{"_id":"1a8c7b3f3fe765defaa0afb1dca47c6b","slug":"conference-workers-suffering-hearing-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सम्मेलन में कार्यकर्ताओं ने सुनाई पीड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सम्मेलन में कार्यकर्ताओं ने सुनाई पीड़ा
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Wed, 04 Nov 2015 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूबे के काबीना मंत्री रहे अंबिका चौधरी बतौर एमएलसी पहली बार विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मैं नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूं कि मुझे राज-काज से मुक्त कर आम जनता की सेवा करने का मौका दिया है।
राजनीति में पद तो आता-जाता रहता है, छोटी-छोटी बातों को महत्व नहीं देना चाहिए। मैं अपने नेता के बताए रास्ते पर चलता हूं। वह जिस कार्य की जिम्मेदारी सौंपेंगे मैं उसे हर हाल में पूरा करता रहूंगा। एक समर्पित कार्यकर्ता को अपने नेता, गुरु और पिता में दोष नहीं देखना चाहिए।
विधान परिषद सदस्य अंबिका चौधरी ने कहा कि नेता और पिता बदले नहीं जाते। मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने से आहत कार्यकर्ताओं की पीड़ा को समझने के बाद लोगों को अपनी बात बताई। कहा कि मंत्री पद का शपथ ग्रहण थोड़े दिन के लिए ही होता है, मैं न तो मायूस हूं, न दु:खी हूं और न ही उदास हूं।
विज्ञापन
जनपद के राजनीतिक षडयंत्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति में षडयंत्र और धोखा सदियों से होता आ रहा है। लेकिन षडयंत्र की उम्र ज्यादा नहीं होती, वह एक न एक दिन विफल हो जाता है। कार्यकर्ताओं के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि मैं अभी बूढ़ा नहीं हूं।
कहा कि मैं अपनी जगह पर किसी को चुनाव लड़ने का मौका नहीं दूंगा। यदि मैं 2017 तक जिंदा रहा तो चुनाव मैं ही लडू़ंगा। बिगत चुनाव हारने से हमारी राजनीति समाप्त नहीं हुई और न ही मंत्री पद जाने से हमारी राजनीति समाप्त होने वाली है।
इस मौके पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने जिला पंचायत सदस्य के रूप में विजय हासिल करने वाले संजय भारती, केदार नाथ यादव, अमित यादव और सीमा यादव के प्रतिनिधि वीरलाल यादव का स्वागत माला पहनाकर किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा के जिला महासचिव शैलेश चौधरी पप्पू ने कहा कि मायूस कार्यकर्ताओं में जान फूंकने और हकीकत से रूबरू कराते हुए पंचायत चुनाव में विजयी प्रत्याशियों का स्वागत करना सम्मेलन के माध्यम से जरूरी था। श्री पप्पू न कहा कि सपा कार्यकर्ता अब दोगुने जोश के साथ पार्टी हित में काम करेंगे।
इस मौक पर मुख्य रूप से प्रभुनाथ यादव, लाल साहब, लाल बाबू, रामेश्वर यादव, कृष्णानंद राय, शिवनारायण यादव, विजयशंकर यादव, बुंदेला सिंह यादव आदि लोगों ने अपना विचार व्यक्त किए। संचालन राजमंगल यादव और अध्यक्षता उमाशंकर चौधरी ने किया।
विज्ञापन
राजनीति में पद तो आता-जाता रहता है, छोटी-छोटी बातों को महत्व नहीं देना चाहिए। मैं अपने नेता के बताए रास्ते पर चलता हूं। वह जिस कार्य की जिम्मेदारी सौंपेंगे मैं उसे हर हाल में पूरा करता रहूंगा। एक समर्पित कार्यकर्ता को अपने नेता, गुरु और पिता में दोष नहीं देखना चाहिए।
विज्ञापन
विधान परिषद सदस्य अंबिका चौधरी ने कहा कि नेता और पिता बदले नहीं जाते। मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने से आहत कार्यकर्ताओं की पीड़ा को समझने के बाद लोगों को अपनी बात बताई। कहा कि मंत्री पद का शपथ ग्रहण थोड़े दिन के लिए ही होता है, मैं न तो मायूस हूं, न दु:खी हूं और न ही उदास हूं।
विज्ञापन
जनपद के राजनीतिक षडयंत्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति में षडयंत्र और धोखा सदियों से होता आ रहा है। लेकिन षडयंत्र की उम्र ज्यादा नहीं होती, वह एक न एक दिन विफल हो जाता है। कार्यकर्ताओं के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि मैं अभी बूढ़ा नहीं हूं।
कहा कि मैं अपनी जगह पर किसी को चुनाव लड़ने का मौका नहीं दूंगा। यदि मैं 2017 तक जिंदा रहा तो चुनाव मैं ही लडू़ंगा। बिगत चुनाव हारने से हमारी राजनीति समाप्त नहीं हुई और न ही मंत्री पद जाने से हमारी राजनीति समाप्त होने वाली है।
इस मौके पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने जिला पंचायत सदस्य के रूप में विजय हासिल करने वाले संजय भारती, केदार नाथ यादव, अमित यादव और सीमा यादव के प्रतिनिधि वीरलाल यादव का स्वागत माला पहनाकर किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा के जिला महासचिव शैलेश चौधरी पप्पू ने कहा कि मायूस कार्यकर्ताओं में जान फूंकने और हकीकत से रूबरू कराते हुए पंचायत चुनाव में विजयी प्रत्याशियों का स्वागत करना सम्मेलन के माध्यम से जरूरी था। श्री पप्पू न कहा कि सपा कार्यकर्ता अब दोगुने जोश के साथ पार्टी हित में काम करेंगे।
इस मौक पर मुख्य रूप से प्रभुनाथ यादव, लाल साहब, लाल बाबू, रामेश्वर यादव, कृष्णानंद राय, शिवनारायण यादव, विजयशंकर यादव, बुंदेला सिंह यादव आदि लोगों ने अपना विचार व्यक्त किए। संचालन राजमंगल यादव और अध्यक्षता उमाशंकर चौधरी ने किया।