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फर्जी नियुक्ति के मामले में सीएमओ सस्पेंड
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Sat, 18 Mar 2017 10:22 PM IST
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चालकों की फर्जी नियुक्ति के मामले में सीएमओ डा पीके सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। यह नियुक्ति आयोग द्वारा की जानी थी, लेकिन सीएमओ ने शासनादेश को ठेंगा दिखाते हुए विज्ञापन निकाल स्वयं नियुक्ति कर दी थी। शासन की इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस ‘खेल’ में कुछ और अधिकारी तथा कर्मचारियों पर तलवार तनी हुई है।
सूत्रों की माने तो शासन ने वर्ष 2015-16 में प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया था कि चालकाें की नियुक्ति आयोग द्वारा किया जाएगा। चालकों की नियुक्ति डीएम व सीएमओ नहीं करेंगे। स्वास्थ्य विभाग में कुल नौ चालकों की नियुक्ति होनी थी। लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीके सिंह ने वर्ष 2015-16 में शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए गलत तरीके से चयन समिति बनाकर चालकों की नियुक्ति कर दिया। यही नहीं नौ चालकों के बजाए अधिक चालकों की नियुक्ति कर वेतन भी भुगतान कर दिया था। इसकी जानकारी होते ही शासन ने वेतन भुगतान पर रोक लगाते हुए जांच करवाया था, जो अब भी चल रही है। प्रथम दृष्टया जांच में फर्जी तरीके से मामला प्रकाश में आने पर शासन ने सीएमओ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। सूत्रों की माने तो जांच की आंच कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंच सकती है। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमा में हड़कंप मचा हुआ है।
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सूत्रों की माने तो शासन ने वर्ष 2015-16 में प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया था कि चालकाें की नियुक्ति आयोग द्वारा किया जाएगा। चालकों की नियुक्ति डीएम व सीएमओ नहीं करेंगे। स्वास्थ्य विभाग में कुल नौ चालकों की नियुक्ति होनी थी। लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीके सिंह ने वर्ष 2015-16 में शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए गलत तरीके से चयन समिति बनाकर चालकों की नियुक्ति कर दिया। यही नहीं नौ चालकों के बजाए अधिक चालकों की नियुक्ति कर वेतन भी भुगतान कर दिया था। इसकी जानकारी होते ही शासन ने वेतन भुगतान पर रोक लगाते हुए जांच करवाया था, जो अब भी चल रही है। प्रथम दृष्टया जांच में फर्जी तरीके से मामला प्रकाश में आने पर शासन ने सीएमओ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। सूत्रों की माने तो जांच की आंच कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंच सकती है। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमा में हड़कंप मचा हुआ है।
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