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Ballia News: पांच दशक से दाैड़ रही हैं चकबंदी की फाइलें, पीढि़यां बदलीं पर फाइलें नहीं

Tue, 14 Jul 2026 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 11:51 PM IST
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Consolidation files have been making the rounds for five decades; generations have changed, but the files remain
चंकबंदी पर किसानों की प्रतिक्रिया: चंदन सिंह।
बलिया। जिले के चकबंदी की प्रक्रिया पूर्ण होने के कारण काश्तकारों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान सरकारी योजनाओं से भी वंचित हो रहे हैं। 40-50 साल से अधिक समय से चकबंदी प्रक्रिया लंबित है। इनमें सिकंदरपुर तहसील के कठौड़ा गांव भी शामिल है। चकबंदी के पुराने गांव के मामलों को प्रमुखता के आधार पर निस्तारण के शासन के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर से पहला तेज हो गई है। इन गांव में विवादों का निस्तारण आपसी बातचीत से करने का प्रयास भी प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं। इधर बीच मामलों के निस्तारण में तेजी भी आई है। जिले में 4490 चकबंदी के मामले चल रहे हैं। जिले के 38 गांव में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इनमें पांच ऐसे गांव हैं जिसमें 40 साल से अधिक समय से चकबंदी पूरी नहीं हो सकी है। मार्च अब तक एक गांव के चकबंदी प्रक्रिया कंप्लीट की गई है। पूर गांव के सामाजिक कार्यकर्ता एवं ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह बबलू ने बताया कि ग्राम पूर में वर्ष 1982 से चकबंदी कार्रवाई जारी है, लेकिन अब तक अंतिम चरण पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2014 में धारा-23 और धारा-24 का प्रकाशन होने के बावजूद धारा-52 का प्रकाशन लंबित है। इससे हजारों खातेदारों, चकदारों और किसानों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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15 गांवों में धारा 52 का हुआ प्रकाशन
चकबंदी विभाग की तरफ से पुराने मामले को निस्तारित करने की पहल तेज कर दी है। इनमें एक कठौड़ा गांव में 50 साल से पेंडिंग पड़ा हुआ है। पांच ऐसे गांव हैं जहां, 40 साल से चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इनमें कठौड़ा, बसंतपुर मुस्तहकम, सीसोटार, पूर, झरकटहां, दलछपरा आदि हैं।
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पूर गांव का नया नक्शा अंतिम चरण में
पंदह ब्लॉक के पूर गांव में 1982 से चकबंदी प्रक्रिया है। चकबंदी की प्रक्रिया पूरा कराने के लिए नया नक्शा तैयार किया जा रहा है। नया नक्शा राजस्व परिषद से आते ही चकबंदी प्रक्रिया तेज की जाएगी।
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इन गांवों में जारी चकबंदी प्रक्रिया
कठौड़ा, बसंतपुर मुस्तहकम, सीसोटार, पूर, झरकटहां, दलनछपरा, वाजिदपुर, रघुनाथपुर, खड़ैला, श्रीनगर, थुम्हाउत्तम, चांदपुर, बसंतपुर एहतमाली, रामपुर चीट, सोनूपाह, कोड़रा, कुशहां ब्राह्मण, कसौंडर, धसका, अखोप, फरसाटार, रूपवार भगवानपुर, चांदडीह, खमीरपुर, मझौवा, चरौवां, तेलमाजमालुद्दीनपुर, शाहपुर टिटिही, नसीराबाद, चक चिरकिटहा, दुल्लहपाह, जिगनीखास, नरौली, गुरवां व बाराबांध गांव हैं।

चकबंदी प्रक्रिया जल्द-से-जल्द पूरा करने का प्रयास जारी है। इसके लिए संबंधित तहसीलों को लक्ष्य दिए गया है। पुरानी चकबंदी के गांवों का निस्तारण करना प्राथमिकता के आधार पर रखा गया है। कुछ मामले कोर्ट में चल रहे हैं, इन मामलों में पैरवी कर निस्तारित कराने का प्रयास किया जा रहा है। चकबंदी प्रक्रिया में दोनों पक्षों को संतुष्ट करना प्राथमिकता है। - सचेंद्र कुमार सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी।


बोले काश्तकार
नंदू सिंह ने कहा कि चकबंदी अधूरी रहने से किसानों के राजस्व संबंधी कार्य वर्षों से प्रभावित हैं और धारा-52 का प्रकाशन जल्द कराया जाना चाहिए। चंदन सिंह ने अभिलेखों के डिजिटलीकरण और लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की मांग करते हुए कहा कि इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में आसानी होगी। वीपी तिवारी ने कहा कि अधूरी चकबंदी के कारण हजारों किसान भूमि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, इसलिए प्रशासन को इस प्रकरण को प्राथमिकता पर निस्तारित करना चाहिए। अभिषेक सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है और प्रशासन को शीघ्र धारा-52 का प्रकाशन सुनिश्चित करना चाहिए।

चंकबंदी पर किसानों की प्रतिक्रिया: चंदन सिंह।

चंकबंदी पर किसानों की प्रतिक्रिया: चंदन सिंह।

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