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Ballia News: डिवाइडर से टकरा कर नाले में गिरी कार, चिकित्सक की मौत, साथी जख्मी

Tue, 28 Jan 2025 01:41 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2025 01:41 AM IST
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Car collides with divider and falls into drain, doctor dies, colleague injured
बलिया/रसड़ा। संवरा स्कूल के पास शनिवार की रात लकड़ा नाला पुल के डिवाइडर से टकरा कर कार नाले में पलट गई। हादसे में कार सवार वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. अरविंद कुमार स्वर्णकार (47)की मौत हो गई, उनके दोस्त अजीत राय गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। चिकित्सक की मौत की खबर लगते ही चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
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जनपद के जाने-माने चिकित्सकों में शुमार डॉ. एके स्वर्णकार जिला अस्पताल परिसर स्थित टीबी क्लीनिक में तैनात थे। प्रयागराज के उतरांव थाना के डूदूवा निवासी राममूर्ति स्वर्णकार के पुत्र थे। पिछले एक दशक से जिला अस्पताल से लेकर विभिन्न सीएचसी-पीएचसी पर तैनात रहे। उनकी पत्नी डॉ. प्रीति स्वर्णकार आयुष चिकित्सक हैं और चिलकहर में तैनात हैं। वे कोरोना काल में बसंतपुर सीएचसी पर एल टू में तैनात रहे। टीबी क्लीनिक की तैनाती के दौरान कोलकाता से पीजी कर रहे थे, छह माह में कोर्स खत्म होने वाला था।
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26 जनवरी को छुट्टी होेने के कारण शनिवार की शाम कोलकाता से लखनऊ फ्लाइट से पहुंचे। वहां पहले से मौजूद दवा कारोबारी अजीत राय के साथ कार से बलिया आ रहे थे। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे छोड़ने के बाद रसड़ा जाने वाली सड़क पर डाॅ. एके स्वर्णकार खुद गाड़ी चलाने लगे। सवंरा के लकड़ा नाला के डिवाइडर से कार टकराकर नाले में गिर गई। हालांकि नाले में पानी काफी कम था। रात होने के कारण किसी की नजर नहीं पड़ी। घटना के बाद दोनों बेहोश हो गए थे। करीब एक घंटे बाद अजीत को होश आया। वह दरवाजे का शीशा फोड़कर बाहर निकले।
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पास के एक मकान का दरवाजा खुलवाकर पुलिस व परिजनों को घटना की सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों सहयोग से चिकित्सक को कार से निकाला। दोनों घायलों को सीएचसी पहुंचाया। वहां चिकित्सक ने डाॅ. एके स्वर्णकार को मृत घोषित कर दिया। तब तक अजीत के परिजन भी पहुंच गए। पुलिस वहां से दोनों को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। चिकित्सक के शव को पोस्टमार्टम के लिए रखवा दिया गया। अजीत की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने रेफर कर दिया। घटना की खबर लगते ही पत्नी डाॅ. प्रीति स्वर्णकार का रोते-रोते बुरा हाल रहा। उनके दो बेटे पिता की मौत से आहत हैं।
सीएमओ डॉ. विजयपति द्विवेदी के नेतृत्व में सरकारी व प्राइवेट चिकित्सकों ने दो मिनट का मौन रहकर आत्मा की शांति की प्रार्थना की। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक व्याप्त किया। पोस्टमार्टम हाउस पर उनके चाहने वाले हर क्षेत्र के लोगों की भारी भीड़ जुट गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन दाह संस्कार के लिए शव को प्रयागराज ले गए।

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दुर्घटना के बाद सिर पानी में डूबने से हुई मौत : दुर्घटनाग्रस्त के दौरान तेज आवाज हुई हादसे की जानकारी 100 मीटर दूर पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों को नहीं लगी। नाले में कार गिरने के बाद पलट गई इससे चिकित्सक और अजीज का सिर की नीचे की तरफ हो गया। कार में पानी भरने से चिकित्सक का सिर डूब गया। अगर पुलिस सही समय पर घटनास्थल पर पहुंच गई होती तो शायद जान बच गई होती। चिकित्सकों के अनुसार बेहोशी की हालत में लंबे समय तक पानी में सिर डूबने से मौत हो गई। वहीं, अजीत की तरफ का शीशा बंद होेने से वह बाल-बाल बच गए। उनकी पसली व कमर में चोट लगी है।

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सोशल मीडिया पर हर कोई दिखा मर्माहत : डाॅ. एके स्वर्णकार की मौत से सोशल मीडिया पर हर कोई अपना दुख प्रकट करने लगा। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर उनके आवास पर परिवहन मंत्री से लगाय तमाम जनप्रतिनिधि, डॉक्टर, छात्रनेता, दवा करोबारी, कर्मचारी व उनसे जुड़े लोगों की भारी भीड़ रही।

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चिकित्सकों ने नम आंखों से साथी को किया याद : जिला अस्पताल में लंबे समय तक सेवा देने वाले डाक्टर एके स्वर्णकार की असमय मौत से चिकित्सकों में शोक व्याप्त है। सोमवार को ओपीडी में मरीजों के इलाज के बाद इमरजेंसी के सामने श्रद्धांजलिसभा का आयोजन हुआ। एके स्वर्णकार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दो मिनट का मौन रख आत्मा की शांति की प्रार्थना की। उन्हें याद कर हर चिकित्सक की आंखें नम थी। इस दौरान सीएमएस डाॅ. एसके यादव, डाॅ. संतोष चौधरी, डॉ. मनोज कुमार, डाॅ. आरडी राम, डॉ. एसएन राय सहित सभी चिकित्सक व कर्मचारी मौजूद रहे।

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नहीं मना किया होता तो दो चिकित्सकों को खोता जिला : कोलकाता से फ्लाइट से डाॅ. एके स्वर्णकार के साथ डॉ. वीरेंद्र गुप्ता भी लखनऊ उतरे थे। स्वर्णकार ने उन्हें कार से ही बलिया चलने के लिए कहा, लेकिन सुबह जाने की बात कह व रुक गए।सुबह घर पहुंचने की जल्दी में स्वर्णकार रुकने की जगह अजीत को बुलाकर घर के लिए चल दिए।
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कड़ी मेहनत व व्यवहार से मरीजों के दिल में बनाई जगह

-- कोविड काल के दौरान सैकडों मरीजों को दिया जीवनदान
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। डॉक्टर एके स्वर्णकार प्रयागराज के रहने वाले थे, लेकिन इनका जिले से विशेष लगाव रहा। यही कारण रहा कि उनकी असमय मौत से हर कोई मर्माहत है। कोरोना काल में बसंतपुर एल-2 में ड्यूटी के दौरान सैकड़ों मरीजों को जीवनदान दिया। इसके बाद ढाई वर्ष पहले पीजी करने कोलकाता चले गए।

रविवार को छुट्टी पर घर आने पर उनके जगदीशपुर स्थित आवास पर मरीजों की भीड़ रहती थी। एके स्वर्णकार के मधुर व्यवहार के कारण ही लोग उनसे लगाव रखते थे। ओपीडी में भीड़ के बावजूद मरीज व तीमारदारों से प्यार से बात करते और समझाते थे।
जिला अस्पताल में डॉक्टर एके स्वर्णकार की नियुक्ति ईएमओ के पद पर हुई। रात इमरजेंसी में ड्यूटी करने के साथ उस समय के प्रसिद्ध फिजिशियन डॉक्टर पीके गहलौत के सानिध्य में ओपीडी में उनके साथ बैठने लगे। डॉ पीके गहलौत के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके स्थान पर बैठ मरीजों का इलाज करने लगे। कुछ समय बाद इनका ट्रांसफर अंडर सीएमओ हो गया। टीबी क्लिनिक में बैठने लगे।
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