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नदियों के किनारे धड़ल्ले हो रहा अवैध खनन
Updated Mon, 12 Feb 2018 12:28 AM IST
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बलिया। लाख प्रयास के बावजूद अवैध खनन पर कोई लगाम नहीं लग सका है। गंगा, घाघरा व टोंस नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में पुलिस की मिलीभगत से यह धंधा फल फूल रहा है। खनन और राजस्व विभाग के अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। इस अवैध कारोबार से जहां बालू माफिया मालामाल हो रहे हैं वहीं हर महीने करोड़ों के राजस्व की भी हानि हो रही है।
वर्ष 2008-09 में सफेद बालू के खनन के लिए पट्टा देने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जून 2016 में बेल्थरारोड स्थित हल्दीरामपुर व खैराखास स्थित खदान का पट्टा भी समाप्त हो गया। लेकिन इसके बाद भी जिले में खनन का कार्य कभी नहीं रुका। हालांकि सरकार के प्रयास के बाद वर्ष 2017 में जिला प्रशासन की ओर से ई-टेंडरिंग की प्रकिया शुरू की गई। इसमें केवल चार बालू खदानों को शामिल किया गया है जो घाघरा व टोंस के किनारे के हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि गंगा, घाघरा व टोंस के किनारे धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा।
नरहीं थाना क्षेत्र के गंगा किनारे के गांव कोटवां नारायनपुर, नसीरपुर मठ, सरयां, उजियार, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, पलियाखास, कोट अंजोरपुर से लेकर शहर से सटे महावीर घाट, हल्दी, बैरिया तक जगह-जगह सफेद बालू का खनन बदस्तूर जारी है। इसके अलावा घाघरा के किनारे डूहा बिहरा, कठौड़ा, लिलकर, सीसोटार, जमुई आदि गांवों के किनारे भी धड़ल्ले से अवैध खनन का काम जारी है तो टोंस नदी के किनारे चितबड़ागांव, थम्हनपुरा आदि स्थानों पर सफेद बालू का खनन चरम पर है।
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इनसेट...
केवल चार खदानों का हुआ ई-टेंडर
बलिया। जिले में अब तक केवल बालू खदानों का ई-टेंडर किया गया है। इसमें रसड़ा तहसील के टोंस नदी के किनारे नगहर में 6.70 एकड़ व मुड़ेरा में 4.26 एकड़ तथा घाघरा किनारे बेल्थरारोड तहसील के खैराखास में 11.90 एकड़ व हल्दीरामपुर में 10.99 एकड़ का है। लेकिन अवैध खनन का काम सैकड़ों स्थानों पर किया जाता है।
कोट
अवैध खनन को रोकने के लिए सभी एसडीएम व थानाध्यक्षों को निर्देश दिया जा चुका है। कई इलाकों में कार्रवाई भी हुई है। जल्द ही टीम गठित कर छापेमारी की कार्रवाई की जाएगी।
मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी
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वर्ष 2008-09 में सफेद बालू के खनन के लिए पट्टा देने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जून 2016 में बेल्थरारोड स्थित हल्दीरामपुर व खैराखास स्थित खदान का पट्टा भी समाप्त हो गया। लेकिन इसके बाद भी जिले में खनन का कार्य कभी नहीं रुका। हालांकि सरकार के प्रयास के बाद वर्ष 2017 में जिला प्रशासन की ओर से ई-टेंडरिंग की प्रकिया शुरू की गई। इसमें केवल चार बालू खदानों को शामिल किया गया है जो घाघरा व टोंस के किनारे के हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि गंगा, घाघरा व टोंस के किनारे धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा।
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नरहीं थाना क्षेत्र के गंगा किनारे के गांव कोटवां नारायनपुर, नसीरपुर मठ, सरयां, उजियार, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, पलियाखास, कोट अंजोरपुर से लेकर शहर से सटे महावीर घाट, हल्दी, बैरिया तक जगह-जगह सफेद बालू का खनन बदस्तूर जारी है। इसके अलावा घाघरा के किनारे डूहा बिहरा, कठौड़ा, लिलकर, सीसोटार, जमुई आदि गांवों के किनारे भी धड़ल्ले से अवैध खनन का काम जारी है तो टोंस नदी के किनारे चितबड़ागांव, थम्हनपुरा आदि स्थानों पर सफेद बालू का खनन चरम पर है।
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केवल चार खदानों का हुआ ई-टेंडर
बलिया। जिले में अब तक केवल बालू खदानों का ई-टेंडर किया गया है। इसमें रसड़ा तहसील के टोंस नदी के किनारे नगहर में 6.70 एकड़ व मुड़ेरा में 4.26 एकड़ तथा घाघरा किनारे बेल्थरारोड तहसील के खैराखास में 11.90 एकड़ व हल्दीरामपुर में 10.99 एकड़ का है। लेकिन अवैध खनन का काम सैकड़ों स्थानों पर किया जाता है।
कोट
अवैध खनन को रोकने के लिए सभी एसडीएम व थानाध्यक्षों को निर्देश दिया जा चुका है। कई इलाकों में कार्रवाई भी हुई है। जल्द ही टीम गठित कर छापेमारी की कार्रवाई की जाएगी।
मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी