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प्रशासन रहा नाकाम, बाढ़ के बाद अब बारिश की पड़ रही मार
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खुले आसमान के नीचे परिवार के साथ सड़क किनारे बैठा बाढ़ पीड़ित का परिवार।
- फोटो : BALLIA
बलिया। दया छपरा में बाढ़ के चलते अपने घरों को छोड़ सड़कों के किनारे आकर शरण ले रहे लोगों पर इन दिनों दोहरी मार पड़ रही है। प्रशासन की उदासीनता, बाढ़ की मार के बाद अब मंगलवार को तेज बरसात ने इन लोगों के आंखों में आंसू ला दिए। ये लोग आसमान की ओर देखकर ईश्वर से इस आपदा से बचाने के लिए गुहार लगाते देखे गए । वहीं, जिला प्रशासन ने इन लोगों को ठीक से टेंट तक उपलब्ध नहीं कराया है।
अमर उजाला संवाददाता जब इन लोगों के बीच गया तो पाया कि किसी तरह इन लोगों ने पॉलिथीन और तिरपाल से टेंट बनाई थी। वह भी तेज बारिश के दौरान ढह गई। पूरा परिवार, लड़के-बच्चे और पशु सभी खुले आसमान के नीचे तेज बरसात में भीगते दिखाई दिए। इन लोगों के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी व्यवस्था नहीं दिखी। ना ही ढंग के टेंट दिखे और न ही खाने पीने की कोई चीज ही मुहैया कराई गई थी। इन सभी को आस थी कि मुख्यमंत्री मंगलवार को जब दया छपरा आएंगे तो इनसे भी मिलेंगे। पर बरसात ने इनकी सारी आस पर पानी फेर दिया। मुख्यमंत्री आए तो पर विशिष्ठ जनों के बीच कुछ एक लोगों से मिलकर ही खराब मौसम के बीच उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके बाद अधिकारियों, राजनेताओं की गाड़ियां धड़ाधड़ वहां से निकलीं। सड़क किनारे खड़े बाढ़ पीड़ित आस भरी नजरों से इन्हें देखते भी रहे। पर तेज बारिश के बीच इन बाढ़ पीड़ितों से मिलने और आश्वासन देने के लिए कोई भी राजनेता गाड़ी के बाहर नहीं आया।
उधर, प्रशासन की सारी व्यवस्था ध्वस्त नजर आई। खुले में पड़े इन बाढ़ पीड़ितों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। इन्हें यहां से हटाकर सुरिक्षत जगहों पर ले जाने, सामुदायिक भवन या किसी स्कूल में ले जाकर उन्हें सुरक्षित करने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। इस दौरान किसी ने मुख्यमंत्री के कान में यह बात फूंकी तो उन्होंने तत्काल जिला प्रशासन से इन लोगों को सामुदायिक केंद्रों या स्कूलों समेत सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए जिला प्रशासन को आदेश दे दिया। उधर, मुख्यमंत्री के आने के साथ ही तेज बारिश हुई। करीब पांच घंटे चली इस बारिश और तेज हवा ने बाढ़ पीड़ितों की जैसे जान ही निकाल दी। उनके लगाए तिरपाल आदि हवा में उड़ गए। बारिश में उनका सभी सामान भीग गया और वे लोग पानी में भीगते, आंखों में आंसू बहाते दिखाई दिए। बाढ़ पीड़ि रवि कुमार ने कहा कि पिछले तीन दिनों से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। जबकि रत्ना देवी, सुरेश, रंजीत और श्याम आदि ने भी कहा कि उन्हें अब तक किसी भी सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जाया गया। बाढ़ के बाद अब बारिश की उनपर दोहरी मार पड़ रही है।
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अमर उजाला संवाददाता जब इन लोगों के बीच गया तो पाया कि किसी तरह इन लोगों ने पॉलिथीन और तिरपाल से टेंट बनाई थी। वह भी तेज बारिश के दौरान ढह गई। पूरा परिवार, लड़के-बच्चे और पशु सभी खुले आसमान के नीचे तेज बरसात में भीगते दिखाई दिए। इन लोगों के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी व्यवस्था नहीं दिखी। ना ही ढंग के टेंट दिखे और न ही खाने पीने की कोई चीज ही मुहैया कराई गई थी। इन सभी को आस थी कि मुख्यमंत्री मंगलवार को जब दया छपरा आएंगे तो इनसे भी मिलेंगे। पर बरसात ने इनकी सारी आस पर पानी फेर दिया। मुख्यमंत्री आए तो पर विशिष्ठ जनों के बीच कुछ एक लोगों से मिलकर ही खराब मौसम के बीच उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके बाद अधिकारियों, राजनेताओं की गाड़ियां धड़ाधड़ वहां से निकलीं। सड़क किनारे खड़े बाढ़ पीड़ित आस भरी नजरों से इन्हें देखते भी रहे। पर तेज बारिश के बीच इन बाढ़ पीड़ितों से मिलने और आश्वासन देने के लिए कोई भी राजनेता गाड़ी के बाहर नहीं आया।
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उधर, प्रशासन की सारी व्यवस्था ध्वस्त नजर आई। खुले में पड़े इन बाढ़ पीड़ितों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। इन्हें यहां से हटाकर सुरिक्षत जगहों पर ले जाने, सामुदायिक भवन या किसी स्कूल में ले जाकर उन्हें सुरक्षित करने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। इस दौरान किसी ने मुख्यमंत्री के कान में यह बात फूंकी तो उन्होंने तत्काल जिला प्रशासन से इन लोगों को सामुदायिक केंद्रों या स्कूलों समेत सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए जिला प्रशासन को आदेश दे दिया। उधर, मुख्यमंत्री के आने के साथ ही तेज बारिश हुई। करीब पांच घंटे चली इस बारिश और तेज हवा ने बाढ़ पीड़ितों की जैसे जान ही निकाल दी। उनके लगाए तिरपाल आदि हवा में उड़ गए। बारिश में उनका सभी सामान भीग गया और वे लोग पानी में भीगते, आंखों में आंसू बहाते दिखाई दिए। बाढ़ पीड़ि रवि कुमार ने कहा कि पिछले तीन दिनों से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। जबकि रत्ना देवी, सुरेश, रंजीत और श्याम आदि ने भी कहा कि उन्हें अब तक किसी भी सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जाया गया। बाढ़ के बाद अब बारिश की उनपर दोहरी मार पड़ रही है।
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