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सुस्त गति से चल रहा कटानरोधी कार्य, ग्रामीणों में रोष
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मझौवां (बलिया)। क्षेत्र में 36 करोड़ से चल रहे कटानरोधी कार्य के तहत पांच परियोजनाओं का निर्माण किया सुस्त गति से चल रहा है। सुघर छपरा के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ विभाग द्वारा काटनरोधी कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। कभी काम हो रहा तो कभी पूरे दिन ठप रखा जा रहा है। न तो संसाधन बढ़ाए जा रहे न मजदूर। यहीं स्थिति रही तो बाढ़ विभाग मानसून आने से पहले कार्य शायद ही पूरा कर पाएगा।
अधिशासी अभियंता की ओर से कटानरोधी कार्य का पचास फीसदी पूर्ण होने का दावा है, जबकि धरातल पर कार्य दस फीसदी भी पूर्ण नहीं है। ऐसे में इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि मानसून आने पर पिछले वर्ष की तरह ही गंगा के तटवर्ती इलाकों का हश्र न हो जाए।
रामगढ से उदईछपरा तक के कटानरोधी कार्यस्थल पर प्रोजेक्ट के अनुसार एनएच 31की रखवाली करने के लिए 27.540 से 27.910 के बीच चल रहे रिवेटमेंट कार्य में मानक की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाढ़ विभाग द्वारा नदी के 10 मीटर अंदर से ईसी बैग द्वारा प्लेटफार्म बनाना था जबकि गंगा नदी के किनारे से ही बालू की जगह मिट्टी भरकर रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बाढ़ विभाग द्वारा कार्य में लापरवाही करके सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। कटान पीड़ित जयप्रकाश ओझा का कहना है कि बाढ़ विभाग द्वारा सिर्फ दिखावा के लिए कहीं-कहीं एक से दो मीटर लंबाई के बीच ही प्लेटफार्म तैयार किया गया है। ठेकेदारों द्वारा कटानरोधी कार्य को आधे-अधूरे कार्य के साथ गुड़ वर्क दिखाने की जद्दोजहद किया जा रहा है। सुस्त गति से चल रहे कार्य और समय सीमा को देखते हुए कहीं से ऐसा नहीं लगता कि 15 जून तक कार्य पूर्ण हो पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि हर कटानरोधी परियोजना का कार्य तब ही शुरू किया जाता है जब बरसात नजदीक होता है।
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मानक के अनुसार ही कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप निराधार है। चिलचिलाती धूप की वजह से दोपहर में कार्य बाधित रहता है, जल्द ही संसाधन व मजदूर बढ़ाकर कार्य को समय से पहले पूरा कर लिया जाएगा। - संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, बाढ़ विभाग, बलिया
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अधिशासी अभियंता की ओर से कटानरोधी कार्य का पचास फीसदी पूर्ण होने का दावा है, जबकि धरातल पर कार्य दस फीसदी भी पूर्ण नहीं है। ऐसे में इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि मानसून आने पर पिछले वर्ष की तरह ही गंगा के तटवर्ती इलाकों का हश्र न हो जाए।
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रामगढ से उदईछपरा तक के कटानरोधी कार्यस्थल पर प्रोजेक्ट के अनुसार एनएच 31की रखवाली करने के लिए 27.540 से 27.910 के बीच चल रहे रिवेटमेंट कार्य में मानक की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाढ़ विभाग द्वारा नदी के 10 मीटर अंदर से ईसी बैग द्वारा प्लेटफार्म बनाना था जबकि गंगा नदी के किनारे से ही बालू की जगह मिट्टी भरकर रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बाढ़ विभाग द्वारा कार्य में लापरवाही करके सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। कटान पीड़ित जयप्रकाश ओझा का कहना है कि बाढ़ विभाग द्वारा सिर्फ दिखावा के लिए कहीं-कहीं एक से दो मीटर लंबाई के बीच ही प्लेटफार्म तैयार किया गया है। ठेकेदारों द्वारा कटानरोधी कार्य को आधे-अधूरे कार्य के साथ गुड़ वर्क दिखाने की जद्दोजहद किया जा रहा है। सुस्त गति से चल रहे कार्य और समय सीमा को देखते हुए कहीं से ऐसा नहीं लगता कि 15 जून तक कार्य पूर्ण हो पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि हर कटानरोधी परियोजना का कार्य तब ही शुरू किया जाता है जब बरसात नजदीक होता है।
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मानक के अनुसार ही कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप निराधार है। चिलचिलाती धूप की वजह से दोपहर में कार्य बाधित रहता है, जल्द ही संसाधन व मजदूर बढ़ाकर कार्य को समय से पहले पूरा कर लिया जाएगा। - संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, बाढ़ विभाग, बलिया