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एंटी रैबीज इंजेक्शन का टोटा, कहां जाएं मरीज
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 20 Jan 2015 10:29 PM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही नहीं, इस समय जिला अस्पताल में भी एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। ऐसे में संबंधित मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। वे महंगे दर पर बाहर से इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल में इंजेक्शन था लेकिन अन्य अस्पतालों में न होने के कारण यहां अधिक दबाव बढ़ गया। इसके चलते शनिवार से यहां पर भी इंजेक्शन मिलना बंद हो गया।
जनपद के प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर करीब एक पखवारे से एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इससे जिला अस्पताल पर अतिरिक्त लोड बढ़ जाने के कारण शनिवार से यहां से भी एंटी रैबीज सुई समाप्त हो गई है। इसके बाद सुई लगवाने आए मरीजों को तीन सौ रुपये में बाहर से सुई खरीदनी पड़ रही है।
मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहन करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में एंटी-रैबीज सुई लगवाने वालों की संख्या प्रतिदिन डेढ़ से दो सौ तक होती है। वहीं जनपद के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुई समाप्त होने के कारण मरीजों की संख्या और बढ़ गई।
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उधर सीएमएस कार्यालय के बाहर एंटी-रैबीज सुई नहीं है, लिखकर दीवार पर चस्पा कर दिया गया है।
जिला अस्पताल में आए मरीज शौकत, प्रशांत चौबे, अखिलेश भारती ने बताया कि अगर जनपद के प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज सुई प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती तो जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ता और आर्थिक बोझ से भी बच जाते। इस बाबत सीएमएस डा. केपी गर्ग ने बताया कि एक माह पहले ही एंटी-रैबीज सुई के लिए मांग भेज दिया गया है लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।
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जनपद के प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर करीब एक पखवारे से एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इससे जिला अस्पताल पर अतिरिक्त लोड बढ़ जाने के कारण शनिवार से यहां से भी एंटी रैबीज सुई समाप्त हो गई है। इसके बाद सुई लगवाने आए मरीजों को तीन सौ रुपये में बाहर से सुई खरीदनी पड़ रही है।
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मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहन करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में एंटी-रैबीज सुई लगवाने वालों की संख्या प्रतिदिन डेढ़ से दो सौ तक होती है। वहीं जनपद के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुई समाप्त होने के कारण मरीजों की संख्या और बढ़ गई।
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उधर सीएमएस कार्यालय के बाहर एंटी-रैबीज सुई नहीं है, लिखकर दीवार पर चस्पा कर दिया गया है।
जिला अस्पताल में आए मरीज शौकत, प्रशांत चौबे, अखिलेश भारती ने बताया कि अगर जनपद के प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज सुई प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती तो जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ता और आर्थिक बोझ से भी बच जाते। इस बाबत सीएमएस डा. केपी गर्ग ने बताया कि एक माह पहले ही एंटी-रैबीज सुई के लिए मांग भेज दिया गया है लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।