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भवन तक तो दुरुस्त हैं नहीं बेंच तो भूल ही जाएं
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 29 Nov 2016 08:14 PM IST
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school
- फोटो : amar ujala
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प्राथमिक विद्यालयों की व्यवस्था को लेकर महकमा लाख दावे कर रहा है लेकिन जनपद में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विद्यालयों में पढ़ाई की सुविधाएं तो छोड़िए बच्चों के बैठने और शौचालय तक की हालत खस्ता है। जिले में कुल 2054 प्राथमिक और 615 जूनियर हाई स्कूल हैं।
नगर की बात करें तो बीएसए कार्यालय परिसर में ही तीन विद्यालय चलते हैं, जिसमें एक प्राथमिक तथा दो उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। लेकिन यहीं के भवन काफी जर्जर हाल में है, बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच की व्यवस्था भी नहीं है। यह तो नगर के विद्यालय का हाल है तो लाजिमी है कि ग्रामीण इलाकों का हालत खराब है।
विद्यालयों में विद्युतीकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग 50 फीसदी विद्यालयों में बिजली होने का दावा करता है। लेकिन जमीनी हालत इससे काफी अलग है। कहीं पंखा नहीं है तो कहीं बल्ब नहीं है। वहीं कहीं छतें टपक रही हैं।
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बीएसए कार्यालय परिसर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय तहसील स्कूल के नाम से चल रहे विद्यालय के भवन का निर्माण 1908 में हुआ था। स्कूल काफी जर्जर हो गया है, स्कूल का एक हिस्सा गिर चुका है। पिछले साल आये भूकंप के दौरान भवन की दीवारें भी दरक गई हैं। भवन बनवाने के लिए कई बार विद्यालय के हेडमास्टर ने बीएसए को पत्र लिखा है।
इसी परिसर में एक प्राथमिक विद्यालय भी चलता है, जहां दो कमरों में 180 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। ये अलग बात है कि सभी छात्र विद्यालय नहीं आ पाते हैं, अन्यथा बैठने तक ही जगह न रहे। बनकटा स्थित प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय का भी है, जहां खिड़की भी नदारद है। वहीं फर्श जर्जर है, किसी तरह स्कूल शिक्षा देने की औपचारिकताएं पूरी करते हैं। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतम परिषदीय विद्यालयों का है।
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नगर की बात करें तो बीएसए कार्यालय परिसर में ही तीन विद्यालय चलते हैं, जिसमें एक प्राथमिक तथा दो उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। लेकिन यहीं के भवन काफी जर्जर हाल में है, बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच की व्यवस्था भी नहीं है। यह तो नगर के विद्यालय का हाल है तो लाजिमी है कि ग्रामीण इलाकों का हालत खराब है।
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विद्यालयों में विद्युतीकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग 50 फीसदी विद्यालयों में बिजली होने का दावा करता है। लेकिन जमीनी हालत इससे काफी अलग है। कहीं पंखा नहीं है तो कहीं बल्ब नहीं है। वहीं कहीं छतें टपक रही हैं।
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बीएसए कार्यालय परिसर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय तहसील स्कूल के नाम से चल रहे विद्यालय के भवन का निर्माण 1908 में हुआ था। स्कूल काफी जर्जर हो गया है, स्कूल का एक हिस्सा गिर चुका है। पिछले साल आये भूकंप के दौरान भवन की दीवारें भी दरक गई हैं। भवन बनवाने के लिए कई बार विद्यालय के हेडमास्टर ने बीएसए को पत्र लिखा है।
इसी परिसर में एक प्राथमिक विद्यालय भी चलता है, जहां दो कमरों में 180 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। ये अलग बात है कि सभी छात्र विद्यालय नहीं आ पाते हैं, अन्यथा बैठने तक ही जगह न रहे। बनकटा स्थित प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय का भी है, जहां खिड़की भी नदारद है। वहीं फर्श जर्जर है, किसी तरह स्कूल शिक्षा देने की औपचारिकताएं पूरी करते हैं। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतम परिषदीय विद्यालयों का है।