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पुराने सीवरेज सिस्टम के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं : नारद
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बलिया। अपने ड्रीम प्रोजेक्ट शहर के सीवरेज सिस्टम में बदलाव पर पूर्व मंत्री नारद राय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बृहस्पतिवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में वे भाजपा सरकार पर जमकर बरसे।
उन्होंने कहा कि गंगा एक्शन प्लान के जिम्मेदार लोगों ने गंगा में दूषित पानी जाने के नाम पर ट्रीटमेंट प्लांट को रुकवा दिया। रिवाइज्ड एस्टीमेट भेज दिया। यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है। मुलायम सिंह यादव की सरकार में इसके लिए 95 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए थे। दो फेज में सीवरेज सिस्टम लगाने की परियोजना बनी थी। दोनों तरफ दो चरणों में कार्य होना था। पहले चरण का काम चल ही रहा था कि सरकार चली गई। अगले पांच साल में बसपा सरकार के दौरान सीवरेज का कोई कार्य नहीं हुआ। अमृतपाली में जो जमीन चिन्हित की गई थी, बसपा सरकार में उसे वापस कर दिया गया। 2012 में हमारी सरकार आई तो 2015 में छोड़हर के पास ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई। 19.6 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये दिया गया था। सरकार चली गई तो बेदुआ से छोड़हर के लिए जो काम चल रहा था, वह रोक दिया गया। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए स्वीकृत इस 25 करोड़ में नमामि गंगे के नाम पर 11 करोड़ रुपये घरों से निकलने वाले मल-जल को मेन होल तक ले जाने के मद में स्थानांतरित कर दिया गया। कमीशन लेकर चार करोड़ रुपए सिक्योरिटी मनी ठेकेदार को दे दी गई। 25 करोड़ में पंद्रह करोड़ रुपए की बर्बादी कर दी गई। अब पुराने प्रोजेक्ट के स्थान पर 204 करोड़ के नए प्रोजेक्ट लाकर वर्तमान सरकार के प्रतिनिधि शहर के विकास को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। अच्छा होता कि गंगा एक्शन प्लान के अधिकारी हमारे यहां गंगा में गन्दा पानी न जाए इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट बनवाते। कहा जा रहा है कि शहर के दक्षिण दिशा में रिंगरोड के नीचे सीवरेज बनेगा। यह सफ़ेद झूठ है। फ्लड एरिया में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनता। चन्द्रशेखर उपाध्याय, प्रेमशंकर चतुर्वेदी व राजकुमार पाण्डेय आदि थे।
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उन्होंने कहा कि गंगा एक्शन प्लान के जिम्मेदार लोगों ने गंगा में दूषित पानी जाने के नाम पर ट्रीटमेंट प्लांट को रुकवा दिया। रिवाइज्ड एस्टीमेट भेज दिया। यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है। मुलायम सिंह यादव की सरकार में इसके लिए 95 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए थे। दो फेज में सीवरेज सिस्टम लगाने की परियोजना बनी थी। दोनों तरफ दो चरणों में कार्य होना था। पहले चरण का काम चल ही रहा था कि सरकार चली गई। अगले पांच साल में बसपा सरकार के दौरान सीवरेज का कोई कार्य नहीं हुआ। अमृतपाली में जो जमीन चिन्हित की गई थी, बसपा सरकार में उसे वापस कर दिया गया। 2012 में हमारी सरकार आई तो 2015 में छोड़हर के पास ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई। 19.6 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये दिया गया था। सरकार चली गई तो बेदुआ से छोड़हर के लिए जो काम चल रहा था, वह रोक दिया गया। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए स्वीकृत इस 25 करोड़ में नमामि गंगे के नाम पर 11 करोड़ रुपये घरों से निकलने वाले मल-जल को मेन होल तक ले जाने के मद में स्थानांतरित कर दिया गया। कमीशन लेकर चार करोड़ रुपए सिक्योरिटी मनी ठेकेदार को दे दी गई। 25 करोड़ में पंद्रह करोड़ रुपए की बर्बादी कर दी गई। अब पुराने प्रोजेक्ट के स्थान पर 204 करोड़ के नए प्रोजेक्ट लाकर वर्तमान सरकार के प्रतिनिधि शहर के विकास को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। अच्छा होता कि गंगा एक्शन प्लान के अधिकारी हमारे यहां गंगा में गन्दा पानी न जाए इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट बनवाते। कहा जा रहा है कि शहर के दक्षिण दिशा में रिंगरोड के नीचे सीवरेज बनेगा। यह सफ़ेद झूठ है। फ्लड एरिया में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनता। चन्द्रशेखर उपाध्याय, प्रेमशंकर चतुर्वेदी व राजकुमार पाण्डेय आदि थे।
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