर बदस्तूर जारी है और उनकी जानें भी जा रही हैं। जिले में अब तक ठंड के चलते एक दर्जन लोगों की जानें गई हैं लेकिन प्रशासन की ओर से ठंड से एक भी मौत नहीं होने की पुष्टि की गई है। अपर जिलाधिकारी की मानें तो कुल 10 मौतों की जांच कराई गई लेकिन जांच में ठंड से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई।
इनसेट...
बगैर पोस्टमार्टम नहीं मिलेगा लाभ
बलिया। ठंड से मौत होने पर सरकार की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान है। इसमें मृतक के परिजनों को चार लाख तक का मुआवजा दिया जा सकता है। हालांकि यह मुआवजा गरीब, असहाय व कृषक को ही देने का प्रावधान है। लेकिन प्रशासन ठंड से मौत तभी मानेगा जब मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाए और उसमें ठंड से मौत होने की पुष्टि हो। बगैर पोस्टमार्टम ठंड से मौत होने का दावा मान्य नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ठंड से मौत की पुष्टि होने पर आपदा राहत के तहत जिलाधिकारी को आवेदन किया जा सकता है।
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कोट
ठंड से मौत होने की कई सूचनाएं मिलीं जिसकी जांच कराई गई लेकिन अभी तक कोई भी मौत ठंड से होने की पुष्टि नहीं हुई है। बगैर पोस्टमार्टम के ठंड से मौत की पुष्टि नहीं की जा सकती।
मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी
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कड़ाके की ठंड से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अब तक करीब 12 से अधिक लोगों जानें जा चुकी हैं। इसकी जद में आकर जान गंवाने वालों में गरीब तबके के लोग अधिक हैं। ठंड के बचाव के लिए शासन की ओर से जगह-जगह अलाव जलाने व गरीबों तथा असहायों को कंबल वितरण करने का निर्देश दिया। लेकिन यह सब कागजों तक की सिमट कर रह गया है। जिला प्रशासन के आंकड़ों को देखें तो प्रत्येक तहसीलों में 11 सौ से अधिक कंबल गरीबों व असहायों को वितरित किया गया है लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। वहीं ग्रामीण इलाकों में कहीं भी सरकारी अलाव तक नहीं जल रहे हैं। कड़ाके की ठंड का कहर गरीबों व असहायों पर बदस्तूर जारी है और उनकी जानें भी जा रही हैं। जिले में अब तक ठंड के चलते एक दर्जन लोगों की जानें गई हैं लेकिन प्रशासन की ओर से ठंड से एक भी मौत नहीं होने की पुष्टि की गई है। अपर जिलाधिकारी की मानें तो कुल 10 मौतों की जांच कराई गई लेकिन जांच में ठंड से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई।
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बगैर पोस्टमार्टम नहीं मिलेगा लाभ
बलिया। ठंड से मौत होने पर सरकार की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान है। इसमें मृतक के परिजनों को चार लाख तक का मुआवजा दिया जा सकता है। हालांकि यह मुआवजा गरीब, असहाय व कृषक को ही देने का प्रावधान है। लेकिन प्रशासन ठंड से मौत तभी मानेगा जब मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाए और उसमें ठंड से मौत होने की पुष्टि हो। बगैर पोस्टमार्टम ठंड से मौत होने का दावा मान्य नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ठंड से मौत की पुष्टि होने पर आपदा राहत के तहत जिलाधिकारी को आवेदन किया जा सकता है।
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ठंड से मौत होने की कई सूचनाएं मिलीं जिसकी जांच कराई गई लेकिन अभी तक कोई भी मौत ठंड से होने की पुष्टि नहीं हुई है। बगैर पोस्टमार्टम के ठंड से मौत की पुष्टि नहीं की जा सकती।
मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी