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कटानरोधी कार्य रुका, जो हुआ था वो भी डूबा

Tue, 30 Jun 2015 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया Updated Tue, 30 Jun 2015 11:21 PM IST
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Anti work in the river dipped intersection .
ब्राहिमाबाद नौबरार (आठगांवा) ग्राम पंचायत में जारी कटावरोधी कार्य करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुआ। अभी लगभग 50 गज कटानरोधी कार्य हुआ था। इसी बीच घाघरा की बढ़ती लहरों ने कराए गए कटानरोधी कार्य का अधिकतम हिस्सा समाहित कर लिया। रही-सही कसर सोमावार की रात घाघरा के तेजी से बढ़े चल स्तर से पूरी कर दी। जिससे कटानरोधी कार्य को पूरी तरह से अपने समाहित कर लिया। जलस्तर बढ़ने से कटानरोधी कार्य भी बाधित हो गया। घाघरा के कटान को देखते हुए आठगांवा के बाशिंदे अपने अस्तित्व को लेकर काफी दहशत में हैं।
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इब्राहिमाबाद नौबरार के आठगांवा में सोमवार को घाघरा के बढ़े जलस्तर ने कटानरोधी कार्य पर ग्रहण लगा दिया है। यहीं नहीं इससे पहले रविवार की रात घाघरा की बढ़ते हुए जलस्तर की तेज लहरों ने एक सप्ताह के अंदर कराए गए कटानरोधी कार्य के अधिकतम हिस्से को अपने आगोश में ले लिया था। जबकि सोमवार को बचा-खुचा कटानरोधी कार्य भी घाघरा में समाहित हो गया।
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साथ ही मुख्यमंत्री आपदा कोष के पांच करोड़ की लागत से चल रहे कटानरोधी कार्य पर ग्रहण लगा दिया। वैसे ही कटानरोधी कार्य की तेजी में संसाधन की कमी आड़े आ रही थी। मजदूर बोरी सहित अन्य संसाधन के अभाव में बैठे थे। वहीं नायलान के जाल के अभाव में कटानरोधी कार्य सोमवार को ठप था। सोमवार को घाघरा के बढ़े जलस्तर और हो रहे तेज कटान से आठगांवा के ग्रामीणों में अपने अस्तित्व को बचाने को लेकर चिंता साफ नजर आ रही थी। ग्रामीणों को अंदेशा होने लगा है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से कटानरोधी कार्य का आहरित पांच करोड़ धन अब गंगा के पेटे में समा जाएगा।
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क्षेत्र के रामनरेश चौधरी, राकेश सिंह राकी, नंदजी सिंह आदि का कहना है कि पहले तो बाढ़ विभाग के अधिकारी कहते फिरते थे कि मई माह में घाघरा का पानी पेटे में समा जाएगा, तो कटानरोधी कार्य होगा। जब तक पानी पेटे से ऊपर है, तो कटानरोधी कार्य संभव नहीं है। लेकिन जब घाघरा का पानी पेटे में समाया, तो बाढ़ विभाग धन के अभाव की बात कह सोया रहा। जब फिर का समय आया, तो पता नहीं कहां से मुख्यममंत्री आपदा कोष से पांच करोड़ रुपया कटानरोधी कार्य के लिए आहरित हो गया। जो अब आठगांवा के ग्रामीणों के अस्तित्व के बचाव के लिए बेमतलब  साबित हो रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से किसी भी विधि से आठगांवा को कटान से बचाने की गुहार लगाई है। 
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