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संचालन की बांट जोह रहे सामुदायिक शौचालय
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बलिया। जिले में अब तक कुल 528 गांवों में सामुदायिक शौचालय बन चुके हैं लेकिन अधिकांश का संचालन नहीं हो सका है। शासन की ओर से इनके संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह को देने का निर्देश दिया है लेकिन अधिकांश गांवों में समूह का चयन नहीं हो सका है।
वर्ष 2020-21 में व्यक्तिगत शौचालयों के स्थान पर शासन ने प्रत्येक गांव में सामुदायिक शौचालय बनाने का निर्देश दिया। हालांकि अभी तक 940 के सापेक्ष 528 गांवों में ही सामुदायिक शौचालय बन सके हैं लेकिन आठ माह बाद भी अधिकांश गांवों में स्वयं सहायता समूहों का चयन नहीं होने के कारण इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक की मानें तो करीब 75 ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन कर लिया गया है।
गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों के देखरेख की जिम्मेदारी गांव में गठित महिला स्वयं सहायता समूह हो दी जाएगी। इसकी देखरेख के लिए समूह को हर महीने बतौर पारिश्रमिक 6000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा शौचालयों की सफाई के लिए हर महीने समूह को 3000 रुपये का भुगतान संबंधित ग्राम पंचायत की ओर से किया जाएगा।
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जिले में गठित हैं कुल 2317 स्वयं सहायता समूह
बलिया। जिले में कुल 2317 स्वयं सहायता समूह हैं। इसमें सबसे अधिक चिलकहर ब्लॉक में 350 स्वयं सहायता समूह हैं। इसके अलावा बैरिया में 80, बांसडीह में 112, बेलहरी में 85, बेरुआरबारी में 97, दुबहड़ में 152, गड़वार में 192, हनुमानगंज में 99, मनियर मेव्ं 103, मुरलीछपरा में 43, नगरा में 241, नवानगर में 154, पंदह में 82, रसड़ा में 160, रेवती में 103, सीयर में 129 व सोहांव ब्लॉक में 135 स्वयं सहायता समूह गठित हैं।
जिले में 528 गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूरा हो चुका है। कई गांवों में इसके संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूह का चयन कर लिया गया है। जहां शेष है वहां भी चयन की कार्रवाई चल रही है। जल्द पूरा कर लिया जाएगा। - शैलेश ओझा, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन
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वर्ष 2020-21 में व्यक्तिगत शौचालयों के स्थान पर शासन ने प्रत्येक गांव में सामुदायिक शौचालय बनाने का निर्देश दिया। हालांकि अभी तक 940 के सापेक्ष 528 गांवों में ही सामुदायिक शौचालय बन सके हैं लेकिन आठ माह बाद भी अधिकांश गांवों में स्वयं सहायता समूहों का चयन नहीं होने के कारण इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक की मानें तो करीब 75 ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन कर लिया गया है।
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गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों के देखरेख की जिम्मेदारी गांव में गठित महिला स्वयं सहायता समूह हो दी जाएगी। इसकी देखरेख के लिए समूह को हर महीने बतौर पारिश्रमिक 6000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा शौचालयों की सफाई के लिए हर महीने समूह को 3000 रुपये का भुगतान संबंधित ग्राम पंचायत की ओर से किया जाएगा।
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जिले में गठित हैं कुल 2317 स्वयं सहायता समूह
बलिया। जिले में कुल 2317 स्वयं सहायता समूह हैं। इसमें सबसे अधिक चिलकहर ब्लॉक में 350 स्वयं सहायता समूह हैं। इसके अलावा बैरिया में 80, बांसडीह में 112, बेलहरी में 85, बेरुआरबारी में 97, दुबहड़ में 152, गड़वार में 192, हनुमानगंज में 99, मनियर मेव्ं 103, मुरलीछपरा में 43, नगरा में 241, नवानगर में 154, पंदह में 82, रसड़ा में 160, रेवती में 103, सीयर में 129 व सोहांव ब्लॉक में 135 स्वयं सहायता समूह गठित हैं।
जिले में 528 गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूरा हो चुका है। कई गांवों में इसके संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूह का चयन कर लिया गया है। जहां शेष है वहां भी चयन की कार्रवाई चल रही है। जल्द पूरा कर लिया जाएगा। - शैलेश ओझा, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन