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हुई खूब कवायद, नहीं बदल सकी गांवों की तस्वीर
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बलिया।गांवों को साफ-सुथरा बनाने को लेकर कई तरह की कवायदें की गईं। यहां तक गांवों को ओडीएफ करने को लेकर छह साल पहले स्वच्छ भारत मिशन भी शुरू किया गया। गांवों में निगरानी समिति और जिले स्तर पर डीसी और ब्लॉक स्तर पर बीसी की तैनाती की गई थी ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। अब ये टीमें पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी हैं। इसके अलावा गांवों की सफाई के लिए सफाईकर्मियों की भी तैनाती की गई है लेकिन तमाम कवायदें फेल साबित हो रहे और गांवों की तस्वीर नहीं बदल पा रही। अब यह लोगों के लिए मुद्दा बनता जा रहा है।
जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने 30 नवंबर 2018 को आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया। लेकिन धरातल पर शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। जनवरी 2019 में विभाग की ओर से घोषित गांवों का सत्यापन जब मंडलीय टीम ने किया तो कहीं शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ था। इतना ही नहीं कई गांवों में सड़कों पर शौच मिला। इसके आधार पर मंडलीय टीम ने घोषित 1843 गांवों के सापेक्ष 1094 गांवों के घोषित ओडीएफ को अमान्य कर दिया। हालांकि इसके बाद ओडीएफ प्लस के तहत छूटे परिवारों का सर्वे किया गया। वर्ष 2021-22 मे ओडीएफ प्लस को लागू किया गया। अब तक जिले में कुल 402840 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ओडीएफ प्लस में भी अभी तक 35 राजस्व गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। अभी भी करीब चार हजार शौचालय निर्माणाधीन हैं।
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कहीं नहीं दिखते स्वेच्छाग्राही
गांवों को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2017-18 में ट्रिगरिंग की व्यवस्था की गई और इसके लिए गांव के लोगों को बतौर स्वेच्छाग्राही बनाया गया। कुल 380 स्वेच्छाग्राही का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। इस पर पंचायती राज विभाग की ओर से कुल 40 लाख की धनराशि खर्च की गई। स्वेच्छाग्राही सीटी बजाकर खुले में शौच करने वालों को मना करने का काम करते थे। लेकिन कुछ माह के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई।
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सैकड़ों परिवार हैं शौचालय विहीन
बैरिया। कागजों में गांवों में शौचालयों का निर्माण कराकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। लेकिन आज भी सैकड़ों परिवार शौचालय विहीन है। ग्राम पंचायतों के मलिन बस्तियों के घर शौचालय न होने से महिलाएं आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। बैरिया विकास खंड के कई मुख्य मार्गो के किनारे लोग खुले में शौच करते हैं। बीते दो-तीन वर्ष पूर्व घंटी बजाओ अभियान चलाकर खुले में शौच रोकने के प्रयास किया गया लेकिन उक्त अभियान भी फ्लॉप हो गया।
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सभी गांव ओडीएफ, सड़कों पर गंदगी का अंबार
रसड़ा। ब्लॉक के सभी गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि आज भी लोग ग्रामीण अंचलों में खुले में शौच करने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा गावों में लगभग 23 हजार व्यक्तिगत शौचालय एवं 72 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। फिर भी सड़कों पर या खेतों में लोग खुले में शौच को जाते हैं। आज भी गांवों की सड़कों पर गंदगी का अंबार है।
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हर माह केवल पगार ही होता है 7.12 करोड़ खर्च
गांवों की सफाई के लिए सफाई कर्मचारी की तैनाती है और हर महीने सात करोड़ से अधिक वेतन पर खर्च होता है, इसके बावजूद गांवों में कूड़े का अंबार लगा रहता है। कई सफाईकर्मियों को तो शासनादेश के विपरीत विभिन्न कार्यालयों से संबद्ध किया गया है। गांवों की सफाई के लिए पंचायती राज विभाग की ओर से वर्ष 2009-10 में सफाईकर्मियों की तैनाती की गई। वर्तमान में कुल 2302 सफाईकर्मी कार्यरत हैं। विभागीय आंकड़ें के अनुसार सफाईकर्मियों के वेतन पर हर महीने पंचायती राज विभाग की ओर से करीब 7.12 करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा गांव की सफाई के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत की ओर से सफाई संयत्र आदि खरीदने के लिए हर साल 30 से 50 हजार रुपये धनराशि खर्च की जाती है जो करीब चार करोड़ की होती है। लेकिन इस भारी भरकम धनराशि खर्च होने के बावजूद गांवों की सफाई नहीं हो पा रही है।
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बेस लाइन सर्वे के आधार पर 2019 में
ओडीएफ राजस्व गांव- 1843
ओडीएफ प्लस में शामिल राजस्व गांव- 1843
अब तक घोषित ओडीएफ प्लस गांव- 35
कुल बने शौचालय- 402840
सामुदायिक शौचालय लक्ष्य-818
सामुदायिक शौचालय पूर्ण- 734
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जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने 30 नवंबर 2018 को आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया। लेकिन धरातल पर शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। जनवरी 2019 में विभाग की ओर से घोषित गांवों का सत्यापन जब मंडलीय टीम ने किया तो कहीं शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ था। इतना ही नहीं कई गांवों में सड़कों पर शौच मिला। इसके आधार पर मंडलीय टीम ने घोषित 1843 गांवों के सापेक्ष 1094 गांवों के घोषित ओडीएफ को अमान्य कर दिया। हालांकि इसके बाद ओडीएफ प्लस के तहत छूटे परिवारों का सर्वे किया गया। वर्ष 2021-22 मे ओडीएफ प्लस को लागू किया गया। अब तक जिले में कुल 402840 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ओडीएफ प्लस में भी अभी तक 35 राजस्व गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। अभी भी करीब चार हजार शौचालय निर्माणाधीन हैं।
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कहीं नहीं दिखते स्वेच्छाग्राही
गांवों को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2017-18 में ट्रिगरिंग की व्यवस्था की गई और इसके लिए गांव के लोगों को बतौर स्वेच्छाग्राही बनाया गया। कुल 380 स्वेच्छाग्राही का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। इस पर पंचायती राज विभाग की ओर से कुल 40 लाख की धनराशि खर्च की गई। स्वेच्छाग्राही सीटी बजाकर खुले में शौच करने वालों को मना करने का काम करते थे। लेकिन कुछ माह के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई।
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सैकड़ों परिवार हैं शौचालय विहीन
बैरिया। कागजों में गांवों में शौचालयों का निर्माण कराकर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। लेकिन आज भी सैकड़ों परिवार शौचालय विहीन है। ग्राम पंचायतों के मलिन बस्तियों के घर शौचालय न होने से महिलाएं आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। बैरिया विकास खंड के कई मुख्य मार्गो के किनारे लोग खुले में शौच करते हैं। बीते दो-तीन वर्ष पूर्व घंटी बजाओ अभियान चलाकर खुले में शौच रोकने के प्रयास किया गया लेकिन उक्त अभियान भी फ्लॉप हो गया।
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सभी गांव ओडीएफ, सड़कों पर गंदगी का अंबार
रसड़ा। ब्लॉक के सभी गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि आज भी लोग ग्रामीण अंचलों में खुले में शौच करने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा गावों में लगभग 23 हजार व्यक्तिगत शौचालय एवं 72 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। फिर भी सड़कों पर या खेतों में लोग खुले में शौच को जाते हैं। आज भी गांवों की सड़कों पर गंदगी का अंबार है।
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हर माह केवल पगार ही होता है 7.12 करोड़ खर्च
गांवों की सफाई के लिए सफाई कर्मचारी की तैनाती है और हर महीने सात करोड़ से अधिक वेतन पर खर्च होता है, इसके बावजूद गांवों में कूड़े का अंबार लगा रहता है। कई सफाईकर्मियों को तो शासनादेश के विपरीत विभिन्न कार्यालयों से संबद्ध किया गया है। गांवों की सफाई के लिए पंचायती राज विभाग की ओर से वर्ष 2009-10 में सफाईकर्मियों की तैनाती की गई। वर्तमान में कुल 2302 सफाईकर्मी कार्यरत हैं। विभागीय आंकड़ें के अनुसार सफाईकर्मियों के वेतन पर हर महीने पंचायती राज विभाग की ओर से करीब 7.12 करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा गांव की सफाई के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत की ओर से सफाई संयत्र आदि खरीदने के लिए हर साल 30 से 50 हजार रुपये धनराशि खर्च की जाती है जो करीब चार करोड़ की होती है। लेकिन इस भारी भरकम धनराशि खर्च होने के बावजूद गांवों की सफाई नहीं हो पा रही है।
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बेस लाइन सर्वे के आधार पर 2019 में
ओडीएफ राजस्व गांव- 1843
ओडीएफ प्लस में शामिल राजस्व गांव- 1843
अब तक घोषित ओडीएफ प्लस गांव- 35
कुल बने शौचालय- 402840
सामुदायिक शौचालय लक्ष्य-818
सामुदायिक शौचालय पूर्ण- 734