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बनेंगी टीम, खुले में शौच के बताएगी नुकसान
ballia
Updated Tue, 03 May 2016 10:26 PM IST
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toilet
- फोटो : getty images
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विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी के. बालाजी की अध्यक्षता में स्वच्छता से संबंधित कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में लखनऊ से आए प्रशिक्षक वेंकटेश अरलिकट्टी ने खुले में शौचमुक्त गांव बनाने के महत्वपूर्ण टिप्स दिये और इससे होने वाले लाभ को बताया।
स्वच्छता मिशन के निदेशक अमित गुप्ता के निर्देश पर आयोजित कार्यशाला में सीडीओ ने खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया। सभी विकास खडों में पांच-पांच टीम बनेगी जो चयनित ग्राम पंचायतों में जाकर ट्रिगरिंग कर लोगों को जागरूक करेगी।
उसके बाद सुबह चार बजे से उन गांवों में जाएंगे, जहां कोई भी खुले में शौच करने जाता है तो उन लोगों को ऐसा नही करने के लिए प्रेरित करेंगे। टीम में विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएंगी। सीडीओ ने डीपीआरओ को निर्देश दिया कि सीएलटीएस के माध्यम से ट्रेनिंग लेकर ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त बनाये जाने की कार्ययोजना तैयार की जाय।
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लखनऊ से आए प्रशिक्षक/पेयजल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के एक्सपर्ट श्री वेंकटेश ने खुले में शौचमुक्त गांव बनाने के लिए किस तरह के प्रयास किये जाएं, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि हमारा ध्यान सिर्फ शौचालय बनाने पर ही न हो बल्कि खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) कार्यक्रम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत हैै। भारत में 50.62 प्रतिशत शौचालयविहीन घर है। यूपी में यह स्थिति और खराब है जहां 58.43 प्रतिशत घर शौचालयविहीन है।
एक सर्वे में पाया गया है कि 32 प्रतिशत ऐसे घर है जो शौचालय होने के बावजूद उसका प्रयोग नही करते। सेफ्टी टैंक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सेफ्टी टैंक का पानी ग्राम पंचायत की खुली नालियों में बहाया जाता है जो और ज्यादा नुकसानदायक है। इससे पूरा वातावरण खराब होता है। इसके लिए भी जागरूक करने की जरूरत है। कार्यशाला में सीएमओ डॉ पीके सिंह, पीडी प्रमोद यादव, जल निगम के एक्सईएन फणीन्द्र राय, सभी बीडीओ, एडीओ पंचायत, डीपीसी शैलेश ओझा, इसरार अहमद, उत्कर्ष शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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स्वच्छता मिशन के निदेशक अमित गुप्ता के निर्देश पर आयोजित कार्यशाला में सीडीओ ने खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया। सभी विकास खडों में पांच-पांच टीम बनेगी जो चयनित ग्राम पंचायतों में जाकर ट्रिगरिंग कर लोगों को जागरूक करेगी।
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उसके बाद सुबह चार बजे से उन गांवों में जाएंगे, जहां कोई भी खुले में शौच करने जाता है तो उन लोगों को ऐसा नही करने के लिए प्रेरित करेंगे। टीम में विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएंगी। सीडीओ ने डीपीआरओ को निर्देश दिया कि सीएलटीएस के माध्यम से ट्रेनिंग लेकर ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त बनाये जाने की कार्ययोजना तैयार की जाय।
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लखनऊ से आए प्रशिक्षक/पेयजल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के एक्सपर्ट श्री वेंकटेश ने खुले में शौचमुक्त गांव बनाने के लिए किस तरह के प्रयास किये जाएं, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि हमारा ध्यान सिर्फ शौचालय बनाने पर ही न हो बल्कि खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) कार्यक्रम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत हैै। भारत में 50.62 प्रतिशत शौचालयविहीन घर है। यूपी में यह स्थिति और खराब है जहां 58.43 प्रतिशत घर शौचालयविहीन है।
एक सर्वे में पाया गया है कि 32 प्रतिशत ऐसे घर है जो शौचालय होने के बावजूद उसका प्रयोग नही करते। सेफ्टी टैंक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सेफ्टी टैंक का पानी ग्राम पंचायत की खुली नालियों में बहाया जाता है जो और ज्यादा नुकसानदायक है। इससे पूरा वातावरण खराब होता है। इसके लिए भी जागरूक करने की जरूरत है। कार्यशाला में सीएमओ डॉ पीके सिंह, पीडी प्रमोद यादव, जल निगम के एक्सईएन फणीन्द्र राय, सभी बीडीओ, एडीओ पंचायत, डीपीसी शैलेश ओझा, इसरार अहमद, उत्कर्ष शुक्ला आदि मौजूद रहे।