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काश! पति संतोष के साथ बाइक पर बैठ जाती राबड़ी देवी
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घोघा। बांसडीह सहतवार मार्ग पर स्थित कांशीराम आवास के पास टेंपो और ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत में चार लोगों की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया। वहीं घटना की सूचना डुमरिया गांव पहुंचते ही शादी का माहौल गम में तब्दील हो गया। रूदन-क्रंदन से माहौल जहां गमगीन है, वहीं घटना के बाद से नकहरा गांव में सियापा पसरा हुआ है।
गंगासागर राजभर की पुत्रवधू राबड़ी देवी को क्या पता था कि वे पहली बार अपने पति के मामा के यहां जाते वक्त काल के गाल में समा जाएगी। वहीं राबड़ी देवी के पति संतोष का नसीब अच्छा रहा कि सभी लोगों के कहने के बावजूद वह टेंपो में नहीं बैठा और बाइक से ही जा रहा था। जिससे संतोष बाल-बाल बच गया। घटना के बाद रोते हुए संतोष यही कह रहा था कि मैं अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बता ही रहा था कि तुम भी मेरे साथ बाइक में बैठ जाओ, लेकिन वह नहीं बैठी। वहीं उसके चचेरे भाई धर्मेंद्र राजभर के लड़का मोनू एवं लड़की सिद्धि की भी इस घटना में मौत हो गई। एक ही पट्टीदारी में चार-चार मौत हो जाने के कारण पूरे परिवार में कोहराम मच गया। करूण क्रंदन देख सबकी आंखे बरबस ही डबडबा जा रही थी।
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गंगासागर राजभर की पुत्रवधू राबड़ी देवी को क्या पता था कि वे पहली बार अपने पति के मामा के यहां जाते वक्त काल के गाल में समा जाएगी। वहीं राबड़ी देवी के पति संतोष का नसीब अच्छा रहा कि सभी लोगों के कहने के बावजूद वह टेंपो में नहीं बैठा और बाइक से ही जा रहा था। जिससे संतोष बाल-बाल बच गया। घटना के बाद रोते हुए संतोष यही कह रहा था कि मैं अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बता ही रहा था कि तुम भी मेरे साथ बाइक में बैठ जाओ, लेकिन वह नहीं बैठी। वहीं उसके चचेरे भाई धर्मेंद्र राजभर के लड़का मोनू एवं लड़की सिद्धि की भी इस घटना में मौत हो गई। एक ही पट्टीदारी में चार-चार मौत हो जाने के कारण पूरे परिवार में कोहराम मच गया। करूण क्रंदन देख सबकी आंखे बरबस ही डबडबा जा रही थी।
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