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दूसरे और आखिरी बृहस्पतिवार को बच्चे खाएंगे फल
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बलिया। जिले के परिषदीय स्कूलों में एक बार फिर कोरोना काल के बाद बच्चों के खानपान पर ध्यान दिया जा रहा है। इसको देखते हुए शासन की तरफ से अब मिड डे मील में फल भी उपलब्ध कराए जाएंगे। करीब 2 साल बाद एक अप्रैल से स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील में फल मिलेंगे। इसकी शुरुआत नए शिक्षा सत्र से होगी और हर महीने के दूसरे और अंतिम बृहस्पतिवार को सभी छात्र छात्राओं को फलों का वितरण किया जाएगा। फल वितरण करने के लिए शासन ने करीब 51.66 लाख रुपए का बजट जारी किया है।
दो साल पहले कोरोना काल के समय में परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील मिलना बंद हो गया था और इसी के साथ फल का भी वितरण नहीं हो सका, लेकिन अब शासन ने बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीरता से लेते हुए यह निर्देश जारी किया है। संक्रमण से पहले छात्राओं को हर सोमवार को मौसमी फल मिलते थे, लेकिन छात्राओं को स्कूल बंद होने के कारण राशन तो मिला लेकिन फलों का वितरण करने के लिए कोई भी धनराशि नहीं मिली। एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक ने बताया कि प्रति बच्चे चार रुपये की दर से अतिरिक्त धनराशि फल वितरण के लिए मिलेगी। अतिरिक्त फल का वितरण पहले की तरह सोमवार को किए जा रहे सामान्य फल की भांति निर्धारित दिनों में होगा।
सड़े-गले फल मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
अगर इन दिनों में अवकाश रहता है तो इसका वितरण अगले शिक्षण दिवस पर फलों का वितरण किया जाएगा। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवनारायन सिंह ने प्रधानाध्यापकों को निर्देश देते हुए कहा है कि फलों का वितरण में पारदर्शिता बरतनी होगी निरीक्षण के दौरान अगर सडे़ -गले फल पाए गए तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएंगी।
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पहले सोमवार को मिलता था फल
जिले में 2249 परिषदीय विद्यालय हैं, जहां लगभग 3.10लाख विद्यार्थी पंजीकृत है। कोरोना संक्रमण से पहले सभी छात्र छात्राओं को हर सोमवार को मौसमी फल मिलते थे, लेकिन स्कूल बंद होने के कारण छात्राओं को राशन तो दिया गया लेकिन फलों का वितरण नहीं किया गया।
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दो साल पहले कोरोना काल के समय में परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील मिलना बंद हो गया था और इसी के साथ फल का भी वितरण नहीं हो सका, लेकिन अब शासन ने बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीरता से लेते हुए यह निर्देश जारी किया है। संक्रमण से पहले छात्राओं को हर सोमवार को मौसमी फल मिलते थे, लेकिन छात्राओं को स्कूल बंद होने के कारण राशन तो मिला लेकिन फलों का वितरण करने के लिए कोई भी धनराशि नहीं मिली। एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक ने बताया कि प्रति बच्चे चार रुपये की दर से अतिरिक्त धनराशि फल वितरण के लिए मिलेगी। अतिरिक्त फल का वितरण पहले की तरह सोमवार को किए जा रहे सामान्य फल की भांति निर्धारित दिनों में होगा।
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सड़े-गले फल मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
अगर इन दिनों में अवकाश रहता है तो इसका वितरण अगले शिक्षण दिवस पर फलों का वितरण किया जाएगा। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवनारायन सिंह ने प्रधानाध्यापकों को निर्देश देते हुए कहा है कि फलों का वितरण में पारदर्शिता बरतनी होगी निरीक्षण के दौरान अगर सडे़ -गले फल पाए गए तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएंगी।
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पहले सोमवार को मिलता था फल
जिले में 2249 परिषदीय विद्यालय हैं, जहां लगभग 3.10लाख विद्यार्थी पंजीकृत है। कोरोना संक्रमण से पहले सभी छात्र छात्राओं को हर सोमवार को मौसमी फल मिलते थे, लेकिन स्कूल बंद होने के कारण छात्राओं को राशन तो दिया गया लेकिन फलों का वितरण नहीं किया गया।