फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   पुल बंद होने की आड़ में करोड़ों का वारा-न्यारा!

पुल बंद होने की आड़ में करोड़ों का वारा-न्यारा!

Thu, 08 Jun 2017 11:23 PM IST
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
पुल बंद होने की आड़ में करोड़ों का वारा-न्यारा!
बलिया। नरहीं थाना क्षेत्र के भरौली स्थित प्रांतीय सीमा से प्रवर्तन दल को हटाया तो गया लेकिन वन उपज से राजस्व वसूली के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। हालांकि गंगा पुल बंद होने की आड़ में वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने तीन सालों में करोड़ों का वारा न्यारा किया।
विज्ञापन


वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूल करने के लिए प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया। हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने के बाद सरकार ने सभी विभागों के चेकपोस्ट को समाप्त कर दिया।
विज्ञापन

लिहाजा वन विभाग की ओर से प्रवर्तन दल की तैनाती सभी प्रांतीय सीमाओं पर की गई और बिहार प्रांत की ओर से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी बीच भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल को मरम्मत के लिए बिहार सरकार ने 12 मई 2014 को आधी रात में पुल के दोनों सिरे पर लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद वन विभाग के अफसरों ने पुल बंद होने के कारण भरौली में तैनात प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया लेकिन माफियाओं ने अपना कारोबार छोटे वाहनों से जारी रखा।

बताया जाता है कि इसके बाद से वन विभाग का गोरखधंधा शुरू हो गया। हालांकि प्रावधान है कि प्रवर्तन दल नहीं होने पर बिहार प्रांत की ओर से वन उपज लेकर आने वाले वाहनों पर जुर्माना लगाया जाए। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया है। बताया जाता है कि फेफना रेंज में स्थित इस प्रांतीय सीमा की जिम्मेदारी संबंधित रेंजरों की होती है। जबकि यह बात जगजाहिर है कि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर होता है।

सूत्रों की मानें तो पुल बंद होने की आड़ में भले ही वन विभाग की ओर से राजस्व की वसूली न की गई हो लेकिन इस दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों ने करोड़ों का वारा न्यारा किया है। भले ही प्रवर्तन दल हटा लिए गए लेकिन हमेशा विभाग के कर्मचारी या समय-समय पर मोबाइल टीम तैनात रही। सवाल उठता है कि आखिर इन लोगों ने तैनाती के दौरान क्या किया? जबकि तैनाती की पुष्टि डीएफओ भी कर चुके हैं।


वर्ष 2014 में पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के कारण प्रवर्तन दल को हटा लिया गया। समय-समय पर वन उपज लेकर आने वाले वाहनों को पकड़कर जुर्माना वसूल किया जाता है। प्रवर्तन दल हटाने का निर्णय उच्चाधिकारियों का है।
= सत्येन्द्र सिंह, रेंजर, फेफना रेंज, बलिया

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed