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Ballia News: केबल में फाॅल्ट, अस्पताल की बिजली पांच घंटे गुल रही
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नगर के ओवरव्रीज पर अस्पताल के केबल खराब होने के बाद मरम्मत के लिए किया गया खुदाई।संवाद
बलिया। जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था एक बार फिर मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गई। शहर के ओवरब्रिज के पास पावर स्टेशन से जिला अस्पताल उपकेंद्र को आने वाली 11 हजार केवी के मुख्य केबल में फाॅल्ट आने से बृहस्पतिवार को सुबह सात बजे के बाद से दोपहर एक बजे तक करीब पांच घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही।
बिजली गुल होने से ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड, सीटी स्कैन, एक्स-रे और डायलिसिस जैसी सेवाएं प्रभावित हुईं। सीटी स्कैन, डायलिसिस और एक्स-रे कराने पहुंचे 80 मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ा। 30 मरीजों को बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ा। 10 मरीजों को डायलसिसि के लिए 3 घंटे इंतजार करना पड़ा। इमरजेंसी व वार्डों में जनरेटर के सहारे पंखा व लाइट की सप्लाई से भर्ती मरीजों को राहत रही।
सुबह करीब सात बजे बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद अस्पताल परिसर व चिकित्सकों और कर्मचारियों के आवासों में अफरातफरी की स्थिति बन गई। उमस और गर्मी के बीच ओपीडी में मरीज और तीमारदार परेशान रहे। अस्पताल के कई हिस्सों में पंखे और अन्य विद्युत उपकरण बंद हो गए। हालांकि इमरजेंसी और जरूरी सेवाओं के लिए जनरेटर चालू कर आपूर्ति बहाल रखने का प्रयास किया गया। करीब पांच घंटे बाद बिजली निगम ने विशुनीपुर सब स्टेशन के लाइन से जिला अस्पताल के उपकेंद्र को जोड़कर वैकल्पिक व्यवस्था से आपूर्ति बहाल की। इसके बाद अस्पताल में सामान्य बिजली व्यवस्था शुरू हो सकी।
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ओवरलोड का पुराना मर्ज, पत्रों के बाद भी स्थाई समाधान नहीं
जिला अस्पताल में बिजली फाॅल्ट और ओवरलोड की समस्या नई नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार परिसर में बने चिकित्सकों और कर्मचारियों के आवासों में एसी समेत अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक इस्तेमाल होने से लोड बढ़ता है। इसका असर अस्पताल की मुख्य विद्युत व्यवस्था पर पड़ता है। ओवरलोड के कारण मुख्य केबल में बार-बार फाॅल्ट आने और जलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ओवरलोड की समस्या दूर कराने के लिए बिजली निगम को पिछले एक साल में तीन से चार बार पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद स्थाई समाधान नहीं हो सका है।
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एक केबल पर अस्पताल और सीएमओ कार्यालय का भार
जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था पिछले करीब डेढ़ साल से बेपटरी है। सप्ताह में दो-तीन दिन एक से दो घंटे तक फाॅल्ट होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय की बिजली आपूर्ति एक ही केबल से जुड़ी है। सीएमओ कार्यालय में कई एसी लगने के बाद फाॅल्ट की समस्या और बढ़ गई है। सीएमएस ने इमरजेंसी और ओपीडी के केबल से सीएमओ कार्यालय की बिजली आपूर्ति अलग करने के लिए दो-तीन बार पत्र भेजा, लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं बदली।
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कब-कब आई फॉल्ट की परेशानी
केस 01:
18 जून को गर्मी और ओवरलोडिंग के कारण जिला अस्पताल के केबल में अचानक आग लग गई। इसके कारण जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति करीब चार घंटे तक प्रभावित रही। इस दौरान इमरजेंसी, मेडिकल, हड्डी, सर्जिकल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीज गर्मी से परेशान रहे।
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केस-02 :
20 जून को ओवरलोडिंग के कारण केबल जलने से जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति करीब चार घंटे तक बाधित रही। इस दौरान इमरजेंसी, मेडिकल, हड्डी, सर्जिकल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करीब 105 मरीज गर्मी से बेहाल रहे। तीमारदार हाथ वाले पंखे, कार्डबोर्ड और कपड़े से मरीजों को हवा करते नजर आए।
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केस-03 :
जुलाई 2025 में बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान अस्पताल के जनरेटर में भी तकनीकी खराबी आ गई। इससे करीब 45 मिनट तक इमरजेंसी में अंधेरा रहा। स्थिति यह बनी कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा।
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केस-04 :
अगस्त में इमरजेंसी के पास बिजली का तार टूटने से जिला अस्पताल की आपूर्ति करीब छह घंटे तक बाधित रही। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर सीटी स्कैन, एक्स-रे और डायलिसिस जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ जाती है।
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बोले मरीज ...
बिजली नहीं होने से सीटी स्कैन जांच बंद रही। सुबह एक रिश्तेदार की जांच कराने अस्पताल पहुंचा था। लेकिन फाॅल्ट के कारण जांच शुरू नहीं हो सकी। कई मरीज बिना जांच कराए ही घर लौट गए। अब कल दोबारा जांच कराने आएंगे।- बिरेंद्र साहनी, निवासी सोहांव
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जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए दोस्त के साथ आया था। दोपहर 12 बजे तक बिजली आने का इंतजार किया, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि बिजली कब तक आएगी। अब तीन बजे तक इंतजार करेंगे। - अखिलेश गोंड़, निवासी वैना
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अस्पताल में बिजली नहीं होने से एसी नहीं चल रहा था। पंखा चल रहा था, लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी थी। उमस भरी गर्मी में मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हुई। काफी देर बाद जनरेटर चालू किया गया- विकास मौर्य, निवासी बैरिया
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चिकित्सक ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी, इसलिए समय से जिला अस्पताल पहुंच गया था। लेकिन बिजली नहीं होने के कारण जांच नहीं हो सकी। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद लौटना पड़ा। अब दूसरे दिन जांच कराने आएंगे। - राजेश कुशवाहा, निवासी बाराचवर, गाजीपुर
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11 हजार केवी के मुख्य केबल में फाॅल्ट आने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। जनरेटर से इमरजेंसी व्यवस्था की सप्लाई चालू रखी गई। ओवरलोड की समस्या खत्म कराने के लिए बिजली निगम को पिछले एक साल में कई बार पत्र भेजे गए हैं। इसके बावजूद अभी तक इसका स्थाई समाधान नहीं हो सका है। - डॉ. सुजीत कुमार यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल, बलिया।
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बिजली गुल होने से ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड, सीटी स्कैन, एक्स-रे और डायलिसिस जैसी सेवाएं प्रभावित हुईं। सीटी स्कैन, डायलिसिस और एक्स-रे कराने पहुंचे 80 मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ा। 30 मरीजों को बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ा। 10 मरीजों को डायलसिसि के लिए 3 घंटे इंतजार करना पड़ा। इमरजेंसी व वार्डों में जनरेटर के सहारे पंखा व लाइट की सप्लाई से भर्ती मरीजों को राहत रही।
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सुबह करीब सात बजे बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद अस्पताल परिसर व चिकित्सकों और कर्मचारियों के आवासों में अफरातफरी की स्थिति बन गई। उमस और गर्मी के बीच ओपीडी में मरीज और तीमारदार परेशान रहे। अस्पताल के कई हिस्सों में पंखे और अन्य विद्युत उपकरण बंद हो गए। हालांकि इमरजेंसी और जरूरी सेवाओं के लिए जनरेटर चालू कर आपूर्ति बहाल रखने का प्रयास किया गया। करीब पांच घंटे बाद बिजली निगम ने विशुनीपुर सब स्टेशन के लाइन से जिला अस्पताल के उपकेंद्र को जोड़कर वैकल्पिक व्यवस्था से आपूर्ति बहाल की। इसके बाद अस्पताल में सामान्य बिजली व्यवस्था शुरू हो सकी।
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ओवरलोड का पुराना मर्ज, पत्रों के बाद भी स्थाई समाधान नहीं
जिला अस्पताल में बिजली फाॅल्ट और ओवरलोड की समस्या नई नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार परिसर में बने चिकित्सकों और कर्मचारियों के आवासों में एसी समेत अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक इस्तेमाल होने से लोड बढ़ता है। इसका असर अस्पताल की मुख्य विद्युत व्यवस्था पर पड़ता है। ओवरलोड के कारण मुख्य केबल में बार-बार फाॅल्ट आने और जलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ओवरलोड की समस्या दूर कराने के लिए बिजली निगम को पिछले एक साल में तीन से चार बार पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद स्थाई समाधान नहीं हो सका है।
एक केबल पर अस्पताल और सीएमओ कार्यालय का भार
जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था पिछले करीब डेढ़ साल से बेपटरी है। सप्ताह में दो-तीन दिन एक से दो घंटे तक फाॅल्ट होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय की बिजली आपूर्ति एक ही केबल से जुड़ी है। सीएमओ कार्यालय में कई एसी लगने के बाद फाॅल्ट की समस्या और बढ़ गई है। सीएमएस ने इमरजेंसी और ओपीडी के केबल से सीएमओ कार्यालय की बिजली आपूर्ति अलग करने के लिए दो-तीन बार पत्र भेजा, लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं बदली।
कब-कब आई फॉल्ट की परेशानी
केस 01:
18 जून को गर्मी और ओवरलोडिंग के कारण जिला अस्पताल के केबल में अचानक आग लग गई। इसके कारण जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति करीब चार घंटे तक प्रभावित रही। इस दौरान इमरजेंसी, मेडिकल, हड्डी, सर्जिकल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीज गर्मी से परेशान रहे।
केस-02 :
20 जून को ओवरलोडिंग के कारण केबल जलने से जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति करीब चार घंटे तक बाधित रही। इस दौरान इमरजेंसी, मेडिकल, हड्डी, सर्जिकल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करीब 105 मरीज गर्मी से बेहाल रहे। तीमारदार हाथ वाले पंखे, कार्डबोर्ड और कपड़े से मरीजों को हवा करते नजर आए।
केस-03 :
जुलाई 2025 में बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान अस्पताल के जनरेटर में भी तकनीकी खराबी आ गई। इससे करीब 45 मिनट तक इमरजेंसी में अंधेरा रहा। स्थिति यह बनी कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा।
केस-04 :
अगस्त में इमरजेंसी के पास बिजली का तार टूटने से जिला अस्पताल की आपूर्ति करीब छह घंटे तक बाधित रही। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर सीटी स्कैन, एक्स-रे और डायलिसिस जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ जाती है।
बोले मरीज ...
बिजली नहीं होने से सीटी स्कैन जांच बंद रही। सुबह एक रिश्तेदार की जांच कराने अस्पताल पहुंचा था। लेकिन फाॅल्ट के कारण जांच शुरू नहीं हो सकी। कई मरीज बिना जांच कराए ही घर लौट गए। अब कल दोबारा जांच कराने आएंगे।- बिरेंद्र साहनी, निवासी सोहांव
जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए दोस्त के साथ आया था। दोपहर 12 बजे तक बिजली आने का इंतजार किया, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि बिजली कब तक आएगी। अब तीन बजे तक इंतजार करेंगे। - अखिलेश गोंड़, निवासी वैना
अस्पताल में बिजली नहीं होने से एसी नहीं चल रहा था। पंखा चल रहा था, लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी थी। उमस भरी गर्मी में मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हुई। काफी देर बाद जनरेटर चालू किया गया- विकास मौर्य, निवासी बैरिया
चिकित्सक ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी, इसलिए समय से जिला अस्पताल पहुंच गया था। लेकिन बिजली नहीं होने के कारण जांच नहीं हो सकी। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद लौटना पड़ा। अब दूसरे दिन जांच कराने आएंगे। - राजेश कुशवाहा, निवासी बाराचवर, गाजीपुर
11 हजार केवी के मुख्य केबल में फाॅल्ट आने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। जनरेटर से इमरजेंसी व्यवस्था की सप्लाई चालू रखी गई। ओवरलोड की समस्या खत्म कराने के लिए बिजली निगम को पिछले एक साल में कई बार पत्र भेजे गए हैं। इसके बावजूद अभी तक इसका स्थाई समाधान नहीं हो सका है। - डॉ. सुजीत कुमार यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल, बलिया।