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माता-पिता की गरीबी पर आक्षेप तपस्या का अपमान: सुरेंद्र
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इंदरपुर (बलिया)। बसपा विधायक उमाशंकर सिंह व परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह के बीच उत्पन्न विवाद में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह की इंट्री हो जाने से जिले का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। पूर्व विधायक ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है कि आज जब कोई उमाशंकर सिंह की पारिवारिक स्थिति या उनके माता पिता की गरीबी पर आक्षेप करता है तो वह उस तपस्या का अपमान करता है जिसने इस समाज को एक श्रेष्ठ रत्न दिया है। इसलिए मैं ऐसे विचारों की घोर निंदा करता हूं। साथ ही उमाशंकर सिंह के माता पिता को शत-शत प्रणाम करता हूं, जिन्होंने अभावों के बीच भी पुरुषार्थ का दीप जलाए रखा। वाल पर पूर्व विधायक ने लिखा है कि गरीबी में पुरुषार्थ कर परिवार का पालन करना कोई लांछन या अभिशाप नहीं है। अपितु यह उच्चतम स्तर की साधना व अराधना है। रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह के माता-पिता ने इसी साधना को अपने जीवन का पथ बनाया और कठिन परिस्थितियों में भी अपने पुत्र को ऐसे संस्कार प्रदान किए कि वह आज राजनीति में केवल नेता नहीं, बल्कि त्याग सेवा व मानवता का प्रतीक बन कर खड़े हैं। यह संस्कार कोई एक दिन या किसी क्षण में नहीं बनते, यह तो माता पिता की वर्षों की तपस्या उनके त्याग और उनके आशीर्वाद से जीवन में उतरते हैं। भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह द्वारा फेसबुक के वाल पर की गई इस प्रतिक्रिया को काफी लाइक व सार्थक कमेंट मिल रहे हैं। उमाशंकर सिंह के समर्थकों के उत्साह में इजाफा भी हुआ है।
बता दें कि पिछले दिनों बसपा विधायक ने परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह को इस्ट इंडिया कंपनी बताया था। वहीं, पलटवार करते हुए परिवहन राज्यमंत्री ने कहा था कि विधायक के पिता तेल बेचते थे।
नगरा ब्लाॅक के खनवर नेवादा गांव निवासी विधायक उमाशंकर सिंह के पिता घूरहू सिंह सेना से रिटायर हैं। उनके नाम से कोटे की दुकान आवंटित हुई थी, लेकिन जब उमाशंकर सिंह विधायक बन गए, उसके बाद कोटे की दुकान को सरेंडर कर दिया था।
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बता दें कि पिछले दिनों बसपा विधायक ने परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह को इस्ट इंडिया कंपनी बताया था। वहीं, पलटवार करते हुए परिवहन राज्यमंत्री ने कहा था कि विधायक के पिता तेल बेचते थे।
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नगरा ब्लाॅक के खनवर नेवादा गांव निवासी विधायक उमाशंकर सिंह के पिता घूरहू सिंह सेना से रिटायर हैं। उनके नाम से कोटे की दुकान आवंटित हुई थी, लेकिन जब उमाशंकर सिंह विधायक बन गए, उसके बाद कोटे की दुकान को सरेंडर कर दिया था।
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