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Ballia News: वृहद पशु आश्रय स्थलों में क्षमता से कम पशु, सड़क व खेतों में पशुओं की भरमार
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बलिया। जिले में छुट्टे पशुओं को पशु आश्रय स्थलों में संरक्षित करने में लापरवाही जारी है। छुट्टे पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं लेकिन इसको लेकर जिम्मेदार मौन हैं। सरकारी आंकड़ों में ही 491 पशु छुट्टे घूम रहे हैं। जबकि कई गौशालाओं में मानक से कम पशु संरक्षित हैं। इस पर हर महीने लाखों का बजट भी खर्च हो रहा है।
वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए पशु आश्रय स्थल बनाने की कवायद शुरू की थी। हालांकि शुरुआती दौर में अस्थायी केंद्र खोलकर उसमें छुट्टा मवेशियों को रखा जाने लगा। जनपद में अलग-अलग वर्षों में दो वृहद पशु आश्रय स्थल संचालित हैं जबकि एक वृहद पशु आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। इसके अलावा, छुट्टे मवेशियों को पकड़ कर रखने के लिए जिले में 26 अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाए हैं।
इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 16 ब्लॉकों में एक-एक व नगर पालिका व आठ नगर पंचायतों में कुल एक-एक हैं। समय-समय पर शासन की ओर से अभियान चलाकर छुट्टे पशुओं को पशु आश्रय स्थलों में रखने का निर्देश दिया जाता है। इसके बावजूद सड़क से लेकर खेतों तक छुट्टे पशु चक्रमण करते मिल जाएंगे। सबसे अधिक छुट्टे पशुओं से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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3419 छुट्टे पशु किए गए हैं संरक्षित
जिले के पशु आश्रय स्थलों में कुल 2928 पशुओं को संरक्षित किया गया है। इसके अलावा सहभागिता योजना के तहत 407 पशु संरक्षित हैं। इन पशुओं के चारे आदि का इंतजाम प्रशासन की ओर से किया जाता है।
पूर्व के सापेक्ष छुट्टे पशुओं की संख्या सड़कों पर कम हुई है। समय-समय पर छुट्टे पशुओं को पकड़ कर पशु आश्रय स्थलों में रखने का कार्य किया जाता है। इस बाबत संबंधितों को निर्देश भी दिया गया है। - डॉ ओमप्रकाश सोनकर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बलिया
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वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए पशु आश्रय स्थल बनाने की कवायद शुरू की थी। हालांकि शुरुआती दौर में अस्थायी केंद्र खोलकर उसमें छुट्टा मवेशियों को रखा जाने लगा। जनपद में अलग-अलग वर्षों में दो वृहद पशु आश्रय स्थल संचालित हैं जबकि एक वृहद पशु आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। इसके अलावा, छुट्टे मवेशियों को पकड़ कर रखने के लिए जिले में 26 अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाए हैं।
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इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 16 ब्लॉकों में एक-एक व नगर पालिका व आठ नगर पंचायतों में कुल एक-एक हैं। समय-समय पर शासन की ओर से अभियान चलाकर छुट्टे पशुओं को पशु आश्रय स्थलों में रखने का निर्देश दिया जाता है। इसके बावजूद सड़क से लेकर खेतों तक छुट्टे पशु चक्रमण करते मिल जाएंगे। सबसे अधिक छुट्टे पशुओं से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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3419 छुट्टे पशु किए गए हैं संरक्षित
जिले के पशु आश्रय स्थलों में कुल 2928 पशुओं को संरक्षित किया गया है। इसके अलावा सहभागिता योजना के तहत 407 पशु संरक्षित हैं। इन पशुओं के चारे आदि का इंतजाम प्रशासन की ओर से किया जाता है।
पूर्व के सापेक्ष छुट्टे पशुओं की संख्या सड़कों पर कम हुई है। समय-समय पर छुट्टे पशुओं को पकड़ कर पशु आश्रय स्थलों में रखने का कार्य किया जाता है। इस बाबत संबंधितों को निर्देश भी दिया गया है। - डॉ ओमप्रकाश सोनकर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बलिया