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नदियों के किनारे जारी है अवैध खनन का धंधा
Updated Tue, 10 Apr 2018 11:44 PM IST
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बलिया। अवैध खनन रोकने को लेकर अब तक किए गए सभी प्रयास विफल साबित हो रहे। नदियों के किनारे धड़ल्ले से अवैध खनन का कारोबार फल-फूल रहा है। खनन को लेकर जारी नए निर्देश को लेकर भी प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस विभाग मौन हैं।
जनपद में सालों से सफेद बालू के अवैध खनन का कारोबार पुलिस व अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। वर्ष 2008-09 में सफेद बालू के खनन के लिए पट्टा देने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। लेकिन इसके बाद भी जिले में सफेद बालू के खनन का काम कभी नहीं रुका। हालांकि सरकार के निर्देश पर वर्ष 2017 में जिला प्रशासन की ओर से ई-टेंडरिंग की प्रकिया शुरू की गई। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि गंगा, घाघरा व टोंस के किनारे इससे इतर भी अवैध खनन किया जा रहा है। आलम यह है कि नरहीं थाना क्षेत्र के गंगा के किनारे के गांव कोटवां नारायनपुर, नसीरपुर मठ, सरयां, उजियार, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, पलियाखास, कोट अंजोरपुर से लेकर शहर से सटे महावीर घाट, हल्दी, बैरिया तक जगह-जगह सफेद बालू का खनन बदस्तूर जारी है। इसके अलावा घाघरा के किनारे डूहा बिहरा, कठौड़ा, लिलकर, सीसोटार, जमुई, बघुड़ी आदि गांवों के किनारे भी धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। टोंस नदी के किनारे चितबड़ागांव, थम्हनपुरा आदि स्थान सफेद बालू के कुख्यात माने जाते हैं। करीब एक माह पहले शासन की ओर से खनन को लेकर नया निर्देश भी जारी किया। इसके तहत पुलिस खनन कार्य नहीं रोकेगी लेकिन अवैध खनन की सूचना उच्चाधिकारियों को देगी ताकि अवैध खनन करने वालों पर प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई कर सकें। लेकिन किसी भी थाने की ओर से अब तक अधिकारियों को कोई सूचना नहीं दी गई है। प्रावधान यह भी किया गया है कि अवैध खनन होना पाए जाने पर संबंधित थाने के पुलिस अफसर को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो अवैध खनन का धंधा इलाकाई पुलिस की मिलीभगत से किया जा रहा है और खनन अधिकारी व राजस्व विभाग मौन धारण किए हुए हैं।
एडीएम मनोज सिंघल ने कहा किसफेद बालू के लिए ई-टेंडरिंग के जरिए खदान आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा बालू भंडारण को लेकर भी लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही है। अवैध खनन के बाबत सभी तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई है। अवैध खनन करने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
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जनपद में सालों से सफेद बालू के अवैध खनन का कारोबार पुलिस व अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। वर्ष 2008-09 में सफेद बालू के खनन के लिए पट्टा देने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। लेकिन इसके बाद भी जिले में सफेद बालू के खनन का काम कभी नहीं रुका। हालांकि सरकार के निर्देश पर वर्ष 2017 में जिला प्रशासन की ओर से ई-टेंडरिंग की प्रकिया शुरू की गई। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि गंगा, घाघरा व टोंस के किनारे इससे इतर भी अवैध खनन किया जा रहा है। आलम यह है कि नरहीं थाना क्षेत्र के गंगा के किनारे के गांव कोटवां नारायनपुर, नसीरपुर मठ, सरयां, उजियार, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, पलियाखास, कोट अंजोरपुर से लेकर शहर से सटे महावीर घाट, हल्दी, बैरिया तक जगह-जगह सफेद बालू का खनन बदस्तूर जारी है। इसके अलावा घाघरा के किनारे डूहा बिहरा, कठौड़ा, लिलकर, सीसोटार, जमुई, बघुड़ी आदि गांवों के किनारे भी धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। टोंस नदी के किनारे चितबड़ागांव, थम्हनपुरा आदि स्थान सफेद बालू के कुख्यात माने जाते हैं। करीब एक माह पहले शासन की ओर से खनन को लेकर नया निर्देश भी जारी किया। इसके तहत पुलिस खनन कार्य नहीं रोकेगी लेकिन अवैध खनन की सूचना उच्चाधिकारियों को देगी ताकि अवैध खनन करने वालों पर प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई कर सकें। लेकिन किसी भी थाने की ओर से अब तक अधिकारियों को कोई सूचना नहीं दी गई है। प्रावधान यह भी किया गया है कि अवैध खनन होना पाए जाने पर संबंधित थाने के पुलिस अफसर को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो अवैध खनन का धंधा इलाकाई पुलिस की मिलीभगत से किया जा रहा है और खनन अधिकारी व राजस्व विभाग मौन धारण किए हुए हैं।
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एडीएम मनोज सिंघल ने कहा किसफेद बालू के लिए ई-टेंडरिंग के जरिए खदान आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा बालू भंडारण को लेकर भी लाइसेंस देने की प्रक्रिया चल रही है। अवैध खनन के बाबत सभी तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई है। अवैध खनन करने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
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