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खाद्यान्न घोटाले के दोषी लिपिक की शुरु हुई पड़ताल, मची खलबली
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:08 PM IST
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बलिया। सात साल पहले खाद्यान्न घोटाले के सीबीसीआईडी जांच में दोषी मिले कर्मचारी के खिलाफ शासन ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। शासन के निर्देश पर मामले की पड़ताल शुरु हो गई है। इसको लेकर ग्राम्य विकास विभाग में खलबली मची हुई है।
वर्ष 2002 से 2005 के बीच जिले में करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले की जांच सीबीसीआईडी ने की थी। वर्ष 2009 में सीबीआईडी ने जांच में हनुमानगंज ब्लाक पर तैनात तत्कालीन एनआरईपी लिपिक अशोक कुमार झा को दोषी मानते हुए रिपोर्ट दी थी। इसके बाद तत्काकालीन जिला विकास अधिकारी ने चार नवंबर 2009 को दोषी कर्मी के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए ग्राम्य विकास आयुक्त को पत्र भेज कर स्वीकृति मांगी। लेकिन इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। हालांकि वर्ष 2011 में झा की तैनाती दुबहड़ में थी और यहां जमुआ गांव निवासी जयनारायन से विवाद हो गया। जय नारायन इस बाबत अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी। इसके बाद जिला विकास अधिकारी ने झा का स्थानांतरण बेलहरी ब्लॉक पर कर दिया। लेकिन कुछ दिनों बाद ही झा ने एक बार फिर दुबहड़ ब्लॉक पर अपनी तैनाती करा ली। तीन दिनों पहले 12 मार्च को जमुआ गांव निवासी जयनारायण ने प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को शिकायती पत्र भेजकर घोटाले में दोषी कर्मी के खिलाफ कार्रवाईकी मांग की। इसके बाद प्रमुख सचिव ने इस मामले में जिलाधिकारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर ग्राम्य विकास अभिकरण संबंधित कर्मचारी की पड़ताल में जुट गया है।
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वर्ष 2002 से 2005 के बीच जिले में करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले की जांच सीबीसीआईडी ने की थी। वर्ष 2009 में सीबीआईडी ने जांच में हनुमानगंज ब्लाक पर तैनात तत्कालीन एनआरईपी लिपिक अशोक कुमार झा को दोषी मानते हुए रिपोर्ट दी थी। इसके बाद तत्काकालीन जिला विकास अधिकारी ने चार नवंबर 2009 को दोषी कर्मी के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए ग्राम्य विकास आयुक्त को पत्र भेज कर स्वीकृति मांगी। लेकिन इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। हालांकि वर्ष 2011 में झा की तैनाती दुबहड़ में थी और यहां जमुआ गांव निवासी जयनारायन से विवाद हो गया। जय नारायन इस बाबत अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी। इसके बाद जिला विकास अधिकारी ने झा का स्थानांतरण बेलहरी ब्लॉक पर कर दिया। लेकिन कुछ दिनों बाद ही झा ने एक बार फिर दुबहड़ ब्लॉक पर अपनी तैनाती करा ली। तीन दिनों पहले 12 मार्च को जमुआ गांव निवासी जयनारायण ने प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को शिकायती पत्र भेजकर घोटाले में दोषी कर्मी के खिलाफ कार्रवाईकी मांग की। इसके बाद प्रमुख सचिव ने इस मामले में जिलाधिकारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर ग्राम्य विकास अभिकरण संबंधित कर्मचारी की पड़ताल में जुट गया है।
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