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Ballia News: एक डिजिटल एक्सरे मशीन पर 200 मरीजों का भार, जांच के लिए 2 घंटे करना पड़ता है इंतजार
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जिला अस्पताल के एक्सरे कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
बलिया। जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन पर जांच कराने के लिए प्रतिदिन 200 सौ मरीज लाइन लगाते हैं। जांच के लिए दो से तीन घंटे का इंतजार करना पड़ता है। मरीजों की मांग है कि एक मशीन और लगाई जाए।
शनिवार को अस्पताल के ओपीडी में करीब 1321 मरीज इलाज कराने पहुंचे। हड्डी रोग, फिजिशियन, हड्डी सहित अन्य विभागों के करीब तीन सौ से अधिक मरीजों को एक्सरे जांच चिकित्सक ने लिखी।
डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले एक्सरे जांच कराने की सलाह देते हैं। एक्सरे कक्ष के बाहर नौ बजे तक 40 से 50 लोगों की लाइन लगी थी। 11 बजे तक महिला पुरुष की अलग-अलग लाइन के अलावा गेट पर भीड़ लगी थी।
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इसी तरह अन्य जांचों में दोपहर दो बजे तक करीब 132 मरीजों की एक हजार से अधिक जांचें हुई। अस्पताल में आयुष व ईएमओ द्वारा एक मरीज को आठ से दस जांच लिखी जा रही हैं।
12 बजे के बाद आने वाले मरीज भीड़ होने के कारण मरीज निराश होकर निजी जांच केंद्रों पर जांच कराते हैं। धन के अभाव में मरीज दूसरे दिन लाइन में लग कर जांच कराते हैं। अस्पताल में रोजाना शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों व बिहार के तटवर्ती क्षेत्रों के मरीज पहुंचते हैं। इनमें दुर्घटना में घायल, हड्डी टूटने, सीने के संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज शामिल हैं।
बैठने की भी नहीं है व्यवस्था: एक्स-रे कक्ष के बाहर मरीजों व तीमारदारों को बैठने के लिए सिर्फ दो स्टील की कुर्सी लगाई गई हैं, जिस पर तीन से चार मरीज बैठते हैं। लंबी लाइन होने के कारण मरीज व तीमारदार गलियारे में जमीन पर बैठकर अपना नंबर आने का इंतजार करते हैं। जहां बैठने की व्यवस्था है, वहां पंखा नहीं है, जिससे गर्मी में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी होती है।
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शनिवार को अस्पताल के ओपीडी में करीब 1321 मरीज इलाज कराने पहुंचे। हड्डी रोग, फिजिशियन, हड्डी सहित अन्य विभागों के करीब तीन सौ से अधिक मरीजों को एक्सरे जांच चिकित्सक ने लिखी।
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डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले एक्सरे जांच कराने की सलाह देते हैं। एक्सरे कक्ष के बाहर नौ बजे तक 40 से 50 लोगों की लाइन लगी थी। 11 बजे तक महिला पुरुष की अलग-अलग लाइन के अलावा गेट पर भीड़ लगी थी।
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इसी तरह अन्य जांचों में दोपहर दो बजे तक करीब 132 मरीजों की एक हजार से अधिक जांचें हुई। अस्पताल में आयुष व ईएमओ द्वारा एक मरीज को आठ से दस जांच लिखी जा रही हैं।
12 बजे के बाद आने वाले मरीज भीड़ होने के कारण मरीज निराश होकर निजी जांच केंद्रों पर जांच कराते हैं। धन के अभाव में मरीज दूसरे दिन लाइन में लग कर जांच कराते हैं। अस्पताल में रोजाना शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों व बिहार के तटवर्ती क्षेत्रों के मरीज पहुंचते हैं। इनमें दुर्घटना में घायल, हड्डी टूटने, सीने के संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज शामिल हैं।
बैठने की भी नहीं है व्यवस्था: एक्स-रे कक्ष के बाहर मरीजों व तीमारदारों को बैठने के लिए सिर्फ दो स्टील की कुर्सी लगाई गई हैं, जिस पर तीन से चार मरीज बैठते हैं। लंबी लाइन होने के कारण मरीज व तीमारदार गलियारे में जमीन पर बैठकर अपना नंबर आने का इंतजार करते हैं। जहां बैठने की व्यवस्था है, वहां पंखा नहीं है, जिससे गर्मी में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी होती है।