बलिया। वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 में हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले व इस अवधि में कार्य कर चुके सचिवों में खलबली मच गई है। इस संदर्भ में दस्तावेज जमा न करने को लेकर सचिवों पर लटकी तलवार के मद्देनजर सोमवार को विभिन्न ब्लॉकों पर पहुंचे तत्कालीन सचिवों ने जहां दस्तावेज उपलब्ध कराए, वहीं कई तत्कालीन सचिवों ने चार्ज हस्तांतरण की प्रति भी उपलब्ध करा दी। अमर उजाला ने 29 व 30 अगस्त के अंक में इसका खुलासा किया था। जिले में वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले की फाइलें एक बार फिर दौड़ने लगी हैं। वर्ष 2005 में सबसे पहले सीबीसीआईडी ने 17 ब्लॉकों में हुई गड़बड़ी को देखते हुए अलग-अलग थानों में कुल 51 मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इन मुकदमों में 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच रहे सभी सीडीओ, पीडी, डीडीओ, बीडीओ, तहसीलदार, पूर्ति निरीक्षक, ट्रांसपोर्टर, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव आदि समेत कुल 6055 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया। हालांकि बाद में शासन ने जांच की जिम्मेदारी ईओडब्लू को दे दी। इसी बीच जिले के कुछ लोगों ने इस घोटाले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने आठ मुकदमों को अपने अधीन लेते हुए जांच शुुरूकर दी। उधर, ईओडब्लू वाराणसी की ओर से अधिकांश मामलों की जांच की जा रही है। कई मामलों में ईओडब्लू की ओर से ग्राम पंचायत सचिवों से योजना से संबंधित पत्रावलियों की मांग की जा रही है लेकिन अब तक पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। ईओेडब्लू ने इसे लापरवाही मानते हुए अधिकारियों को अवगत कराया। इस मामले में डीआरडीए के पीडी ने 14 ब्लॉकों के 114 तत्कालीन सचिवों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इसकी जानकारी होते ही तत्कालीन सचिवों में हड़कंप मच गया और वह सोमवार को संबंधित ब्लॉकों पर पहुंचे। कुछ तत्कालीन सचिवों ने जहां दस्तावेजों को ब्लॉक कार्यालय पर जमा किया, वहीं कई तत्कालीन सचिवों ने दिए गए कार्यभार के प्राप्ति की प्रति ब्लॉक कार्यालय में जमा किया।