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बलिया में लक्ष्मी प्रतिमा विसर्जन के दौरान मरने वालों में दो इकलौते, एक की छह माह पहले हुई थी शादी
Wed, 30 Oct 2019 08:38 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Wed, 30 Oct 2019 08:38 PM IST
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रोते बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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बलिया के डूहा बिहरा में सरयू (घाघरा) नदी में हुए हादसे के लिए सीधे-सीधे तहसील और पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है। दुर्गा पूजा के समय इलाके के तीन घाटों पर प्रशासन की ओर से नदी के पास गड्ढे खोदे जाते हैं, जिनमें प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। इससे दो फायदे होते हैं पहला नदी प्रदुषण से बच जाती है और समिति के युवक गहरे पानी में नहीं जा पाने के कारण हादसे के शिकार भी नहीं हो पाते हैं।
लेकिन इस बार ऐसी न तो कोई व्यवस्था की गई थी और न ही मौके पर पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी की तैनाती की गई थी। मरने वाले तीनों युवकों में दो इकलौते थे, जबकि एक की अभी छह माह पहले ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी इस समय गर्भवती है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबे बेचु पुत्र लालू बंसफोर की अभी छह माह पहले ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी गुड्डी इस समय गर्भवती है।
पति के मौत की जानकारी के बाद वह बेसुध है और परिवार वालों को इस बात की चिंता खाए जा रही है कि कहीं उसके गम में उसकी निशानी को कोई आघात न पहुंच जाए। बंशीबाजार निवासी रौशन पुत्र भरत की भी इकलौती संतान था। इसके पिता की बंशीबाजार चौराहे पर मिठाई की दुकान है। इस दुकान से ही परिवार का भरण-पोषण होता है। वह भी पिता के साथ दुकान पर बैठता था।
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उसके मौत की सूचना आने के बाद से उसकी मां की हालत पागलों जैसी हो गई है। बंशीबाजार निवासी मोनू पुत्र नवीन गुप्ता दो भाईयों में छोटा था। वह पिता के साथ ही मूर्तियां बनाने का काम करता था। हादसे के बाद इनके परिवार में मातम छाया हुआ है। विसर्जन के दौरान ट्राली से मूर्ति को लेकर गए युवक प्रतिमा को लेकर गहरे पानी में चले गए। वहां अचानक प्रतिमा असंतुलित होकर पलट गई। उसके नीचे कई युवक दब गए।
बाकी तो किसी तरह निकल गए, लेकिन छह वहां से नहीं निकल पा रहे थे। तब तक हो हल्ला सुनकर जुटे युवकों ने पानी में छलांग लगा दी थी। उन्होंने संविधान और बिल्लू के साथ एक और युवक को तो किसी तरह बचा लिया, लेकिन रौशन, मोनू और बेचू को जब तक निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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लेकिन इस बार ऐसी न तो कोई व्यवस्था की गई थी और न ही मौके पर पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी की तैनाती की गई थी। मरने वाले तीनों युवकों में दो इकलौते थे, जबकि एक की अभी छह माह पहले ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी इस समय गर्भवती है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबे बेचु पुत्र लालू बंसफोर की अभी छह माह पहले ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी गुड्डी इस समय गर्भवती है।
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पति के मौत की जानकारी के बाद वह बेसुध है और परिवार वालों को इस बात की चिंता खाए जा रही है कि कहीं उसके गम में उसकी निशानी को कोई आघात न पहुंच जाए। बंशीबाजार निवासी रौशन पुत्र भरत की भी इकलौती संतान था। इसके पिता की बंशीबाजार चौराहे पर मिठाई की दुकान है। इस दुकान से ही परिवार का भरण-पोषण होता है। वह भी पिता के साथ दुकान पर बैठता था।
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उसके मौत की सूचना आने के बाद से उसकी मां की हालत पागलों जैसी हो गई है। बंशीबाजार निवासी मोनू पुत्र नवीन गुप्ता दो भाईयों में छोटा था। वह पिता के साथ ही मूर्तियां बनाने का काम करता था। हादसे के बाद इनके परिवार में मातम छाया हुआ है। विसर्जन के दौरान ट्राली से मूर्ति को लेकर गए युवक प्रतिमा को लेकर गहरे पानी में चले गए। वहां अचानक प्रतिमा असंतुलित होकर पलट गई। उसके नीचे कई युवक दब गए।
बाकी तो किसी तरह निकल गए, लेकिन छह वहां से नहीं निकल पा रहे थे। तब तक हो हल्ला सुनकर जुटे युवकों ने पानी में छलांग लगा दी थी। उन्होंने संविधान और बिल्लू के साथ एक और युवक को तो किसी तरह बचा लिया, लेकिन रौशन, मोनू और बेचू को जब तक निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।