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पूर्व मंत्री घूरा राम के कोरोना से निधन पर शोक संवेदनाओं का तांता

Thu, 16 Jul 2020 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 11:33 PM IST
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Condolences of condolences on former minister Ghura Ram's death from Corona
बलिया। सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री घूरा राम (62) का बृहस्पतिवार की भोर में लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में निधन हो गया। 14 जुलाई को सीने में दर्द की शिकायत पर उन्हें भर्ती कराया गया था। यहां फेफड़े में संक्रमण का पता चला। पुत्र संतोष कुमार के अनुसार बुधवार की रात उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी।
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सीने में दर्द की शिकायत पर स्थानीय एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने उनको लखनऊ जाने की सलाह दी थी। इसके बाद वे केजीएमयू में चले गए थे। फेफड़े में संक्रमण से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बृहस्पतिवार की भोर में चार बजे हृदयगति रुकने से उन्होंने अंतिम सांस ली। पूर्व मंत्री घूरा राम के निधन की सूचना मिलते ही सपा में शोक छा गया। जिला अध्यक्ष राजमंगल यादव ने आनलाइन शोक सभा की। उन्होंने घूरा राम के निधन को पार्टी के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया। पूर्व मंत्री मो. जियाउद्दीन रिजवी, पूर्व मंत्री नारद राय, पूर्व विधायक संग्राम सिंह यादव, पूर्व विधायक जय प्रकाश अंचल, पूर्व विधायक गोरख पासवान, लक्ष्मण गुप्ता, व्यास गोड़, सुभाष यादव, यशपाल सिंह, संजय उपाध्याय, सुशील पांडेय कान्ह जी, चंद्रशेखर सिंह, सुधीर पासवान, अद्याशंकार यादव, मृत्युंजय तिवारी बबलू, मिठाई लाल भारती, बंशीधर यादव, जमाल आलम, राजन कनौजिया, रामेश्वर पासवान आदि ने निधन पर शोक जताया। सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने भी शोक व्यक्त किया है।
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बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर संस्थान के सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर गतात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। शोक सभा में डॉ. एस प्रताप वैद्य, विजय शंकर राम, सुदामा प्रसाद, रघुनाथ राम, रामदेव गौतम आदि रहे।
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रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह, पूर्व विधायक सनातन पांडेय, पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह, पूर्व विधायक अनिल कुमार, नपा कार्यवाहक अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सोनी, प्रमुख प्रतिनिधि सतीश सिंह, चंद्रशेखर सिंह, पूर्व प्रमुख अनिल सिंह, प्रबंधक गोविन्द नरायण सिंह, शिवेंद्र बहादुर सिंह, नुरुल बशर अंसारी, बीरबल राम, आदि ने शोक व्यक्त किया है।
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घूरा राम मेरे पड़ोसी के साथ छोटे भाई के समान थे। राजनीति में जब हम विरोधी पार्टियों में हुआ करते थे, तो भी वे मेरे पास आने में नहीं हिचकिचाते थे। राजनीति हो या व्यक्तिगत बातें, जब भी कोई समस्या या सलाह की आवश्यकता होती थी तो वह सीधे मेरे पास आते थे और पारिवारिक सदस्य की तरह सलाह लेते थे। घूरा राम ने काफी संघर्ष किया। वह बागी तेवरों के लिए जाने जाते थे और कभी किसी से नहीं डरते थे। यही वजह थी कि बसपा के गठन के समय वे कांशीराम के करीबी नेताओं में शुमार थे। बसपा का संस्थापक सदस्य होने का भी उन्हें गौरव प्राप्त था। वे मायावती के भी काफी करीब रहे। बाद में सपा में आ गए। उनके निधन से आज मैंने अपना एक मजबूत और संघर्षशील शुभचिंतक खोया है।-राम गोविंद चौधरी, नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश विधान सभा
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प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर जताया दुख
पूर्व मंत्री घूरा राम के निधन पर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा है कि गरीब, वंचित समाज के लोकप्रिय नेता पूर्व मंत्री घूरा राम का आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें, शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना।

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छात्र राजनीति से शुरू किया सियासी सफर
रसड़ा। पूर्व मंत्री घूरा राम ने छात्र राजनीति से सियासी सफर शुरू किया था। वह पहला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर बेल्थरारोड से लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली। वे बसपा में शामिल हो गए। बसपा के जिलाध्यक्ष के अलावा वर्ष 1993, 2002 और 2007 में रसड़ा सुरक्षित सीट से विधायक रहे। वर्ष 1984 में बीएस-4 से जुड़े थे। वर्ष 1985 में उन्हें युवा बहुजन समाज पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वे वर्ष 1990 से वर्ष 1998 तक बसपा के जिलाध्यक्ष रहे। वर्ष 1993 में पहले से टिकट पाये मुनेश्वर भारती के स्थान अचानक बसपा का टिकट लेकर रसड़ा विधानसभा से पहली बार विधायक चुने गए। एक जून 1995 गेस्ट हाउस कांड के बाद बसपा भाजपा गठबंधन में घूरा राम ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, प्राविधिक शिक्षा, वैकल्पिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग की मंत्री के रूप जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 1996 में भाजपा के अनिल कुमार से उन्हें शिकस्त खानी पड़ी थी। रसडा से वर्ष 2002 और 2007 में विधायक चुने गये। 2012 में सामान्य होने पर बसपा से टिकट न मिलने बागी तेवर अपनाते हुये निर्दल ही चुनाव लड़े थे। उनकी पहचान कद्दावर दलित नेता के रूप में होती थी। पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा ने आजमगढ़ की लालगंज (सु) सीट से अंतिम समय में उनका टिकट कट गया। इसके बाद अखिलेश यादव की मौजूदगी में लखनऊ में सपा की सदस्यता ली थी। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घूरा राम को दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया था। राजनीति के साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका अहम योगदान रहा। अपने माता पिता के नाम पर शिक्षण संस्थान खोला था।
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