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विकास कार्यों में धांधली को पंचायती राज विभाग जिम्मेदार!
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:55 PM IST
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बलिया। गांवों के विकास कार्यों में धांधली और गोलमाल के लिए पंचायती राज विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है। धन जारी करने के बाद विभाग की ओर से कभी भी मॉनिटरिंग नहीं की जाती है और आंख मूंद कर पैसा भेजने का सिलसिला चलता है। धांधली और गबन की शिकायतों को भी विभाग महीनों तक दबाए रख उस पर पर्दा डाल देता है।
गांवों के विकास के लिए शासन की ओर से हर साल अलग-अलग मद के लिए पंचायती राज विभाग को धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद धनराशि जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से ग्राम पंचायतों के खाते में भेजी जाती है। शासन के नियमों को देखें तो धनराशि भेजने से पहले पंचायती राज विभाग को पूर्व साल में खर्च की गई धनराशि का लेखा-जोखा साफ्टवेयर में फीड कराना होता है। इसके अलावा भेजी गई धनराशि के मदवार कार्यों का निरीक्षण करना भी है। लेकिन जनपद में ऐसा कभी भी नहीं होता। बताया जाता है कि पंचायती राज विभाग के अधिकारी आंख मूंद कर धनराशि भेजते हैं और इसके उपभोग के बाबत जानकारी तक लेने मुनासिब नहीं समझते।
आलम यह है कि इस लापरवाही के चलते आए दिन गांवों के विकास कार्यों में धांधली और गबन का मामला सामने आता है लेकिन इसे भी पंचायती राज विभाग के अधिकारी महीनों तक लटका कर मामले पर पर्दा डालने का काम करते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में तो उच्चाधिकारियों के आदेश के बावजूद मामले को महीनों तक दबाए रखा जाता है।
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कोट
गांवों में विकास कार्य से संबंधित भेजी गई धनराशि का लेखा-जोखा फीड करने का प्रावधान है। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई भी की जाती है। समय-समय पर ब्लाकों के एडीओ पंचायत से निरीक्षण आख्या मंगाई जाती है। मुड़ेरा गांव के मामले में कई बार संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया, नहीं देने पर कार्रवाई की गई।
आरके यादव, डीपीआरओ
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गांवों के विकास के लिए शासन की ओर से हर साल अलग-अलग मद के लिए पंचायती राज विभाग को धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद धनराशि जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से ग्राम पंचायतों के खाते में भेजी जाती है। शासन के नियमों को देखें तो धनराशि भेजने से पहले पंचायती राज विभाग को पूर्व साल में खर्च की गई धनराशि का लेखा-जोखा साफ्टवेयर में फीड कराना होता है। इसके अलावा भेजी गई धनराशि के मदवार कार्यों का निरीक्षण करना भी है। लेकिन जनपद में ऐसा कभी भी नहीं होता। बताया जाता है कि पंचायती राज विभाग के अधिकारी आंख मूंद कर धनराशि भेजते हैं और इसके उपभोग के बाबत जानकारी तक लेने मुनासिब नहीं समझते।
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आलम यह है कि इस लापरवाही के चलते आए दिन गांवों के विकास कार्यों में धांधली और गबन का मामला सामने आता है लेकिन इसे भी पंचायती राज विभाग के अधिकारी महीनों तक लटका कर मामले पर पर्दा डालने का काम करते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में तो उच्चाधिकारियों के आदेश के बावजूद मामले को महीनों तक दबाए रखा जाता है।
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गांवों में विकास कार्य से संबंधित भेजी गई धनराशि का लेखा-जोखा फीड करने का प्रावधान है। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई भी की जाती है। समय-समय पर ब्लाकों के एडीओ पंचायत से निरीक्षण आख्या मंगाई जाती है। मुड़ेरा गांव के मामले में कई बार संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया, नहीं देने पर कार्रवाई की गई।
आरके यादव, डीपीआरओ