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किसानों के मसीहा थे चौधरी चरण सिंह
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 23 Dec 2014 10:50 PM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की जयंती किसान सम्मान दिवस
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के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर जिला औद्यानिक मिशन की ओर से दो दिवसीय
किसान गोष्ठी और किसान मेला का आयोजन मंगलवार को नगर के बापू भवन के सभागार
में आयोजित किया गया।
शुभारंभ उप्र कृषि निदेशक टीपी शाही ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान वक्ताओं ने उन्हें किसानों का मसीहा बताया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए भूमि संरक्षण अधिकारी संजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि चौधरी का जन्म 23 दिसंबर, 1902 को मेरठ मंडल के गाजियाबाद जिले के नूरपुर गांव में हुआ था।
वह बाल्यकाल से ही गांव की कुरीतियाें के प्रति संवेदनशील, गरीबाें तथा दलितों के उत्थान के लिए सतत प्रत्यनशील रहते थे। गांधी जी की आजादी की लड़ाई से प्रभावित होकर आंदोलन में कूद पड़े।
किसान हितों के प्रति संवेदनशील रहने के कारण इन्हें किसानों का मसीहा कहा जाने लगा। आजादी के बाद चौधरी कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए। किसानों के हित के लिए प्रदेश में में जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार, पटवारी व्यवस्था, कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड की स्थापना की।
इसके साथ ही लघु और सीमांत श्रेणी के किसानाें को भू-राजस्व से छूट और उप्र में सिंचाई के लिए नहरों का जाल बिछाने कार्य किया। इसी क्रम में जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार राय ने जैविक खेती, आम, अमरूद, केला, मिर्चा, सब्जी एवं गुलाब की खेती के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
विकास खंड सोहांव के कृषि वैज्ञानिक वेदप्रकाश सिंह ने गेहूं, सरसो, चना, मटर और आलू के पाला, उसके बचाव के बारे में विस्तार रूप से बताया।
किसान मेला में कृषि, कृषि रक्षा, भूमि संरक्षण, उद्यान, पशुपालन, मृदा परीक्षण, गन्ना, मत्स्य तथा कृषि निवेश विक्रेताओं की ओर से संबंधित स्टाल लगाकर योजनाआें की जानकारी दी गई।
शुभारंभ उप्र कृषि निदेशक टीपी शाही ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान वक्ताओं ने उन्हें किसानों का मसीहा बताया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए भूमि संरक्षण अधिकारी संजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि चौधरी का जन्म 23 दिसंबर, 1902 को मेरठ मंडल के गाजियाबाद जिले के नूरपुर गांव में हुआ था।
वह बाल्यकाल से ही गांव की कुरीतियाें के प्रति संवेदनशील, गरीबाें तथा दलितों के उत्थान के लिए सतत प्रत्यनशील रहते थे। गांधी जी की आजादी की लड़ाई से प्रभावित होकर आंदोलन में कूद पड़े।
किसान हितों के प्रति संवेदनशील रहने के कारण इन्हें किसानों का मसीहा कहा जाने लगा। आजादी के बाद चौधरी कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए। किसानों के हित के लिए प्रदेश में में जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार, पटवारी व्यवस्था, कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड की स्थापना की।
इसके साथ ही लघु और सीमांत श्रेणी के किसानाें को भू-राजस्व से छूट और उप्र में सिंचाई के लिए नहरों का जाल बिछाने कार्य किया। इसी क्रम में जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार राय ने जैविक खेती, आम, अमरूद, केला, मिर्चा, सब्जी एवं गुलाब की खेती के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
विकास खंड सोहांव के कृषि वैज्ञानिक वेदप्रकाश सिंह ने गेहूं, सरसो, चना, मटर और आलू के पाला, उसके बचाव के बारे में विस्तार रूप से बताया।
किसान मेला में कृषि, कृषि रक्षा, भूमि संरक्षण, उद्यान, पशुपालन, मृदा परीक्षण, गन्ना, मत्स्य तथा कृषि निवेश विक्रेताओं की ओर से संबंधित स्टाल लगाकर योजनाआें की जानकारी दी गई।