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लाखों का ठेका, सफाई जीरो
ballia
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:20 PM IST
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चंद्रशेखर नगर के शिवमंदिर मार्ग पर लगा नाली का पानी।
- फोटो : ballia
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नगर पालिका में सफाई के नाम पर बड़े पैमाने पर खेल चल रहा है। आलम यह है की लाखों का टेंडर हर साल होने के बाद भी नगर के नालों की सफाई नहीं हो पाती है। इस वर्ष भी नालों के साफ-सफाई नही होने से नाले बजबजा रहे हैं। कई जगहों पर तो सड़क के किनारे बनी नालियों का पानी भी सड़क पर बह रहा है। नालों की सफाई न होने की बात बीते दिनों ने जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा से भी नगरवासियों ने की थी। जिसपर मंत्री ने जांच कराने का आश्वासन दिया।
नगर के नालों की सफाई के नाम पर हर साल टेंडर किए जाते हैं। जिसमें लगभग 32 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसका टेंडर बरसात से पहले नालों की सफाई के लिए कराई जाती है। जिससे की बरसात के दिनों नगर की मुख्य सड़कों पर लगने वाला पानी आसानी से बह जाए। साथ सड़क को भी नुकसान न पहुंचे। पिछले वर्ष इन नालों की साफ-सफाई के लिए झारखंड प्रांत से मजदूर बुलाए गए थे। जिनके माध्यम से नालों की सफाई कराई गई। हालांकि पिछले वर्ष भी कुल नाले शेष रह गए।
इसी दौरान बरसात हो गई। इस बार भी विभागीय अफसरों की मिलीभगत के चलते ऐसे रसूखदार व्यक्ति को नगर के नालों के साफ -सफाई का ठेका दिया गया है। जो आज तक शुरु नहीं कराए गए। लोगों की मानें तो इस बार का ठेका विभाग के ही एक ऐसे व्यक्ति को दिया गया है जो खुद कर्मचारी है और उसने अपने ही किसी नातेदार के नाम पर ठेका ले रखा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर के नालों की किस कदर सफाई कराई गई है।
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नगर के नालों की सफाई के नाम पर हर साल टेंडर किए जाते हैं। जिसमें लगभग 32 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसका टेंडर बरसात से पहले नालों की सफाई के लिए कराई जाती है। जिससे की बरसात के दिनों नगर की मुख्य सड़कों पर लगने वाला पानी आसानी से बह जाए। साथ सड़क को भी नुकसान न पहुंचे। पिछले वर्ष इन नालों की साफ-सफाई के लिए झारखंड प्रांत से मजदूर बुलाए गए थे। जिनके माध्यम से नालों की सफाई कराई गई। हालांकि पिछले वर्ष भी कुल नाले शेष रह गए।
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इसी दौरान बरसात हो गई। इस बार भी विभागीय अफसरों की मिलीभगत के चलते ऐसे रसूखदार व्यक्ति को नगर के नालों के साफ -सफाई का ठेका दिया गया है। जो आज तक शुरु नहीं कराए गए। लोगों की मानें तो इस बार का ठेका विभाग के ही एक ऐसे व्यक्ति को दिया गया है जो खुद कर्मचारी है और उसने अपने ही किसी नातेदार के नाम पर ठेका ले रखा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर के नालों की किस कदर सफाई कराई गई है।
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