{"_id":"a2271a3520e9bf45b8b8a56f5338f74b","slug":"corner-from-the-corner-of-happiness-is-bright-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुशियों के दीप से कोना-कोना हुआ जगमग ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुशियों के दीप से कोना-कोना हुआ जगमग
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Wed, 11 Nov 2015 07:10 PM IST
विज्ञापन
जनपद में प्रकाश पर्व दीपावली बुधवार को पूरी श्रद्धा और उल्लास के मनाया गया । सायंकाल घर-घर लक्ष्मी-गणेश की पूजा की गई। खुशियों के दीप जलते ही शहर का कोना-कोना रोशनी से नहा उठा। बच्चे सुबह से आतिशबाजी में लगे रहे। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
दिवाली के दिन पूजा-पंडालों में गणपति और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना भी की गई। देर शाम तक लोगों ने अपने-अपने घरों में धन और वैभव की देवी के आगमन के लिए वैदिक मंत्रोचार के साथ पंडित और पुरोहित से श्रद्घा पूर्वक पूजा-अर्चन करायी। दीपावली के दिन भी सुबह से पटाखा, मोमबत्ती, दीया और मिठाई की दूकानों पर लोगों की भीड़ जमी रही।
नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में दीपोत्सव परंपरागत तरीके से मनाया गया। पूजा के लिए एक ओर जहां व्यवसायी दूकानों की साफ-सफाई में जुटे रहे। वहीं गृहणियां भी दोपहर बाद तक घर की साफ-सफाई में जुटी रही। शाम को घरों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित कर विधिवत पूजन-अर्चन की गई।
विज्ञापन
घरों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था, जो अनूपम छटा बिखेर रही थी। दीपावाली को सुबह से ही लोग अपने-अपने घरों और प्रतिष्ठानों में दीपक जलाने के लिए साफ-सफाई में जुट गए थे। महिलाएं रंगोली आदि बनाने के साथ ही अन्य कार्यों को पूरा करने में जुटी रही।
आतिशबाजी के लिए पटाखों की दूकानों में सुबह से भीड़ जमा होने लगी थी। बुधवार को सूर्यास्त होते ही घरों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा-अर्चन शुरू हो गया। सबसे पहले देव स्थानों पर श्रद्धा के दीप जलाए गए। दीपक की रोशनी से एक बारगी पूरा शहर जगमगा उठा। अधिकांश स्थानों पर चाइनीज झालर उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे। सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों पर दीपावली धूमधाम से मनाई गई।
विज्ञापन
दिवाली के दिन पूजा-पंडालों में गणपति और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना भी की गई। देर शाम तक लोगों ने अपने-अपने घरों में धन और वैभव की देवी के आगमन के लिए वैदिक मंत्रोचार के साथ पंडित और पुरोहित से श्रद्घा पूर्वक पूजा-अर्चन करायी। दीपावली के दिन भी सुबह से पटाखा, मोमबत्ती, दीया और मिठाई की दूकानों पर लोगों की भीड़ जमी रही।
विज्ञापन
नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में दीपोत्सव परंपरागत तरीके से मनाया गया। पूजा के लिए एक ओर जहां व्यवसायी दूकानों की साफ-सफाई में जुटे रहे। वहीं गृहणियां भी दोपहर बाद तक घर की साफ-सफाई में जुटी रही। शाम को घरों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित कर विधिवत पूजन-अर्चन की गई।
विज्ञापन
घरों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था, जो अनूपम छटा बिखेर रही थी। दीपावाली को सुबह से ही लोग अपने-अपने घरों और प्रतिष्ठानों में दीपक जलाने के लिए साफ-सफाई में जुट गए थे। महिलाएं रंगोली आदि बनाने के साथ ही अन्य कार्यों को पूरा करने में जुटी रही।
आतिशबाजी के लिए पटाखों की दूकानों में सुबह से भीड़ जमा होने लगी थी। बुधवार को सूर्यास्त होते ही घरों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा-अर्चन शुरू हो गया। सबसे पहले देव स्थानों पर श्रद्धा के दीप जलाए गए। दीपक की रोशनी से एक बारगी पूरा शहर जगमगा उठा। अधिकांश स्थानों पर चाइनीज झालर उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे। सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों पर दीपावली धूमधाम से मनाई गई।