{"_id":"59a84a634f1c1b0e278b4b2f","slug":"101504201315-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब तक नहीं सुलझ पाई चांदनी हत्याकांड की गुत्थी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
अब तक नहीं सुलझ पाई चांदनी हत्याकांड की गुत्थी
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। चांदनी हत्याकांड को लगभग दो साल होने को हैं, लेकिन पुलिस अब तक आरोपियों को नहीं पकड़ सकी है। हत्या के तीन दिन बाद नरकंकाल मिला, लेकिन नर कंकाल की भी गुत्थी अब तक नहीं सुलझी। वहीं पुलिस कर रही है डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
बताते चलें कि फरवरी 2016 में चांदनी अपने घर से कुछ दूरी पर बागीचे में लकड़ी बिनने के लिए गई थी तब से वह लापता हो गई। घरवालों ने काफी खोजबीन की लेकिन उसका कहीं भी सुराग नहीं लगा। लेकिन घटना के 3 दिन बाद ही एक नरकंकाल घर के लगभग 300 मीटर दूरी पर मिला। उस नर कंकाल को कमिश्नर ने अपनी उपस्थिति में विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भिजवाय उसकी रिपोर्ट भी आ गई ,लेकिन अब पुलिस का बार-बार यही कहना है कि डीएनए रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। इसलिए खुलासा नहीं हो पा रहा है। लड़की के परिजनों का कहना है कि थाने पर बार-बार जाने पर पुलिस अधिकारी कहते हैं कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही हम लोग कुछ कर पाएंगे। चांदनी के पिता का कहना है कि थाने पर न्याय मिलना तो दूर पुलिसवाले ठीक से बात तक नहीं करते।
विज्ञापन
बताते चलें कि फरवरी 2016 में चांदनी अपने घर से कुछ दूरी पर बागीचे में लकड़ी बिनने के लिए गई थी तब से वह लापता हो गई। घरवालों ने काफी खोजबीन की लेकिन उसका कहीं भी सुराग नहीं लगा। लेकिन घटना के 3 दिन बाद ही एक नरकंकाल घर के लगभग 300 मीटर दूरी पर मिला। उस नर कंकाल को कमिश्नर ने अपनी उपस्थिति में विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भिजवाय उसकी रिपोर्ट भी आ गई ,लेकिन अब पुलिस का बार-बार यही कहना है कि डीएनए रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। इसलिए खुलासा नहीं हो पा रहा है। लड़की के परिजनों का कहना है कि थाने पर बार-बार जाने पर पुलिस अधिकारी कहते हैं कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही हम लोग कुछ कर पाएंगे। चांदनी के पिता का कहना है कि थाने पर न्याय मिलना तो दूर पुलिसवाले ठीक से बात तक नहीं करते।
विज्ञापन