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Ballia News: राजस्व विभाग और सेतु निगम की खींचतान से निर्माण ठप

Tue, 08 Jul 2025 12:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:59 AM IST
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Construction stalled due to tussle between Revenue Department and Bridge Corporation
चितबड़ागांव। नगर पंचायत चितबड़ागांव को लगभग 50 गांवों से जोड़ने वाला टोंस नदी पर 17.50 करोड़ रुपये से निर्माणाधीन पक्का पुल दो वर्ष से अधर में है। राजस्व विभाग और सेतु निगम के बीच चली आ रही आपसी खींचतान के कारण निर्माण कार्य ठप है।
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ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दिनों में जब टोंस नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो पीपा पुल को खोल दिया जाता है। ऐसे में लोगों को नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें जान का जोखिम भी बना रहता है। स्कूली बच्चों को भी नाव से इस पार-उस पार लाया ले जाया जाता है। रोजमर्रा के कार्यों, कृषि और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए लोगों को कई किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का एक छोर काफी पहले बन चुका है, लेकिन दूसरा हिस्सा, जो ग्रामीण क्षेत्र से नगर पंचायत की सीमा को जोड़ता है, वह अधूरा है। यह हिस्सा विशेष रूप से सिहाचावर, पक्काकोट, सिंहपुर, एकवनी जैसे गांवों के हजारों लोगों के लिए बेहद जरूरी है। संवाद
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2021 में हुआ था भूमि पूजन : यह परियोजना वर्ष 2021 में बलिया के तत्कालीन सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और मंत्री उपेंद्र तिवारी के प्रयासों से शुरू हुई थी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की संस्तुति के बाद तत्कालीन मंत्री चंदिका प्रसाद उपाध्याय और विधायक उपेंद्र तिवारी ने भूमि पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था।
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सेतु निगम के पीओ आरएस राय ने बताया कि रजिस्ट्री में विसंगति है। राजस्व विभाग को इसके बारे में पत्र लिखा गया था। उनकी ओर से अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पूर्व में एक काश्तकार ने वाद भी दाखिल किया है। इस कारण कार्य बाधित है।
भूमि अधिग्रहण बना सबसे बड़ी बाधा : पुल के लिए कुल 785 एयर भूमि अधिग्रहण होनी थी। कार्यदायी संस्था सेतु निगम की ओर से राजस्व विभाग को पत्राचार के बाद एक संयुक्त टीम ने स्थलीय निरीक्षण व सीमांकन भी किया। शुरू में नदी पर पुल निर्माण कार्य तेजी से हुआ, जिससे लोगों को उम्मीद बंधी कि अब उन्हें पीपा पुल से छुटकारा मिल जाएगा। जैसे ही एप्रोच रोड निर्माण की बारी आई, किसानों ने भूमि अधिग्रहण और मुआवजा न मिलने का हवाला देते हुए कार्य रुकवा दिया। आरोप है कि राजस्व विभाग ने पुल निर्माण क्षेत्र से इतर लगभग 400 एयर भूमि का बैनामा कर मुआवजा जारी कर दिया, जबकि शेष 385 एयर भूमि का अधिग्रहण अब तक नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सेतु निगम और राजस्व विभाग आपसी आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हैं और परियोजना को जानबूझकर लटकाया जा रहा है।

किसानों ने बताई परेशानी : किसान प्रभु शंकर तिवारी ने बताया कि बरसात में पीपा पुल हट जाने से उन्हें फेफना और सिहाचावर के रास्ते अपने खेतों तक खाद-बीज और चारा पहुंचाना पड़ता है, जिससे 8-10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान दोनों होते हैं। वहीं, किसान आनंद मिश्रा ने कहा कि यदि यह पुल बनकर तैयार हो जाए, तो हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। स्कूल जाने वाले बच्चों, बीमार मरीजों और किसान वर्ग के लिए यह पुल जीवन रेखा साबित होगा। लंबे समय से अधर में लटके इस पुल के निर्माण को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि विभागीय मतभेदों को तत्काल समाप्त कर पुल निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाए। इस बाबत जब अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार से पूछा तो उन्होंने बताया कि अभी में हाइकोर्ट में हूं आते इस मामले को दिखलाता हूं।
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