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Ballia News: बीत गए एक महीने, नौरंगा गंगा घाट पर नहीं बना पीपा पुल
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मझौंवा क्षेत्र के पचरुखिया काली मंदिर के सामने बांध कर रखा गया नौरंगा घाट पर लगने वाला पीपा पुल
मझौवां। नौरंगा गंगा घाट पर पीपा पुल न लगने से अब ग्रामीणों में आक्रोश है। गंगा उस पार के लोगों का सब्र जवाब देने लगा है। शासन ने 15 नवंबर तक पुल तैयार होने का दावा किया था, लेकिन तय समय बीतने के पूरे 30 दिन बाद भी लोक निर्माण विभाग ने काम शुरू नहीं किया है।
गंगा के दक्षिणी किनारे बसे नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, भगवानपुर समेत करीब एक दर्जन गांवों के लगभग 35 हजार लोग आज भी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने के लिए मजबूर हैं। उफनती गंगा और डगमगाती नावें यही इन लोगों की नियति बन चुकी है। जिला मुख्यालय, जिला अस्पताल, स्कूल, कॉलेज सब तक पहुंचना एक खतरनाक सफर है। मरीज हों, गर्भवती महिलाएं हों या नन्हे स्कूली बच्चे हर कोई रोज मौत से आंख मिचौली खेलते हुए गंगा पार करता है।
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पीपा पुल बन जाए तो जिला मुख्यालय पहुंचना होगा आसान
नौरंगा गांव के सामने पीपा पुल बन जाए तो जिला मुख्यालय की दूरी 30 किलोमीटर रह जाएगी, लेकिन पुल न होने की वजह से लोगों को बिहार घाट या जनेश्वर मिश्र सेतु (शिवरामपुर) होते हुए 55 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे सबसे बड़ी दिक्कत उन किसानों को हो रहीं है जिनके खेत गंगा नदी के दक्षिण दिशा में हैं। क्षेत्र के दर्जनों गांवों में चौबे छपरा, हरदेव छपरा, रिकनी छपरा, नारायणपुर, पाण्डेयपुर, शाहपुर, बुल्लापुर, मीनापुर आदि गांवों के किसानों को रबी की फसल लगाने के लिए लगभग 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
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एसडीएम बैरिया आलोक कुमार सिंह ने कहा कि यह बात मेरे संज्ञान में नहीं थी, मैं अभी पीपा पुल से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दे रहा हूं कि जनहित को ध्यान रखते हुए शीघ्र पीपा पुल बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाय। नियमत: अब तक बन जाना चाहिए था।
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गंगा के दक्षिणी किनारे बसे नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, भगवानपुर समेत करीब एक दर्जन गांवों के लगभग 35 हजार लोग आज भी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने के लिए मजबूर हैं। उफनती गंगा और डगमगाती नावें यही इन लोगों की नियति बन चुकी है। जिला मुख्यालय, जिला अस्पताल, स्कूल, कॉलेज सब तक पहुंचना एक खतरनाक सफर है। मरीज हों, गर्भवती महिलाएं हों या नन्हे स्कूली बच्चे हर कोई रोज मौत से आंख मिचौली खेलते हुए गंगा पार करता है।
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पीपा पुल बन जाए तो जिला मुख्यालय पहुंचना होगा आसान
नौरंगा गांव के सामने पीपा पुल बन जाए तो जिला मुख्यालय की दूरी 30 किलोमीटर रह जाएगी, लेकिन पुल न होने की वजह से लोगों को बिहार घाट या जनेश्वर मिश्र सेतु (शिवरामपुर) होते हुए 55 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे सबसे बड़ी दिक्कत उन किसानों को हो रहीं है जिनके खेत गंगा नदी के दक्षिण दिशा में हैं। क्षेत्र के दर्जनों गांवों में चौबे छपरा, हरदेव छपरा, रिकनी छपरा, नारायणपुर, पाण्डेयपुर, शाहपुर, बुल्लापुर, मीनापुर आदि गांवों के किसानों को रबी की फसल लगाने के लिए लगभग 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
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एसडीएम बैरिया आलोक कुमार सिंह ने कहा कि यह बात मेरे संज्ञान में नहीं थी, मैं अभी पीपा पुल से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दे रहा हूं कि जनहित को ध्यान रखते हुए शीघ्र पीपा पुल बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाय। नियमत: अब तक बन जाना चाहिए था।